नक्सल समर्थक प्रो. सेन आखिरकार निलंबित
16 Jun 2018
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नागपुर, (15 जून 2018)- नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के चलते गिरफ्तार हुई नागपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की प्रो. शोमा सेन आखिरकार शुक्रवार को निलंबित हुई। वामपंथी दबाव समूह की वजह सें रुका हुआ प्रो. सेन का निलंबन पत्र रात के 8 बजे जारी हुआ।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. एस.पी. काणे ने प्रो. सेन की गिरफ्तारी के एक सप्ताह बाद उनके निलंबन की घोषणा की थी। लेकिन निलंबन पत्र जारी नही किया था। नियम के मुताबिक, किसी भी सरकारी कर्मचारी को यदि 24 घंटे तक जेल में रहना पड़ा तो उसे निलंबित किए जाने का प्रावधान है। हालांकि प्रो. सेन की गिरफ्तारी को एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन उनके खिलाफ कारवाई से लगातार बचता रहा।
राज्य के उच्चशिक्षा विभाग के सचिव तक यह मामला पहुंचने के बाद उन्होंने उपकुलपति से फोन पर जवाब तलब किया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 14 जून को को प्रो. सेन को निलंबित किए जाने की मौखिक जानकारी दी थी। लेकिन कानूनी सलाह लेने के बाद भी निलंबन पत्र पर हस्ताक्षर नही हुए थे। विश्वविद्यालय में सक्रिय दाबाव समूह नही चाहता था कि आगामी 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाली प्रो. सेन को नौकरी के अंतिम दिनो में निलंबित किया जाए। इसलिए उनके निलंबन को रोकने के लिए भरसक कोशिश कि गई। लेकिन सरकार तथा पुलिस कि मामले पर लगातार नजर बनी होने की वजह सें विश्वविद्यालय प्रशासन को निलंबन का फैसला लेना पडा। अमुमन विश्वविद्यालय का कामकाज शाम को 6 बजे तक खत्म हो जाता हैं। लेकिन उपकुलपती के निर्देश के अनुसार निलंबन पत्र जारी करने के लिए लगातार आनाकानी हो रही थी। आखिर रजिस्ट्रार पूरण मेश्राम नें रात के 8 बजे प्रो. सेन के निलंबन पत्र पर हस्ताक्षर किए। तथा कर्मचारी के हाथो वह पत्र प्रो. सेन के आवास पर भेजा गया।
उल्लेखनीय है कि पुणे में 31 दिसंबर 2017 को आयोजित यल्गार परिषद के बाद पुणे समेत राज्य के अलग-अलग इलाको में हिंसा फैली थी। इस मामले में पुणे और दिल्ली पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दिल्ली से रोना विल्सन, मुंबई से सुधीर ढवले और नागपुर से प्रो. शोमा सेन, सुरेंद्र गडलिंग और महेश राऊत को 6 जून को गिरफ्तार किया था। उन पर नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता व हिंसा फैलाने की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं।