*झवेरी बाजार के स्वर्ण कारखानों के विस्थापन पर पुर्नविचार करने की मांग*
29 Jan 2018
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पश्चिम बंगाल वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत दता ने मुख्यमंत्री से की
मुंबई, (28 जनवरी 2018)- गत 9 जनवरी 2018 को भुलेश्वर झवेरी बाजार कालबादेवी के स्वर्ण कारखानों को विस्थापित करने की सरकार की घोषणा से स्वर्ण कामगारों के बीच परेशानी का माहौल बना हुआ हैं। सरकार द्वारा लिए गए फैसले के कारण तकरीबन 7 लाख स्वर्ण कामगारों (90 प्रतिशत बंगाली) की रोजी रोटी पर खतरा मंडरा रहा हैं। मुंबई के सी- वार्ड में यह क्षेत्र अपनी व्यवसायिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। पश्चिम बंगाल वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत दता ने बताया कि झवेरी बाजार का इतिहास 150 साल पुराना है। यह बाजार आभूषणों व स्वर्ण निर्मित वस्तुओं का परंपरागत व्यवसायिक केंद्र है, जैसे-जैसे इस क्षेत्र में व्यापार बढ़ा है, वैसे-वैसे ही स्वर्ण कारखानों में भी वृध्दि होती गई। झवेरी बाजार के आभूषणों की मांग पूरे देश में है। यहां के परंपरागत आभऊषणों का प्रशंसक संपूर्ण विश्व हैं। यहां की कुशल कारीगरी की वैश्विक पहचान है। इसलिए देश की इस परंपरागत स्वर्ण शिल्प कला को धरोहर स्वरूप संवर्धन की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में देश के 70 प्रतिशत स्वर्ण आभूषणों व स्वर्ण निर्मित वस्तुओं से जुड़े कार्य क्रियान्वित होते है।
♦सरकार को मिलता है 35 प्रतिशत टैक्स
रंजीत दता ने कहा कि सरकार को 35 प्रतिशत से अधिक कर (टैक्स) स्वर्ण काम से ही प्राप्त होता हैं। इस क्षेत्र के स्वर्ण काम के कारखानों में सभी कार्य शासकीय निर्देशों एंव सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए किया जाता है। इन कारखानों में कोई भी दुर्घटना ना होने के लिए सर्तकता व तत्परता रखी जाती है। किमती आभूषणों के कार्य होने की वजह से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।
•पहले नहीं थी किसी को शिकायत
दता ने आगे बताया कि सन 1998 से पहले इन कारखानों से क्षेत्र में कभी भी किसी को कोई भी शिकायत नहीं थी। दुखद रूप से राजनीतिक कारणों से इन कारखानों के विरोध की शुरूआत सन 1998 से हुई, तब से लेकर अब तक हमारा विरोध करनेवालों ने हमें हटाने के लिए हर संभव प्रयत्न किया। लेकिन उन्हें नाकामयाबी मिली। परंतु साल 2002 में उन लोगों ने भुलेश्वर रेसिडेंस असोसिएशन नाम की एक संस्था रजिस्टर्ड करवा कर उच्च न्यायालय में स्वर्णकारों के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें सात पक्ष है, जिसमें उन्होंने आपके विभाग यानि कि मुख्यमंत्री विभाग समेत हमारी पश्चिम बंगाल वेलफेयर असोसिएशन को पार्टी बनाया है। यह याचिका 2941/2002 सुनवाई की प्रतीक्षा में है। न्यायालय ने भी अभी तक कोई आदेश पारित नही किया है। इस याचिका को दायर करने के साथ ही इन विरोधियों ने स्थानिय अराजक तत्वों के माध्यम से स्वर्ण काम कारखाना मालिकों का सामाजिक आर्थिक व मानसिक शोषण लगातार जारी रखा है। अब इन्ही विरोधी तत्वों में से एक ने हाल ही में लोकशाही दिन के अवसर पर आनलाईन शिकायत भी दर्ज कराई है। आपकी जानकारी हेतू यह आवश्यक है कि झवेरी बाजार, कालबादेवी, विट्ठलवाड़ी, अब्दुल रहमान स्ट्रीट 95 प्रतिशत व्यवसायिक व 5 प्रतिशत निवासी की अनुपात वाला क्षेत्र है। इन्ही 5 प्रतिशत में से एक की शिकायत पर आप देश के सबसे बड़े स्वर्ण व्यापार केंद्र के कारोबार को प्रभावित करने का निर्णय ले रहे है। स्वर्ण कारखानों के विस्थापन से झवेरी बाजार, भुलेश्वर, विट्ठलवाडी, कालबादेवी जैसे एशिया के बड़े व्यवसायिक केंद्र की व्यपारिक गतिविधियां समाप्त हो जाएगी। साथ ही साथ अन्य व्यवसायों पर भी इसका असर पड़ेगा। इनमें अधिकतर छोटे व्यवसायी व खुदरा विक्रेता भी प्रभावित होंगे। इसलिए आपको इस वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए पीड़ा व्यक्त करता हूं कि आपके एक फैसले से मुंबई का स्वर्ण व्यवसाय प्रभावित होने लगा है। इसलिए आप अपने फैसले पर पुनविचार करते हुए मानवीय एवं जनोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने का विनम्र निवेदन करते हूं। स्वर्ण व्यवसाय व राष्ट्रीय स्वर्ण शिल्प कला के संवर्धन हेतू आपकी निणायक भूमिका की अपेक्षा करते है।