आरएसएस के चाणक्य निति से चक्रव्यूह में लटकी कांग्रेस

 30 May 2018  926

अनिता शुक्ला
मुंबई, (30 मई 2018)-
रा. स्व. संघ के नागपूर में शुरू तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समारोह कार्यक्रम में उपस्थित रहने की तैयारी पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने दिखाते ही कुछ विरोधियों ने मुखर्जी के निर्णय पर आक्षेप लिया। मात्र, सारी उम्र कांग्रेस ने जिस  विचारधारा का विरोध करने में लगा दी, वहीं उनके ही एक क
द्दावर नेता ने उसी मंच पर जाने का निमंत्रण स्वीकार कर अपने ही पक्ष को बड़ी मुसीबत में ड़ाल दिया है। कांग्रेस ने इस सारे मामले पर मौनव्रत लेने का निर्णय लिया है। क्या करे? बड़े कद वाले नेताजी ने मुँह के बल जो गिरा दिया है। वो कहावत है ना, "साँप के मुँह में छछूंदर" ऐसी ही कुछ स्थिति हुई है कांग्रेस की। 

विस्तार से जानते है कि मामला क्या है?  तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का समारोह कार्यक्रम 7 जून को नागपूर में होने वाला हैं, जिसमें प्रमुख अतिथि के तौर पर उपस्थित रहने का रा. स्व. संघ का निमंत्रण पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने स्वीकार कर लिया हैं। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने इस उपस्थिति पर आक्षेप लिया हैं। परंतु कांग्रेस ने सावधानी बरतते हुए इस मामले में कुछ भी बोलने से परहेज किया है। कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कांग्रेस मुख्यालय में एक पत्रकार से कहा कि फिलहाल हम इस मामले पर कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करेंगे, कार्यक्रम होने के बाद देखेंगे, क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करना हैं?  रा.स्व.संघ और कांग्रेस की विचारधारा में बहुत फर्क है। यह वैचारिक फर्क आज भी है, कल भी था और शायद रहेगा। (शायद रहेगा यह यहाँ पर इसलिए बोला हैं क्योंकि एक तो यह राजनीतिक पार्टियां कब एजेंडा बदल देती है पता नहीं चलता) कांग्रेस में रहकर पक्ष की लाइन चलाते हुए सारी उम्र संघ की विचारधारा का हमेशा विरोध करने वाले मुखर्जी ने उनके कार्यक्रम का निमंत्रण स्वीकार कब-कैसे-क्यों किया? इस सोच में अब आल इंडिया कांग्रेस कमिटी डूबी हैं,  अब वे कार्यक्रम में क्या बोलेंगे, इसकी तरफ ताक लगाकर बैठे है। 

एक बात तो साफ है कि पहले ही बुरे दौर से चल रही कांग्रेस के सामने मुखर्जी के इस एक निर्णय ने एक और नई चुनौती खड़ी कर दी है। विश्व के सबसे बड़े संगठन के तौर पर उभर कर आए आरएसएस के इस चाणक्य निति से कांग्रेस को चक्रव्यूह में लटका ड़ाला है।