♦ ताडोबा के निर्णय से हो गया साबित
अनिता शुक्ला
मुंबई,(२२ जनवरी २०१८)- राहूल गांधी ने साल 2014 में चुनाव के दौरान कहा था, कि बीजेपी सरकार सूटबूट वालों की सरकार है। हाल ही वन विभागद्वारा ताड़ोबा के संदर्भ में लिया गया निर्णय राहूल गांधी के व्यक्तव्य पर मोहर लगाता हैं। अब ताड़ोबा में सिर्फ सूटबूट वाले पूंजीपति लोग ही प्रवेश कर पाएंगे। सामान्य लोगों के लिए ताड़ोबा में प्रवेश करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया हैँ।
हाल ही में वन विभाग द्वारा लिए निर्णय के कारण ताड़ोबा का प्रवेश फीस 750 रूपये से बढ़ाकर 4 हजार रूपये कर दिया गया हैं। सोमवार से शुक्रवार तक ताड़ोबा में प्रवेश करने के लिए 4 हजार रूपये देने पड़ेगे, जबकि साप्ताहिक अवकाश में (शनिवार, रविवार) को 8 हजार रूपये प्रवेश फीस देना पड़ेगा। इसके चलते सामान्य लोगों का ताड़ोबा में जंगल सफारी के लिए प्रवेश करना मुश्किल हुआ है।
वनविभाग ने कालाबाजारी और दलाली रोकने के लिए ताडोबा में प्रवेश प्रक्रिया के नियमों में बदलाव किया है। जिसके चलते एंट्री फीस में भारी बढ़ोतरी की हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। आम जनता अब पहले की तरह ताडोबा में मनोरंजन के लिए नहीं जा पाएगी।
♦ कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार की यंत्रणा फेल
सूत्रों की माने तो, ताडोबा में चल रहे कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार की यंत्रणा फेल हो रही है। जिसे रोकने के लिए वनविभाग ने सामान्य लोगों की जेब कटाने का निर्णय ले लिया, जबकि सरकार को ताड़ोबा में चल रही कालाबाजारी को रोकने के लिए एक बेहतरीन उपाय करने की जरूरत थी। लेकिन सरकार द्वारा सामान्य लोगों के मनोरंजन पर शिकंजा कंसा जा रहा है। कालाबाजारी तो नीचे से ऊपर तक हर जगह हो रही है। उदहारण के तौर पर रेलवे टिकिट ले ले, अब क्या उसको रोकने के लिए सरकार ने टिकट के दर बढ़ाए क्या? ऐसी काला बाज़ारी रोकने के लिए हर जगह फीस में बढोतरी नहीं की है, तो फिर ताडोबा की प्रवेश फीस में बढ़ोतरी करके सरकार ने सामान्य लोगों के मनोरंजन पर क्यों शिकंजा कंसा हैं। वनविभाग ने ये नौटंकी करने के बजाए सीधे सीधे सामान्य जनता को ये जगह प्रतिबंधित कर पूँजीपतियोंके लिए ही खुला करने का आदेश निकाल दें।