लोकसभा चुनाव 2019- रहस्यमय बन गए हैं इस बार मुंबई के मतदाता

 21 Apr 2019  589

►भाजपा-शिवसेना गठबंधन को हो सकता है नुकसान

मेट्रो हलचल टीम

मुंबई, (21 अप्रैल 2019)- देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के चुनाव पर हमेशा लोगों की नज़र रहती है। इस बार भी लोग यह जानने के लिए उत्सुक कि मुंबई की छह सीटों पर किसका कब्ज़ा होगा? ऐसा पहली बार हो रहा है कि राजनीति पर नज़र रखने वाले इस बार मतदाताओं का दिल नहीं टटोल पा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि मुंबई में भी एक डर करंट है, जिसका अंदाजा लोग नहीं लगा पा रहे हैं। अंडर करंट ही भारतीय जनता पार्टी ताकत है। अगर इस बार कोई अंडर करंट न हुई तो मुंबई में भाजपा शिवसेना को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव 2019 में इस बार यहां कांग्रेस पांच उम्मीदवार हैं, जबकि भाजपा और शिवसेना के तीन-तीन और एनसीपी का एक उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। इस बार बसपा ने भी पांच प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, तो सपा का एक उम्मीदवारअपनी किस्मत आजमा रहा है।

लोकसभा की उत्तर मुंबई सीट पर भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी  संघर्ष करते हुए दिख रहे हैं। गोपाल शेट्टी को 2014 के चुनाव में 6,64,004 थे जबकि कांग्रेस उम्मीदवार संजय निरुपम को 2,17,422 वोट से संतोष करना पड़ा था। इस तरह गोपाल शेट्टी ने 4.6 लाख वोटों से भारी जीत दर्ज की थी। शिवसेना से बेशक गठबंधन है, लेकिन दहिसर में भाजपा की विधायक मनीषा चौधरी लेकिन मागाठाणे, जहां शिवसेना के प्रकाश सुर्वे की तरह इस मराठी बाहुल्य विधान सभा में भी गोपाल शेट्टी कठिन संघर्ष कर रहे हैं। बोरीवली विधान सभा के में लोगों का कहना है कि विनोद तावड़े ने कोई काम नहीं किया। कमोबेश इसी तरह की नाराजगी कांदिवली और चारकोप के विधायक द्वय अतुल भातखलकर और योगेश सागर के बारे में है। कांदिवली में रमेश सिंह ठाकुर के भाजपा में आने का कोई लाभ भाजपा उम्मीदवार को नहीं मिल रहा है। रमेश ठाकुर फ़िलहाल भाजपा में हैं, लेकिन उनका तन-मन अब भी कांग्रेस में ही है।

मुस्लिम बाहुल्य मालाड पश्चिम (मालवणी) कांग्रेस विधायक असलम शेख ने बेशक पहले उर्मिला मातोंडकर का विरोध किया था, लेकिन अब वह कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार कर रहे हैं। उर्मिला को जिस तरह ‘ट्रिपल एम’ यानी मराठियों, मुस्लिमों और महिलाओं का जिस तरह भारी समर्थन मिल रहा है, वह सभी अगर वोट में तब्दील हुआ तो गोपाल शेट्टी मुसीबत में पड़ सकते हैं। बॉलीवुड ऐक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर के रूप में कांग्रेस को इस संसदीय क्षेत्र पर कठिन चुनौती देने वाली उम्मीदवार मिल गई है। पांच पांच (मराठी, कोंकणी, हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी) फर्राटेदार भाषा बोलने वाली उर्मिला की बढञती लोकप्रियता ने गोपाल शेट्टी का ब्लडप्रेशर बढ़ा दिया है। कई लोगों का तो यह भी मानना है कि उर्मिला उसी तरह 2004 के चुनाव नतीजे की पुनरावृत्ति कर सकती हैं, जिस तरह गोविंदा ने धुरंधर राजनीतिज्ञ राम नाईक का जनप्रतिनिधित्व करीयर ही खत्म कर दिया था। इसके बावजूद मुंबई में भाजपा की यह सुरक्षित सीट मानी जाती है। इसका लाभ शर्तिया गोपाल शेट्टी को मिल सकता है।

