पिछले पांच सालों में उज्जवला मोड़क और ज्योत्सना परमार ने नहीं पूछा एक भी सवाल-प्रजा फाऊंडेश
16 Apr 2017
440
वरिष्ठ संवाददाता, मुंबई
प्रजा फाऊंडेशन ने मंगलवार को बीएमसी से संबंधित अपनी सालाना रिपोर्ट पेश किया, जिसके मुताबिक, बीजेपी की नगरसेविका उज्जवला मोड़क और ज्योत्सना परमार ने पिछले पाच सालों में वार्ड समितियों की बैठक में जनता की परेशानियों से संबंधित एक भी प्रश्न नहीं पूछा। इसके अलावा मार्च 2012 से दिसंबर 2016 यानि कि पिछले चार सालों में अन्य पार्टी के नगरसेवकों द्वारा मात्र 6-6 सवाल ही पूछे गए, जिसमें सड़कों और चौराहें से संबंधित बड़े मुद्दे पर एक ही सवाल को शामिल किया गया था। इसके साथ ही पिछले चार सालों में वार्ड समिति के 88 नगरसेवकों ने हर साल पांच ही प्रश्न पूछे। प्रजा फाऊंडेशन के संस्थापक निताई मेहता ने कहा कि मुंबई के लिए सड़क और चौराहा बेहद संवेदनशील मुद्दा है। इसके बावजूद नगरसेवकों द्वारा इस समस्या को नजरअंदाज किया गया। जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सड़कों और चौराहे के विकास को महत्व देने का वादा किया था। लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनाव के दौरान मतदाताओं के साथ किए हुए वादें को नजरअंदाज किया है। विकास का नारा देने वाली बीजेपी ने चुनाव अभियान के दौरान सड़कों की स्थिति पर बहुत ज्यादा जोर दिया था, लेकिन सड़कों की खस्ताहाल स्थिति पर पिछले चार सालों में मात्र 18 सवाल ही पूछें। इसके साथ ही शिवेसना ने भी सड़क के मुद्दे को नजरअंदाज करते हुए मात्र तीन ही सवाल पूछें।
-----------नागरिकों की समस्याओं को दूर करने में किसी को नहीं है रूचि
प्रजा फाऊंडेशन के परियोजना निदेशक मिलिंद म्हस्के ने कहा कि इन आंकड़ों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी अभियान और घोषणापत्रों में कई समस्याओं के प्रति बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान आकृषित किया, लेकिन चुनाव चुनाव के बाद इन समस्याओं को दूर करने के प्रति उनकी रूचि दिखाई नहीं पड़ रही हैं। म्हस्के ने आगे बताया कि साल 2011 के बाद सड़कों और गढ्ढों से संबंधित शिकायतों की संख्या में वृध्दि हुई, क्योंकि इसी साल में एमसीजीएम ने अपना वाइस आफ सीटिंजन्स नामक मोबाईल एप लान्च किया। जिसमें साल 2011 से 2013 के बीच 1,538 से बढ़कर 38,279 तक पहुंच गई। हालांकि बाद में बीएमसी द्वारा इस एप को बंद कर दिया गया। जिसके बाद शिकायतों की संख्या में कमी आई। क्योंकि नागरिकों को शिकायत करने के लिए जो जरिया उपलब्ध कराया गया था, उसे बंद कर दिया गया। हालांकि अगर एक बार फिर से नागरिकों को अपनी शिकायतों को सामने लाने का अवसर दिया जाए, तो वह इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे।