मुंबई, दि. 28 : युद्ध अथवा अन्य कारणों के चलते विस्थापित हुए समाज अधिकांशतः दरिद्रता और विपन्नता के गर्त में फंस जाते हैं । मगर अपना सब कुछ गंवा चुके सिंधी समाज ने केवल बुद्धिमत्ता , परिश्रम और मृदुल व्यवहार के दम पर नये राज्य में अपने पाँव रखकर शून्य से संपन्नता का निर्माण किया।सिंधी समाज का उदाहरण विश्व के इतिहास में अन्यत्र बहुत कम देखने को मिलेगा । महाराष्ट्र तथा मुंबई के आर्थिक , सामाजिक विकास में सिंधी समाज का योगदान उल्लेखनीय है । ये गौरवोद्गार राज्यपाल चे. विद्यासागर राव ने आज यहाँ व्यक्त किये ।
विश्व सिंधी परिषद की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सिंधी समाज के मान्यवर व्यक्तियों का आज राजभवन में सत्कार किया गया । इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल बोल रहे थे ।
उन्होंने कहा कि सिंधी समाज आज विश्व भर में फैला हुआ है । सिंधी समाज को आधुनिक तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल कर दुनिया भर में सिंधियों को विशेषकर युवकों को जोड़कर भाषा संवर्धन के विशेष प्रयत्न करने चाहिए । कुलपति होने के नाते राज्य के विश्वविद्यालययों में सिंधी भाषा व साहित्य के प्रसार के लिए हर प्रकार का सहयोग करने करने का आश्वासन राज्यपाल ने दिया ।
सिंधी फेडरेशन ऑफ साउथ एशिया के अध्यक्ष मुरलीधर रामाणी , मुकुल-माधव फाउंडेशन की अध्यक्ष रितु प्रकाश छाबरिया , व्यवसायी नरेंद्र वीरवाणी , विवेकानंद शिक्षण संस्था के अध्यक्ष महेश तेजवानी , मशहूर चिकित्सक गोवर्धन खनचंदाणी , मोहन बाबाणी व बी.बी.गोगिया का राज्यपाल के द्वारा सत्कार किया गया । चंदर मंघनानी को समाज सेवा के लिए विशेष स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया ।
विश्व सिंधी परिषद के अध्यक्ष डाॅ.राम जव्हाराणी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना की तथा संजय सिप्पी ने आभार व्यक्त किया । इस अवसर पर लेखक के. के . रामाणी ने अपनी पुस्तक राज्यपाल को भेंट दी ।