लोकसभा की मुंबई उत्तर पश्चिम संसदीय सीट में पहले कांग्रेस उम्मीदवार और मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम की जीत पक्की मानी जा रही थी, लेकिन समाजवादी पार्टी की ओर से सुभास पासी के चुनावी मैदान में उतरने से संजय निरुपम का समीकरण खराब हो गया है। वैसे यह सीट संजय निरुपम के धुर विरोधी रहे गुरुदास कामत की रही है। लिहाजा यहां संजय निरुपम को कामत समर्थकों की भी नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा सुभाष पासी के चलते यहां कांग्रेस की एकमुश्त मुस्लिम वोटों में बंटवारा होने का खतरा है। शिवसेना सांसद गजानन कीर्तिकर मुंबई के सबसे नकारा सांसद की इमैज बना चुके थे। लग रहा था बीमार कीर्तिकर की जगह शिवसेना किसी और को टिकट देगी, लेकिन जब शिवसेना की ओर से उन्हें दोबारा पार्टी का उम्मीदवार बनाया तो राजनैतिक हलकों में बहुत हैरानी जताई गई।

इस संसदीय क्षेत्र की गोरेगांव, अंधेरी पूर्व और वर्सोवा उत्तर बाहुल्य विधान सभा हैं, हांलाकि विद्या ठाकुर के रूप में केवल गोरेगांव में ही उत्तर भारतीय विधायक है। वर्सोवा में भाजपा की भारती लवेकर और अंधेरी पूर्व में शिवसेना के रमेश लटके मराठी विधायक है। इन तीनों विधान सभा में मराठी और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फिर भी इन तीनों विधान सभाओं में संजय निरुपम अच्छा लड़ रहे हैं। अंधेरी पश्चिम में और जोगेश्वरी विधान सभा में भी उनका प्रचार अच्छा चल रहा है। संजय निरुपम उत्तर भारतीयों की लड़ाई में हमेशा आगे रहे हैं। इसके अलावा वह फेरीवालों के एकमात्र हितैषी नेता। राहुल गांधी का 72 हजार सालाना पेंशन वाली न्याय योजना तो नहीं, हां, हर झोपड़ा धारक को 500 कारपेट वर्ग फीट का घर देने का वादा जरूर इस संसदीय क्षेत्र में असरकारक साबित हो रहा है। राजनैतिक हलकों में कहा जा रहा है कि अगर सुभास पासी 80 हजार वोट खींचते हैं तो संजय निरुपम की जीतनी की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।  

लोकसभा की मुंबई उत्तर पूर्व संसदीय सीट पर इस बार भाजपा ने शिवसेना के दबाव में अपने मौजूदा सांसद किरीट सोमैया का टिकट काट दिया। सोमैया पर आरोप है कि उन्होंने उद्धव ठाकरे और शिवसेना के कथित भ्रष्टाचार को सामने लाने का काम किया। इसीलिए उद्धव ठाकरे ने इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और भाजपा हाईकमान से कह दिया था कि अगर सोमैया को टिकट दिया तो पार्टी अपना उम्मीदवार उतार देगी। बहरहाल, कुछ सर्वे में केंद्र सरकार की खराब इमैज का जिक्र होने पर भाजपा घबरा गई और अपने सहयोगियों की हर मांग के आगे घुटने टेक दिया। मुंबई उत्तर पूर्व में भी सोमैया की जगह नगरसेवक मनोज कोटक को चुनाव मैदान में उतार दिया। यहां मनोज कोटक के साथ साथ भाजपा संगठन भी चुनाव प्रचार में जी जान से जुटा है। मनोज कोटक को लोगों का बहुत बढिया रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसीलिए राजनैतिक टीकाकारों का एक तबका इस बिना पर इस सीट को भी भाजपा के लिए सेफ मान कर चल रहा है।

