ऑटोमैटिक ब्लॉक सेक्शन पर चलाई जा रही, जलगांव-भुसावल लोहमार्ग पर ट्रेनें

 16 Jan 2017  674
वरिष्ठ संवाददाता, मुंबई 
 
मुंबई में चलाई जा रही लोकल ट्रेनों के बाद मध्य रेलवे के एकमात्र भुसावल डिवीजन में जलगांव-भुसावल लोहमार्ग पर ट्रेनें स्वयंचलित सिग्नल प्रणाली (ऑटोमैटिक ब्लॉक सेक्शन) पर चलाई जा रही हैं। इस प्रणाली के चलते एक ही लाईन पर एक के पीछे एक इस तरह से एक साथ सात गाड़ियां दौड़ाई जा सकती हैं। बगैर कोई दुर्घटना के ट्रेनें चलने से इस मार्ग पर गाड़ियो की संख्या और भी बढ़ेगी और यात्रियों के लिए भी आसानी हो जायेगी। गौरतलब है कि मध्य रेल्वे के भुसावल डिवीजन के दायरे में भुसावल समेत इगतपुरी, बडनेरा, खंडवा, यवतमाल, अचलपुर और अमरावती तक के स्टेशन आते हैं। लगभग एक हजार किलोमीटर के इस क्षेत्र में अभी पूरी तरह से इस प्रणाली पर गाड़ियां दौड़ाई नहीं जा रही हैं, पर जलगांव-भुसावल लोहमार्ग पर ट्रेनें स्वयंचलित सिग्नल प्रणाली के तहत चलाई जा रही हैं, इसके लिए जलगांव-भुसावल में इन 25 किलोमीटर के अंतराल पर 28 स्वयंचलित सिग्नल लगाएं गए हैं। भुसावल-भादली के बिच सात, भादली-जलगांव के बिच सात और वापस जलगांव-भादली के बिच सात, भादली-भुसावल के बिच सात ऑटोमैटिस सिग्नल लगाएं गये है। धीरे-धीरे इस एक हजार किलोमीटर के दायरे में भी स्वयंचलित ट्रेनें दौड़ाने के बारे में रेल प्रशासन गंभीरता से विचार कर रहा है। भुसावल से इगतपुरी तक तीसरी और जलगांव में चौथी रेल पटरी बिछते ही रेल विभाग द्वारा लोहमार्ग पर नई-नई तकनीकें अपनाई जाएंगी। बताया जाता है कि ऑटोमैटिक ब्लॉक सेक्शन के न होने से इस रुद पर पहले सिर्फ दो गाड़ियां ही चलाई जा सकती थीं। मुम्बई की तर्ज पर मध्य रेल्वे ने यह प्रयोग जलगांव-भुसावल लोहमार्ग पर किया है। रेल्वे में तीन तरह की सिग्नल प्रणालियों का इस्तेमाल होता है। पहली पूरी ब्लॉक तरह की सिग्नल यंत्रणा, दूसरी स्वयंचलित (ऑटोमैटिस ब्लॉक सेक्शन) व तीसरी एक ट्रेन सिग्नल यंत्रणा से गाड़ियों का परिचालन होता है। भुसावल डीआरएम कार्यालय के वरिष्ठ संभागीय वाणिज्य प्रबंधक सुनील मिश्रा की मानें तो स्वयंचलित सिग्नल यंत्रणा का बड़ा फायदा है। इससे ज्यादा से ज्यादा गाड़ियां दौड़ाई जा सकती हैं और वह भी दुर्घटना रहित। लोहमार्ग पर कोई भी ट्रेन न रहने पर सभी सिग्नल रेड ही रहते हैं। ट्रेन पास होते समय लाल सिग्नल हरा हो जाता है और गाडी के अगला सिग्नल पार करते ही पिछला सिग्नल लाल हो जाता है, तो अगला सिग्नल पीला हो जाता है। इससे ड्राइवर गाड़ियां सावधानी से निकाल लेते हैं। इस यंत्रणा के बारे में ट्रेनों के ड्राइवरों को बाकायदा विशेषज्ञों, टेक्नीशियनों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। मध्य रेल्वे का भुसावल डिवीजन हर मायने में अब उच्च नई तकनीकी अपनाता जा रहा है। ट्रेनों की ही तरह इस डिवीजन के भुसावल, जलगांव, मनमाड, नाशिक व इगतपुरी समेत खंडवा, अमरावती आदि स्टेशनों पर भी तमाम अत्याधुनिक यंत्रणा लगवाई जानी है। इसमें विकलांगों, बुजुर्ग, बच्चों के लिए फिसलती सीढ़ियों समेत टिकट बुकिंग के लिये मशीनों का भी समावेश है। ट्रेनों का सफर आरामदेह होने की दृष्टि से रेल प्रशासन द्वारा कई कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। इसी में ऑटोमैटिक्स सिग्नल यंत्रणा का भी समावेश है।