सरकारी लापरवाही के कारण धर्मा पाटिल की मौत

 29 Jan 2018  394
 
मुंबई, (29 जनवरी 2018)- खेती की ज़मीन अर्जन करके भी सही मुआवजा न मिलने के कारण मंत्रालय के सामने जहर पीकर ख़ुदकुशी करने का प्रयास करनेवाले 80 वर्षीय धर्मा पाटिल ने जे. जे. अस्पताल में आखरी सांस ली। धुले जिले में निर्माण होने वाले थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन अर्जन करके भी सही मुआवजा न मिलने के कारण सरकार से गुहार लगाते लगाते संगदिल होकर धर्मा पाटिल ने आख़िरकार  ये कदम उठाया। 
 
 22 जनवरी को पाटिल ने मंत्रालय में पूरा दिन बिताया। जब उनको हमेशा की तरह कहीं से भी प्रतिसाद नहीं मिला, तब धर्मा पाटिल ने 22 को ही  देर रात मंत्रालय के सामने जहर पी लिया। मंत्रालय की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों ने तत्काल उन्हें मुंबई के जे.जे अस्पताल में दाखिल कराया। अस्पताल में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे धर्मा पाटिल ने आख़िरकार 4 दिन बाद दम तोड़ दिया। 
 
क्या था मामला?
 
ऊर्जा विभाग द्वारा थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए धर्मा पाटिल की पांच एकर ज़मीन अर्जन की गई। जिसका मुआवजा केवल 4 लाख दिया गया, जो की  ठहराए गए मापदण्डों के अनुसार नहीं था। जिसे पाने के लिए वो सालों से मंत्रालय के चक्कर काट रहे थे। पर्याप्त मुआवजा मिलने की जद्दोजहद  धर्मा पाटिल ने आखिरी सांस तक की। लेकिन उनका प्रयास निष्फल रहा।
 
• जाग गई सरकार, 30 दिन में मिलेगा मुआवजा 
 
धर्मा पाटिल की मौत के बाद अब जाकर सरकार की आखें खुली है।  जमीन की सही कीमत के साथ ब्याज समेत पूरा मुआवजा देने की बात ऊर्जा मंत्री बावनकुले ने अपने लिखे पत्र में मान लिया है, परंतु सरकार यह बात पहले ही कर लेती, तो शायद धर्मा पाटिल की जान बच जाती, और सरकार पर शर्मनाक नौबत नहीं आती।