एम टी डी सी के रिसॉर्ट में सौर ऊर्जा यंत्र लगाये जाएंगे - पर्यटन राज्यमंत्री मदन येरावार

 23 Jan 2018  536
 
 
 
 
*  प्रायोगिक तौर पर  मालशेज घाट, गणपति पुले ,ताडोबा तथा नागपुर रिसॉर्ट का चयन 
 
*  एमटीडीसी का  बिजली खर्च बचेगा 
 
*  ग्रीन एनर्जी से  रिसॉर्ट पर्यावरण पूरक बनेंगे
 
*  ‘रेस्को’ मॉडेल के चलते सरकार का कोई खर्च नहीं
 
मुंबई, (23 जनवरी 2018)- महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल के (एमटीडीसी) मालशेज घाट, गणपतिपुले,ताडोबा, तथा नागपुर शहर के रिसॉर्टों में प्रायोगिक तौर पर  सौर ऊर्जा तकनीकी लगाये जाने के  निर्देश पर्यटन राज्यमंत्री मदन येरावार ने आज दिये.
 
एमटीडीसी के  रिसॉर्टों में  सौर ऊर्जा यंत्र लगाये जाने के बारे में  आयोजित बैठक में श्री येरावार ने ये निर्देश दिये . बैठक में  पर्यटन व सांस्कृतिक कार्य विभाग के प्रधान सचिव नितिन गद्रे, एमटीडीसी के व्यवस्थापकीय संचालक विजय वाघमारे, पर्यटन विभाग के सहसचिव दि. वा. दलवी,  विभागीय व्यवस्थापक सारंग महाजन,एमटीडीसी के कार्यकारी अभियंता शैलेंद्र बोरसे, हेमंत जगताप उपस्थित थे .
 
श्री येरावार ने इस अवसर पर कहा, राज्य में एमटीडीसी की मालकी के 60 से  अधिक रिसॉर्ट हैं. इनमें से 22 रिसॉर्ट का  व्यवस्थापन महामंडल स्वत: करता है . वर्तमान में इन रिसॉर्ट को पारंपरिक पद्धति से बिजली आपूर्ति होती है .   इनमें कुछ बड़े   रिसॉर्ट का  महीने का बिजली बिल   4- 5 लाख रुपयों से भी अधिक आता है . सौर ऊर्जा यंत्र लगाने से बड़े प्रमाण पर  बिजली के खर्च में बचत होगी .  इसके अलावा   हरित ऊर्जा  (ग्रीन एनर्जी) का उपयोग करने से ये रिसॉर्ट   पर्यावरण पूरक (इको- फ्रेंडली) होंगे ,  ऐसा उन्होंने कहा .
 
उन्होंने आगे कहा कि प्रायोगिक तौर पर  मालशेज घाट (जि. ठाणे),गणपतिपुले (रत्नागिरि),ताडोबा (जि. चंद्रपुर) तथा नागपुर शहर के  रिसॉर्ट के लिए बिजली की जरूरत का सर्वेक्षण कर  सौरऊर्जा यंत्र लगाये जाएं . आगे  क्रमशः चरणों में  बाकी के  रिसॉर्ट में  सौरऊर्जा प्रकल्प लगाने की योजना है . प्रकल्प स्थापित करने के लिए विविध मॉडेल हैं . इस प्रकल्प के लिए  ‘रिन्युएबल एनर्जी सेविंग कंपनी’ (रेस्को) मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा .
 
‘रेस्को’ मॉडल के अनुसार प्रकल्प स्थापित करने वाली कंपनी पूरा निवेश करेगी . इसके बदले सौर ऊर्जा शुरू होने के अगले पाँच वर्ष तक रिसाॅर्ट को सौर ऊर्जा से मिलने वाली बिजली की राशि महावितरण की दर से कंपनी को दी जाएगी . इसके बाद   एमटीडीसी को सौर ऊर्जा यंत्र  हस्तांतरित कर दी जाएगी . इसके आगे  20 वर्ष तक एक फीसदी  रकम देखभाल मरम्मत के लिए कंपनी को दी जाएगी . एमटीडीसी अथवा  राज्य सरकार पर इस व्यवस्था के लिए कोई खर्च नहीं आयेगा और 5 वर्ष बाद वह  पूर्ण रूप से एमटीडीसी की  संपत्ति हो जाएगी  . इससे  एमटीडीसी को  भविष्य में बिजली का खर्च बचेगा