मिशन-2017 की तैयारियों में जुटी पार्टियां, किसी का APP लॉन्च तो कोई लगा रहा शिविर
19 Sep 2015
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लखनऊ. मिशन-2017 (यूपी विधानसभा चुनाव) की तैयारियों के लिए सभी राजनीतिक दल अभी से कमर कसने शुरू कर दिए हैं। बीजेपी हो या फिर सपा, बसपा या कांग्रेस। सभी पार्टियां इस लक्ष्य को भेदने में अपने-अपने नुस्खे अपनाने में लग गए हैं। सीएम अखिलेश यादव को जहां एक बार फिर खुद को साबित करना है, तो वहीं बीजेपी को बताना है कि अभी भी मोदी का जादू बरकरार है। दूसरी ओर, मायावती के लिए यह चुनाव जहां संजीवनी का काम करेगा, वहीं कांग्रेस की डूबती नैया का सहारा भी मिशन-2017 बन सकता है। ऐसे में इस चुनावी संग्राम को जीतने के लिए कोई पार्टी मोबाइल एप लॉन्च कर रही है तो कोई शिविर लगाकर जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने में लगा है। वहीं, कोई सदस्यता अभियान चलाकर अपनी संख्या बढ़ाने में लगा हुआ है।
क्या है सपा की तैयारियां
लोकसभा चुनाव में हार का झटका लगने के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का पीएम बनने का सपना चकनाचूर हो गया। ऐसे में गलतियों से सबक लेते हुए मुलायम ने एक बार फिर सीएम अखिलेश यादव के नेतृत्व में मिशन-2017 को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। टेक्नोसेवी अखिलेश यादव ने जहां जनता से जुड़ने के लिए मोबाइल एप लॉन्च किया है, वहीं जिलों में योजनाओं के प्रचार के लिए साइकिल यात्रा भी शुरू कर दी गई है। हर जिले में कार्यक्रम आयोजित करके सपा नेता जनता को सरकार की उपलब्धियां गिनवा रहे हैं। बहरहाल, इन सबके बावजूद जनता का मन अभी नहीं टटोला जा सकता है।
क्या कर रही है बीजेपी
केंद्र के बाद यूपी में भगवा फहराने को बेचैन बीजेपी फिलहाल यूपी के चेहरों पर भरोसा नहीं कर रही है। यूपी बीजेपी में आयतित चेहरों पर ज्यादा भरोसा जताया जा रहा है। बहरहाल, इन सबसे अलग बीजेपी अपने मिशन पर गुपचुप काम कर रही है। पार्टी अपने मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए जहां मेम्बरशिप ड्राइव चला रही है, वहीं लगातार बैठकों का आयोजन कर चुनावी एजेंडे को तय कर रही है। बीजेपी ग्रास रूट लेवल पर काम कर कार्यकर्ताओं को एकजुट कर रही है। लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी एक बार फिर ‘एक बूथ दस यूथ’ का फॉर्मूला अपनाएगी।
बसपा लगा रही है शिविर
बसपा के लिए विधानसभा 2017 का चुनाव कितना महत्त्वपूर्ण है यह किसी से छिपा नहीं है। बसपा भले ही सपा सरकार के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतर रही है, लेकिन अंदर ही अंदर वह अपने कैडर को एकजुट करने में लगी हुई है। बसपा अब हर जिले में शिविर लगा रही है और हर शिविर कि जिम्मेदारी पदाधिकारियों को सौंपी गई है। शिविर में पदाधिकारियों को कम से कम 500 कार्यकर्ताओं को लाना ही होगा। इस बैठक में कार्यकताओं को पार्टी की नीतियों को मतदाताओं तक पहुंचाने की रणनीति समझाई जाएगी। शिविर में बहुजन वालेंटरी फोर्स और बामसेफ के सदस्यों को भी शामिल कराने के निर्देश दिए गए हैं।