बहरहाल, इस संसदीय क्षेत्र में यहां एक और कहानी समानांतर रूप से चल रही है। कहा जा रहा है कि किरीट सोमैया, राम कदम घाटकोपर पश्चिम से विधायक) और प्रकाश मेहता (घाटकोपर पूर्व से विधायक) की तिकड़ी मनोज कोटक को हराने के लिए एकजुट हो गई है। इतना ही नहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार संजय दीना पाटिल हर बिल्डिंग से लोगों का बुलाकर वोट डालने की अपील कर रहे हैं। भाडुप और मुलुंड में रहने वाले व्यापारी वर्ग को संजयभाऊ की अपील धमकी जैसी लगती है, क्योंकि कहा जा रहा है कि वह यह भी कहते हैं कि सोमैया-कदम-मेहता चाहते हैं कि इस बार मनोज कोटक की जगह वह सांसद बनें इसलिए घड़ी को वोट दीजिए। वह अपील के साथ साथ यह भी कहते हैं, कि चुनाव होने के बाद मैं यह भी देखूंगा कि किसने मुझे वोट नहीं दिया।  

लोकसभा की मुंबई उत्तर मध्य संसदीय सीट पर इस बार भी दो नेता पुत्रियों के बीच मुकाबला है। मौजूदा सांसद प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन राव को चुनौती दे रही हैं, सुनील दत्त की पुत्री पूर्व सांसद प्रिया दत्त। इस लोकसभा चुनाव क्षेत्र के मतदाता इन दोनों उम्मीदवारों से परेशान हैं, क्योंकि आरोप है कि दोनों चुनाव जीतने और हारने के बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र से गायब हो जाती हैं। पहले प्रिया दत्त थी जो चुनाव जीतने के बाद भी दिखाई नहीं देती थी और हार के बाद तो लापता ही हो गई। अब पिछले पांच साल भाजपा की पूनम महाजन जीतने के बाद मतदाताओं से दूर हो गई थीं। प्रिया और पूनम दोनों उम्मीदवारों को लेकर मतदाता बड़े ही पशोपेश में हैं। राजनैतिक टीकाकारों का मानना है कि इस बार पूनम की सीट खतरे में दिख रही है, क्योंकि इस बार प्रिया बहुत पहले से सक्रिय होकर चुनाव प्रचार कर रही हैं। एक बात और पूनम के विपरीत जाती है वह है पूरे पांच साल तक उनका सीन से नदारत रहना। इसके अलावा भाजपा संगठन के लोग भी पूनम से नाराज बताए जाते हैं। हालांकि प्रिया दत्त के बारे में भी लोगों की यही राय है कि वह हमेशा ही अनअप्रोचेबल रही हैं।

सांसद और पूर्व सांसद के रूप में, लेकिन उन्हें जनप्रतिनिधि न होने का लाभ मिल रहा है। कहा जा रहा है कि यहां कांग्रेस पार्टी में इतनी गुटबाजी थी कि राहुल गांधी को मुंबई के कांग्रेस नेताओं को बुलाकर व्यक्तिगत रूप से प्रिया दत्त के साथ मिल कर काम करने का निर्देश देना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस नेता बराबर प्रिया दत्त के साथ देखे जा रहे हैं। इस सीट पर हालांकि इमरान खान को बसपा ने टिकट दिया है, लेकिन मुस्लिम वोट उनको मिलेंगे इसकी संभावना नहीं के बराबर है। इस तरह पूनम महाजन अगर सीट बचाना चाहती हैं, तो उन्हें बहुत अलर्ट रहना होगा।

मुंबई दक्षिण-मध्य लोकसभा सीट पर इस बार कुल 17 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इस दलित बाहुल्य संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और शिवसेना के अलावा बसपा के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। शिवसेना ने यहां से मौजूदा सांसद राहुल शेवाले को टिकट दिया है, जबकि वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ मैदान में हैं। बसपा ने यहां से अहमद शेख को अपना प्रत्याशी बनाया है। पिछली बार मोदी लहर में राहुल शेवाले ने कांग्रेस के दो बार के सांसद एकनाथ गायकवाड को हराकर भारी जीत दर्ज की थी। 2014 में इस लोक सभा सीट से शिवसेना के राहुल रमेश शेवाले ने 3,81,008 वोट पाकर जीत हासिल की। कांग्रेस के एकनाथ महादेव गायकवाड को 2,42,828 वोट मिले। तीसरे स्थान पर मनसे के आदित्य राजन शिरोडकर रहे जिन्हें 73,096 वोट मिले थे। इसी तरह पिछली बार आम आदमी पार्टी के सुंदर बालाकृष्णन 27 हजार 687 वोट पाकर चौथें स्थान पर रहे थे। इस बार मनसे और आप के चुनाव मैदान से बाहर रहने से कांग्रेस और शिवसेना के बीच सीधा मुकाबला है।

