मुंबई, (14 जनवरी 2018)- देश के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने युवाओं को अपना खुद का रोजगार खड़ा करने का मंत्र देते हुए कहा है कि उद्योग अथवा व्यवसाय करने का छोटा- मोटा अवसर भी मिलने पर उसका लाभ उठाने की कोशिश करें और मेहनत करके अपना रोजगार खड़ा करें, ताकि आप लोग नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन सकें।
राष्ट्रपतिने ठाणे जिले के उत्तान में रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी (आरएमपी) में आर्थिक जनतंत्र परिषद (इकोनॉमिक डेमोक्रॅसी कॉन्क्लेव) का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किया। रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के नॉलेज एक्सलेंस सेंटर सभागृह में हुए इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति की धर्मपत्नी सविता कोविन्द, राज्यपाल डॉ. सी. विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ला, दलित इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्रीज (डिक्की) के अध्यक्ष मिलिंद कांबले, नाबार्ड के अध्यक्ष हर्ष कुमार समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।
इस परिषद में ठाणे, पालघर, मुंबई उपनगर जिले में मुद्रा योजना, दलित वेंचर कैपिटल, स्टार्ट अप जैसी योजनाओं का लाभ लेकर अपना उद्योग खड़ा करने वाले 200 सफल उद्यमी मौजूद थे।
राष्ट्रपति श्री. कोविन्द ने कहा कि उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देने की जवाबदारी केवल सरकार की नहीं है, सबको मिलकर लिहाजा ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करना चाहिए ताकि संस्थानों, उद्योगिक घरानों, निजी बैंकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, मीडिया में निजी व्यवसाय को उचित सम्मान मिले। डॉ. कोविन्द ने आगे कहा, "नौकरी मिल नहीं रही है, इसलिए स्वयंरोजगार करना शुरू करने जैसा काल्पनिक विचार मन में लाने की बजाय मन में ऐसी भावना पैदा करें कि नौकरी करने का अवसर भले छोड़ देना पड़े लेकिन अपना खुद का रोजगार खड़ा करना है।"राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ‘डिक्की’ के अध्यक्ष मिलिंद कांबले की प्रसंशा करते हुए कहा कि समाज के वंचित और शोषित तबके के कई युवक रिफायनरी, अस्पताल और होटेल्स जैसे व्यवसायों में अपने आप से शुरूआत करके सफल हो रहे हैं। ‘डिक्की’ जैसी संस्था ऐसे युवकों को अपने पांव पर खड़े होने में हर संभव मदद कर रही है।
महिलाएं भी अपने अंदर निवेश करने की मानसिकता पैदा करें
राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक लोकतंत्र में बैंकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनधन योजना के माध्यम से साबित कर दिया, जिसमें 30 करोड़ से ज्यादा लोगों ने बैंकों में खाता खोला, जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा महिलाएं हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘डायरेक्ट बैंक ट्रान्सफर’ जैसी व्यवस्था के चलते भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं बचा है, क्योंकि अब लाभार्थी का पैसा सीधे उसके खाते में जमा किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि खासकर महिलाएं केवल बचत करने की प्रवृत्त्ति छोड़कर निवेश करने की मानसिकता अपने अंदर पैदा करें। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मूलत: बहुत बड़े अर्थशास्त्री थे, उन्हें आर्थिक मामलों की बहुत अच्छी समझ थी। उनके निर्देश पर ही भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई थी। इतना ही नहीं उस समय लोकनिर्माण विभाग के ठेके वंचित और शोषित तबके के लोगों को मिले इसमें भी उन्होंने अहम किरदार निभाया। राष्ट्रपति ने आवाहन किया कि ठाणे, पालघर और मुंबई जैसे भाग ऐतिहासिक रूप से कई दशकों से सक्रिय व्यापार और उद्यम के लिए मशहूर रहे हैं। इस सरजमीन पर वड़ा पाव बेचने वालों से लेकर बड़े-बड़े उद्योगपति सक्रिय रहे हैं। यहां युवकों को इस तरह के अवसर का लाभ उठाकर अपने आपको आर्थिक रूप से सक्षम बनाना चाहिए।
मैं एक प्रशिक्षु हूं...
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में विनम्रतापूर्वक कहा, "रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में, मैं विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण लेने के लिए पहले 10 से 12 बार आ चुका हूं। मैं खुद एक प्रशिक्षु हूं और प्रमोद महाजन और मौजूदा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे से प्रशिक्षण ले चुका हूं। इस परिसर से मिले प्रशिक्षण की बदौलत ही मैं राष्ट्रपति पद तक पहुंचा हूं।
भारत युवा उद्योगपतियों का देश- मुख्यमंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक और सामाजिक समानता देश के लोकतंत्र को भी मजबूत करेगी। श्री फड़नवीस ने कहा कि इस तरह के सम्मेलन और उससे मिले अनुभव से हमें प्रगति करने का नया रास्ता मिलता है। सशक्तिकरण जैसे शब्द का उच्चारण करना बेहद आसान है, लेकिन यहां उसे व्यवहार में लाने के लिए बहुत प्रयास करने का बल मिलता है। हालांकि प्रधानमंत्री ने इसे शुरू कर दिया है और वंचित और कमजोर वर्गों को वित्तीय अधिकार दिलाने के लिए ऐसी योजनाएं कारगर होती है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है, उनके पास नई दृष्टि है और नया संकल्प है। बस उन्हें वित्तीय रूप से सक्षम करने की आवश्यकता है। इसके लिए मुद्रा बैंक और स्किल डेवलपमेंट जैसी योजनाएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत केवल युवाओं का देश नहीं बल्कि युवा उद्यमियों का देश है |