नाइट स्कूलों पर बीएमसी की लापरवाही

 28 Oct 2015  918

बीएमसी द्वारा नाइट स्कूलों को नहीं दी जाती है,सुविधाएं

मुंबई: मुंबई में चलाए जा रहे नाइट स्कूलों पर बीएमसी प्रशासन द्वारा पिछले कई सालों से लापरवाही की जा रही है। नाइट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को बीएमसी द्वारा जो सुविधाएं दी जानी चाहिए, उससे उन्हें वंचित रहना पड़ रहा हैं। बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुंबई में तकरीबन 80 पर्सेंट से ज्यादा नाइट स्कूलें बीएमसी स्कूल की इमारतों में चलाई जा रही है। इसके लिए नाइट स्कूलों को चलाने वाली संस्थाओं को हर महीने एक तय किराया बीएमसी को देना पड़ता है। बीएमसी को किराया देने के बावजूद नाइट स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को समय पर क्लास उपलब्ध नहीं किया जाता है। आयसीटी लैब, कम्प्यूटर लैब और शौचालय को बंद रखा जाता है। साथ ही स्कूलों में किसी भी प्रकार की कोई सिक्युरिटी मुहैया नहीं कराई जाती है। इस कारण छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

‘मुंबई में है कुल 136 नाइट स्कूलें’

 बीएमसी शिक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, मुंबई में कुल 136 नाइट स्कूलें है, जिसमें से 110 स्कूलों को बीएमसी स्कूल की इमारतों में चलाया जा रहा है। परंतु स्कूलों में सुविधाओं के अभाव के कारण नाइट स्कूलों को छात्रों की कमी झेलनी पड़ रही है। 
‘बीएमसी लेती है हर महीने किराया’
बीएमसी शिक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, नाइट स्कूलों को चलाने वाली संस्थाओं को हर महीने प्रति वर्ग (कक्षा) का 125 रुपये किराया देना पड़ता है। हालांकि साल 2009 में बीएमसी ने इसमें सीधे 65 रुपये की बढ़ोतरी की थी, लेकिन विपक्षियों के विरोध के बाद बीएमसी ने इसमें 60 रुपये कम करते हुए हर साल 10 रुपये की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया। 

‘50 पर्सेंट नाइट स्कूलों ने नहीं भरा किराया’

बीएमसी शिक्षण विभाग से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुंबई में नाइट स्कूलें चलाने वाली 50 पर्सेंट संस्थाओं ने पिछले कई सालों से किराया नहीं भरा है। इस कारण संस्थाओं पर कुल 28 लाख रुपये का बकाया है। इसमें कई संस्थाओं ने बीएमसी के किराया माफ करने की गुजारिश की है। 

कोट 

मुंबई में नाइट स्कूलों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने का काम बीएमसी प्रशासन ने किया है। बीएमसी ने नाइट स्कूलों को चलाने वाली संस्थाओं को अपनी जगह कम किराए पर दी है, ताकि दिन में जो छात्र पढ़ाई नहीं कर सकते है, वो नाइट स्कूल में पढ़ाई करके अपना भविष्य संवार सके। इसके बावजूद नाइट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को जो परेशानी हो रही है, उससे बीएमसी प्रशासन दूर करने की कोशिश करेगी।  (पल्लवी दराड़े, अडिशनल कमिश्नर बीएमसी)