राजनैतिक हलकों में कहा जा रहा है कि यह इकलौती सीट है जहां दो मराठी उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं और पूरे देश की तरह इस संसदीय सीट पर मुस्लिम वोटों का रूझान केवल कांग्रेस की ओर दिख रहा है, क्योंकि बसपा प्रत्याशी अहमद शेख को मुस्लिम मतदाता बिल्कुल घास नहीं डाल रहे हैं। यही बात राहुल शेवाले के विरुद्ध जाती है। एकनाथ गायकवाड़ अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिखते हैं और कहते ही कि वह तीसरी बार इस क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी पूर्व मंत्री बेटी वर्षा गायकवाड़ यहां की धारावी विधान सभा क्षेत्र से विधायक हैं। गायकवाड़ को इसका भी लाभ मिलेगा। इसलिए अगर इस सीट से राहुल शेवाले को दोबारा लोकसभा में पहुंचना है तो उनको और ज्यादा हार्डवर्क करने की जरूरत है। वैसे अगर अंडर करंट की बात सच साबित हुई तो 23 मई को राहुल शेवाले की बांछे खिल सकती हैं।

दक्षिण मुंबई संसदीय क्षेत्र अचानक राष्ट्रीय चर्चा में आ गया जब देश के सबसे अमीर उद्दयोगपति मुकेश अंबानी ने इस सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेसी नेता मिलिंद देवड़ा का समर्थन करने की घोषणा कर दी। कांग्रेसी नेता मिलिंद देवड़ा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी उनका प्रचार करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में मुकेश अंबानी कहते हैं, "मिलिंद साउथ मुंबई के लिए सबसे सही शख्स है...मिलिंद को बॉम्बे संसदीय सीट के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक ताने-बाने की गहरी समझ है।" जहां एक ओर अनिल अंबानी राफेल डील को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के निशाने पर हैं, वहीं दूसरी ओपर बड़े भाई मुकेश अंबानी का कांग्रेस उम्मीदवार का प्रचार करना सबको चौंका रहा है। राहुल गांधी अक्सर याराना पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिजम) का हवाला देते हुए मोदी और अनिल अंबानी के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हैं।

वैसे यह सीट मिलिंद की सेफ सीट मानी जा रही है। राजनैतिक टीकाकार कह रहे हैं कि अगर मुकेश अंबानी ने दक्षिण मुंबई की सीट पर कांग्रेस के समर्थन करने का फैसला किया है तो कुछ सोच-समझ कर। दरअसल, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मुकेश अंबानी का कांग्रेस से रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा था, लेकिन कहा जा रहा है कि मुकेश अंबानी मिलिंद देवड़ा के मार्फत कांग्रेस से संबंध आत्मीय बनाएंगे। वैसे इस सीट पर शिवसेना के अरविंद सावंत शुरू से संकट में हैं। बेस्ट की हड़ताल को मराठी समुदाय के लोग अभी तक भूल नहीं पाए हैं। अरविंद मोदी के खिलाफ संसद और संसद के बाहर बहुत मुखर रहे। उन्होंने पार्टी लाइन का पालन करते हुए विपक्ष का किरदार निभाया। लेकिन जैसे शिवसेना किरीट सोमैया का विरोध किया, उस तरह भाजपा ने अरविंद सावंत का विरोध नहीं किया। हालांकि अब अरविंद सावंत मोदी के नाम पर वोट नहीं मांग पा रहे हैं। शिवड़ी, वरली में शिवसेना को भारी समर्थन प्राप्त है, लेकिन मुंबादेवी और मलाबार हिल में नुकसान हो सकता है।  

अब इस बार मुंबई में संसदीय चुनाव असली सूरते हाल क्या है? ऊंट किस करवट बैठता है? यह तो 23 मई को मतों की गिनती के समय पता चलेगा, लेकिन हर प्रत्याशी जीत के लिए दिन रात मेहनत कर रहा है। मुंबई के 94 लाख मतदाता यहां किस्मत आजमा रहे 116 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 29 अप्रैल को करेंगे।