सरकार के पास बीएमसी प्रशासन के 3901 करोड़ रूपये बकाया
05 Feb 2018
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मुंबई, (5 फरवरी 2018)- दिसंबर 2017 के अंत तक राज्य सरकार द्वारा संपत्ति टैक्स, पानी व मलनिसारण टैक्स, पानी बिल शासन की ओर से किए गए टैक्सेस की वसूली, अनुदान इत्यादि माध्यमों द्वारा बीएमसी को राज्य सरकार द्वारा 3 हजार 901 करोड़ रूपये की राशि आना बाकी है, तो वहीं बीएमसी द्वारा राज्य सरकार को 249 करोड़ राशि देना बाकी है। राज्य सरकार द्वारा प्रलंबित राशि वसूल करने की कार्रवाई बीएमसी प्रशासन द्वारा किए जाने की बात बीएमसी के आर्थिक बजट साल 2018-19 में दर्ज की गई है।
►बीएमसी की कमाई घटी, लेकिन खर्चे में हुई बढ़ोतरी
सबसे अमीर पालिका के तौर पर पहचाने जाने वाली और विभिन्न बैंकों में 69 हजार करोड़ रूपयों की फिक्स डिपोजिट रखने वाली बीएमसी को विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली कमाई अब कम हो गई है, तो वहीं दूसरी ओर बीएमसी के खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण बीएमसी की आर्थिक स्थिति खराब होने की बात इस साल 2018-19 के आर्थिक बजट में दर्ज की गई है। गौरतलब है कि बीएमसी के कमाई का मुख्य स्त्रोत आक्ट्राय था। लेकिन बीएमसी को साल 2016-17 में 7244 करोड़ रूपये आक्ट्राय मिला था। जुलाई 2017 में आक्ट्राय टैक्स रद्द होने के कारण बीएमसी को आनेवाले पांच सालों तक 8 प्रतिशत की दर से जीएसटी मिलनेवाला है। जिसके तहत बीएमसी को जीएसटी से हर महीने 647 करोड़ रूपये राज्य सरकार द्वारा दिया जा रहा है। जीएसटी के कारण आक्ट्राय वसूली पर होने वाले खर्चे की बचत होने की बात आर्थिक बजट 2018-19 में दर्ज की गई है। संपत्ति क्षेत्रों में कमी होने का परिणाम बीएमसी की कमाई पर भी पड़ा है, जिसके कारण बीएमसी की कमाई में लगातार कमतरता हुई है। साथ ही विकास नियोजन विभाग में कमाई से अधिक फिजिबल एफएसआई, सीढ़ियां, लिफ्ट, अधिकमूल्य, म्हाडा क्षेत्रों के विकास मूलभूत सुविधा, शुल्क, डीसीआऱ से मिलने वाली कमाई भी घटी है। साल 2017-18 के आर्थिक बजट में विकास नियोजन विभाग द्वारा 4 हजार 997 करोड़ रूपये की कमाई का अंदाजा लगाया गया था, लेकिन इसमें 1 हजार 50 करोड़ रूपये घटी थी। इसके साथ ही साल 2017-18 के आर्थिक बजट में 5 हजार 205 करोड़ रूपये संपत्ति टैक्स के जरिए होने की संभावना जताई गई थी, लेकिन उसमें भी कमाई घट गई, जिसके कारण संपत्ति टैक्स से सिर्फ 4 हजार 958 करोड़ रूपये की ही कमाई हुई। साल 2016-17 में 3 हजार 850 करोड़ रूपये का आर्थिक बजट पेश किया गया था। जिसमें साल 2017-18 में 6 हजार 110 करोड़ रूपये की बढ़ोतरी होने के कारण साल 2018-19 में यह खर्च 9 हजार 522 करोड़ रूपये तक पहुंचने की बात आर्थिक बजट में दर्ज की गई है। बीएमसी के कर्जों को दूर करने, नागरिक सुविधाओं की पूर्ति करने, बड़े-बड़े योजनाओं को पूरा करने के कारण खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। इसलिए बीएमसी द्वारा विभिन्न बैंकों में रखे हुए 69 हजार 135 हजार करोड़ रूपयों की फिक्स डिपोजिट में से अब 2743 करोड़ रूपये निकालने की बात इस साल 2018-18 के आर्थिक बजट में दर्ज की है।