राष्ट्रीय आपदा से भी भयानक नोटबंदी- चिदंबरम

 18 Dec 2016  917
वरिष्ठ संवाददाता, मुंबई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू नोटबंदी किसी भी राष्ट्रीय आपदा से भी भयानक साबित हो रही है। नोटबंदी इस साल का सबसे बड़ा घोटाला है और उसकी जांच की जानी चाहिए। इस तरह की जानकारी पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को नागपुर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए दी है। चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का निर्णय बिना सोचे समझे लिया है। यह निर्णय पूरी तरह से अविचारी और निर्थक है। यह निर्णय किसी को पसंद नहीं आया है और किसी ने भी इस निर्णय के बारे में अच्छा नहीं कहा है। कारपोरेट व अर्थविशेषज्ञों ने भी इस निर्णय की निंदा की है। इस निर्णय से देश को कितना लाभ हुआ? भ्रष्टाचार कितना रुका? इसका जवाब अभी तक आम जनता को नहीं मिल सका है। इतना ही नहीं नोटबंदी के पीछे की मंशा क्या थी, इसका अब तक पता नहीं लग सका है। इसके उलट इस निर्णय से आम जनता को, गरीब तथा मध्यमवर्ग को सजा भुगतनी पड़ रही है। चिदंबरम ने कहा कि देश की 45 करोड़ से ज्यादा लोगों को इस निर्णय का नुकसान हुआ है, इसकी भरपाई कौन करेगा। इसी तरह जिला बैंकों पर लगाए गए प्रतिबंध से जो किसानों व बेरोजगार लोगों को नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा। बैंकों के पास पैसा ही नहीं है और सरकार तरह-तरह का झूठा सब्जबाग लोगों को दिखा रही है। पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि एक माह में 300 करोड़ रुपए छापने की क्षमता सरकार की है, इस तरह नोटबंदी के संकट से देश को बाहर आने में 7 महीने से ज्यादा का समय लग सकता है। चिदम्बरम ने कहा कि प्रधानमंत्री को नोटबंदी के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सलाह मशविरा करना चाहिए था, चलिए मनमोहन सिंह से उन्होंने बात नहीं की तो कम से कम उन्हें यशवंत सिन्हा से ही चर्चा कर लेनी चाहिए थी। चिदम्बरम ने कहा कि प्रधानमंत्री नोटबंदी पर विपक्ष की बात सुनने के लिए सदन में उपस्थित रहना चाहिए और प्रधानमंत्री को विपक्ष की बात सुननी ही चाहिए।