भीमा कोरेगांव मामले की होगी जांच
10 Feb 2018
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►पूर्व मुख्य जज जे.एन.पटेल की अध्यक्षता में
►स्थापित होगी द्विसदस्यीय समिति
►जांच के लिए दिया गया है चार महिने का समय
मुंबई, (9 फरवरी 2018)- एक जनवरी 2018 के दिन भीमा कोरेगांव में हुई घटना की जांच कोलकता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्या. जे.एन. पटेल की अध्यक्षता में द्विसद्स्यीय समिति स्थापित करके की जाएगी। इससे संबंधित निर्णय शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लिया। जिसमें राज्य के मुख्य सचिव सुमित मलिक समिति के सदस्य होंगे। मुख्यमंत्री द्वारा भीमा कोरेगांव घटना की जांच उच्च न्यायालय के विद्यमान न्यायाधीश द्वारा किए जाने की घोषणा के बाद इस मामले से संबंधित विनंती पत्र उन्होंने स्वयं 4 जनवरी 2018 को राज्य के मुख्य न्यायाधीश को दिया था। जिसका उत्तर 6 फरवरी 2018 को मुंबई उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश श्रीमती विजया तहिलरामानी ने दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि हमने न्यायाधीशों की प्रशासकीय समिति के वरिष्ठ न्यायाधीशों से इस मामले में चर्चा किया। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मार्गदर्शक तत्वों पर भी विचार किया। जिसके परिणामस्वरूप विद्यमान न्यायाधीशों के बजाय तीन निवृत्त न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश हम सरकार के समक्ष कर रहे हैं। इसके अनुसार कोलकाता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्या. जे.एन.पटेल से विनंती करके उनकी अध्यक्षता में कमिशन आफ इंक्वायरी एक्ट के तहत 2 सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। पूर्व मुख्य न्या. जे.एन.पटेल यह समिति के अध्यक्ष होंगे, तो वहीं विद्यमान मुख्य सचिव सुमित मलिक समिति के सदस्य होंगे। इस समिति को मामले की जांच के लिए चार महिनों का समय दिया गया है।
► समिति की कार्यकक्षा इस प्रकार होगी
1. भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी में घटी घटनाओं का क्रम और उसके लिए कारणीभूत परिस्थितियों का जायजा लेना।
2. क्या इस घटना में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष व्यक्ति, व्यक्तियों का गट एंव संघटना कारणीभूत थे।
3. क्या इस घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस यंत्रणा ने जो भी नियोजन किया था वह पर्याप्त था।
4. क्या इस घटना को रोकने के लिए पुलिस द्वारा योग्य कार्रवाई की गई थी।
5. ऊपर के एक से चार मुद्दों से संबंधित जिम्मेदारी निश्चित करना।
6. भविष्य में एसी घटनाओं को टालने के लिए जिला प्रशासन व पुलिस को तत्कालिन और कायमस्वरूपी उपाययोजनाओं का सुझाव देना।
7. संबधित घटना की तर्ज पर अन्य महत्वपूर्ण सिफारिश करना।
► यह होंगे समिति के अधिकार
कलम 5 (2) अनुसार- किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कभी-भी जांच के लिए बुलाना।
कलम 5 (3) अनुसार- किसी भी स्थान व इमारत में कोई भी कागज पत्र जप्त करने के लिए प्रवेश करना या फिर प्रवेश के लिए किसी को भी अनुमति देना।
कलम 5 (5) अनुसार- इस समिति के समक्ष चलने वाली संपूर्ण कार्रवाई पूरी तरह न्यायालीन कार्रवाई के तौर पर चलाई जाएगी।