मुंबई में आवारा कुत्तों के काटने का प्रमाण बढ़ा
08 Nov 2015
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पिछले चार सालों में ढ़ाई लाख से ज्यादा लोग हुए जख्मी
मुंबई में आवारा कुत्तों के काटने का कहर लगातार जारी है। इन दिनों मुंबईकरों में आवारा कुत्तों को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। इसका अंदाजा पिछले चार सालों के आंकड़ों द्वारा लगाया जा सकता है कि किस तरह आवारा कुत्तों ने मुंबई में अपनी दहशत मचा रखी है। इसके तहत पिछले चार सालों में आवारा कुत्तों के काटने के कारण ढ़ाई लाख से भी ज्यादा लोगों के जख्मी होने की जानकारी सूत्रों से मिली है।
67 लोगों को गंवानी पड़ी अपनी जान
गौरतलब है कि मुंबई में पिछले चार सालों के तहत 2 लाख 75 हजार 732 लोग आवारा कुत्तों के काटने के कारण जख्मी हुए है। वहीं 67 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस कारण लोगों में आवारा कुत्तों को लेकर फिलहाल खौफ बना हुआ है। स्थानिकों के मुताबिक, रात तो रात दिन में भी हर जगह आवारा कुत्तों के हमले के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब नागरिक दिन में भी रास्ते पर बेखौफ आवाजाही नहीं कर पा रहे है।
विधायक भी हुआ शिकार
हाल ही में राज्य के एक विधायक महादेव जानकर को भी आवारा कुत्ते ने काट लिया था। परंतु मुंबई के अस्पतालों में कुत्ते के काटने का टीका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण विधायक को ब्राजील का टीका लगाना पड़ा था। हालांकि इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने नींद से जागते हुए राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पतालों में ऐंटि रेबीज सीरम (एआरएस) टीका उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
बीएमसी असफल
बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीएमसी की ओर से आवारा कुत्तों को काबू में करने का उपाय लगातार किया जाता है। परंतु कुछ निजी संस्थाओं के कारण बीएमसी को इन्हें काबू करने में असफलता मिल रही है। साथ ही आवारा कुत्तों का मारने का प्रावधान मुंबई में नहीं होने के कारण इसका खामियाजा सामान्य नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि आवारा कुत्तों को लेकर बीएमसी के पास प्रतिदिन कई शिकायतें दर्ज कराई जाती है। लेकिन बीएमसी के पास आवारा कुत्तों की नसबंदी के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं छोटे बच्चे
स्थानिय नागरिकों के मुताबिक, इन दिनों साकीनाका, कुर्ला, मानखुर्द, चेंबूर, गोरेगांव, मालाड इत्यादि जगहों पर अधिकतर आवारा कुत्तों के काटने का शिकार छोटे बच्चे हो रहे है। परंतु बीएमसी द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी करके फिर से उसी जगह छोड़ दिया जाता है। हालांकि मुंबईकरों की सुरक्षा के हित में यह नहीं है। मुंबईकरों की सुरक्षा को देखते हुए बीएमसी को इस मामले में कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। ताकि लोग बेखौफ होकर रास्तों पर आवाजाही कर सकें।
कुत्तों के काटने की घटना और जख्मीयों की संख्या
साल जख्मीयों की संख्या
2011 80 हजार 889
2012 82 हजार 247
2013 81 हजार 716
2014 30 हजार 753