पिछले कई सालों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित लाइफगार्ड

 08 Nov 2015  1777
मुंबईकरों को डूबने से बचाने के लिए रहते है हमेशा तैयार
मुंबई के बड़े और प्रमुख समुद्री किनारों पर लोगों को डूबने से बचाने के लिए तैनात किए गए लाइफगार्डों को बीएमसी द्वारा पिछले कई सालों से कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है। इसके बावजूद ये लाइफगार्ड बिना किसी सुविधा और उपकरण के मुंबईकरों को डूबने से बचाने के लिए हमेशा तैयार रहते है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीएमसी द्वारा 1 सितंबर 2010 से ही फायर ब्रिगेड के लाइफगार्ड विभाग को समुद्री आफत से स्वयं का बचाव करने के लिए कोई भी उपकरण मुहैया नहीं कराया गया है। इसके बावजूद ये लाइफगार्ड अपनी जान को हथेली पर लेकर समुद्री किनारों पर डूबते हुए लोगों को बचाते है। हालांकि कई बार दूसरों को बचाते-बचाते ये लाइफगार्ड गंभीर रुप से घायल हो जाते है। 
------ यह जरूरी उपकरण नहीं है
लाइफगार्ड सचिन मुलीक ने एनबीटी को बताया कि समुद्र में डूबते हुए को बचाने के लिए कपड़े, जैकेट, रेस्क्यू ट्यूब, सर्फिग बोट, जेट स्की बोट, रस्सी, दूरबीन, वॉकीटॉकी, बैटरी, टॉर्च, गाडी,ऑक्सिजन सिलेंडर, स्ट्रेचर, सायरन और एम्ब्यूलेंस जैसे महत्तवपूर्ण उपकरण की जरूरत होती है लेकिन बीएमसी द्वारा लाइफगार्ड विभाग को सबसे जरूरी उपकरणों से ही वंचित रखा जा रहा है। साथ ही समुद्री किनारों पर तैनात किए गए लाइफगार्डों को बीएमसी द्वारा पानी, टाइलेट, बाथरूम और हेल्थ की जांच जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। इस कारण समुद्री किनारों पर तैनात लाइफगार्डों को दिनभर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 
------वेतन है मात्र दस हजार रुपये 
लाइफगार्ड मोहन एरंडे ने बताया कि फिलहाल फायर ब्रिगेड के लाइफगार्ड विभाग में दल स्थायी लाइफगार्ड है, इसमें से दो लाइफगार्ड रिटायर्ड हो चुके है। इसके साथ ही 35 अस्थायी लाइफगार्ड कार्यरत है। हालांकि बीएमसी द्वारा स्थायी लाइफगार्डों को 20 हजार तो अस्थायी लाइफगार्डों को दस हजार रुपये का वेतन दिया जाता है। परंतु दोनों को प्रतिदिन आठ से दस घंटे काम करना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद वेतन में इतना बड़ा फर्क होने के कारण फिलहाल लाइफगार्डों के बीच में अंसतुष्टि का माहौल बना हुआ है। बीएमसी द्वारा नौकरी के दौरान तय किया गया था कि अगर काम के दौरान लाइफगार्डों के साथ कोई भी हादसा निर्माण होता है, तो उन्हें बीएमसी द्वारा किसी भी प्रकार की कोई नुकसान भरपाई नहीं की जाएगी। 
------क्या हैं लाइफगार्डों की मांगे
लाइफगार्ड विभाग के मुताबिक, मुंबई के प्रमुख आठ बड़े समुद्री किनारे जुहू, दादर, गिरगांव, मढ़-मार्वें, अक्सा, गोराई, वर्सोंवा और मनोरी है। इसके तहत शनिवार, रविवार और छुट्टियों के दौरान समुद्री किनारों पर करीब 3 से 4 हजार लोग घूमने आते है। इसके तहत कम यानि कि 5 से 6 लाइफगार्डों के लिए समुद्री किनारों पर घूमने आए सभी पर्यटकों पर एक साथ वॉच रखना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस कारण बीएमसी द्वारा हर समुद्री किनारों पर करीब 20 से 25 लाइफगार्डों को तैनात किया जाना चाहिए। इसके साथ ही लाइफगार्डों को पिछले कई सालों से वंचित किए गए सुविधाओं को जल्द से जल्द मुहैया कराया जाना चाहिए। 
----कोट 
लाइफगार्डों की सुरक्षा के मद्देनजर फायर ब्रिगेड दल की ओर से जल्द ही गोवा पैटर्न लागू किया जाएगा। इसके तहत गोवा की तर्ज पर मुंबई के प्रमुख आठों बड़े समुद्री किनारों पर ज्यादा से ज्यादा लाइफगार्डों को तैनात किया जाएगा। (एस.डी.सावंत, सहायक विभागीय अधिकारी, फायर ब्रिगेड दल)
---- फिलहाल लाइफगार्डों की संख्या 
स्वरूप                          जरूरत                                     फिलहाल
स्थायी                            --                                            11
अस्थायी                         70                                            35
--------पिछले पांच सालों में समुद्री किनारों पर गई जानें
    साल                                           गई जानें                                बचाई गई जानें 
    2010                                           33                                         15
    2011                                            23                                        10 
    2012                                            25                                         13  
    2013                                            28                                         12
    2014                                            30                                          16