मुंबई, (15 मई 2018)- सेवा क्षेत्र और तकनिकी के समन्वय से भारत का सकल घरेलू उत्पादन 2025 में पांच ट्रिलियन डॉलर तक हो सकता है, इसमें सेवा क्षेत्र का हिस्सा तीन ट्रिलियन डॉलर तक होगा ऐसा विश्वास राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज व्यक्त किया. रोजगार, उत्पादकता और नवीनता का इस क्षेत्र में प्राबल्य है. तकनीकी की बढ़ती रफ़्तार के कारण सेवा क्षेत्र का योगदान खेती, उत्पादन क्षेत्र और सुविधा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है. ‘सेवा क्षेत्र’ 21 वीं सदी में वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीड है. बारह सर्वोत्कृष्ट सेवा क्षेत्र की शुरुवात यह एक चुनौतीपूर्ण पहल है. इससे भारत और विश्व की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. भारतीय सेवाओं का क्षेत्र बढकर वे वैश्विक सेवा क्षेत्र में अपना स्थान निर्माण करेंगे, ऐसा विश्वास भी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने व्यक्त किया.
गोरेगांव के बॉम्बे एक्झिबिशन सेंटर में केंद्रीय वाणिज्य विभाग और महाराष्ट्र सरकार की ओर से चौथे सेवाओं के विषयक विश्व प्रदर्शन और 12 सर्वोत्कृष्ट राष्ट्रीय सेवा क्षेत्रों का शुभारंभ राष्ट्रपति के हाथों किया गया. इस समय वह बोल रहे थे. इस समय राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, महाराष्ट्र के राज्यपाल चे. विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभू, वाणिज्य विभाग की सचिव रिटा टिओटिया उपस्थित थे.
राष्ट्रपति ने कहा कि, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मैं अभिनंदन करता हूँ. उन्होंने इस उपक्रम के लिए सह आयोजक की भूमिका अदा की. देश के आर्थिक और निवेश के क्षेत्र में महाराष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण है. महाराष्ट्र में उद्योग की मजबूत बुनियाद है, अब बढ़ता सेवा क्षेत्र उद्योग क्षेत्र को अधिक पूरक साबित हुआ है. भारत में सेवा क्षेत्र का योगदान सकल मूल्य के ६१ फीसदी है. युवा जनसंख्या, तकनीकी से परिचित स्मार्ट तकनीशियन की वजह से भारत को विश्व में एक विशेष स्थान है. विश्व को सेवा देने की स्थिति में आज भारत आ पहुंचा है. २०१६ में भारत की विश्व सेवा निर्यात ३.४ प्रतिशत थी. २०२२ तक यह प्रमाण ४.२ प्रतिशत होगा, ऐसा विश्वास उन्होंने इस समय व्यक्त किया.
तेज गतिसे बढ़नेवाली अर्थव्यवस्था के कारण भारत विश्व भर के निवेशकों और उद्योजकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है. विगत चार सालों में सकल घरेलू उत्पादन का दर ६.९ प्रतिशत रहा हैं. २०१८-१९ के लिए आंतरराष्ट्रीय नाणे निधि द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास दर ७.४ फीसदी रहने का अनुमान दर्ज किया है. इसके लिए सेवा क्षेत्र में उड़ान प्रमुख कारण साबित होगा.
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि, भारत विश्व का तीसरा बड़ा स्टार्ट-अप का केंद्र है. इसकी वजह से देश मे युवा उद्यमियों की एक पीढ़ी का निर्माण हुआ है. केंद्र सरकार के मुद्रा योजना तथा स्टार्ट-अप इंडिया योजना के कारण १२० दशलक्ष उद्योगों को कैपिटल मिला है. मुझे आशा है कि इसमें से कुछ स्टार्ट-अप आगामी समय में बड़े उद्योगों में परिवर्तित होंगे. एक बिलियन मोबाईल फोन धारक, इंटरनेट का उपयोग करनेवाले ५०० मिलियन नागरिक और डिजिटल तकनीकी के बढ़ते उपयोग का अच्छा परिणाम भारत के सेवा क्षेत्र पर होगा.
विगत चार सालों में विदेशी निवेश पर लगाएं गए निर्बंधों को कई क्षेत्रों में सुलभ किया है. विदेशी निवेश को आकर्षित करनेवाला विश्व के सबसे बड़े देश के रूप में भारत की पहचान है. आर्थिक सेवा, व्यापार और प्रोफेशनल सेवा, संशोधन और विकास आदि सेवा क्षेत्रों में अप्रैल २००० से ५७ फीसदी विदेशी निवेश भारत में होने की जानकारी उन्होंने दी. महाराष्ट्र देश का ग्रोथ इंजिन होने का उल्लेख इस समय राष्ट्रपति ने किया.
महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था होगी एक ट्रिलियन डॉलर- मुख्यमंत्री
आर्थिक वृद्धि और रोजगार निर्मिति के लिए सेवा क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है. भारत विश्व में युवाओं के देश के रूप में विकसित हो रहा है. 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर होगी. इसी समय महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर होगी, ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज की. उत्पादन निर्मिति और सेवा क्षेत्र में महाराष्ट्र देश में हमेशा अग्रणी होने की बात कहकर सेवा क्षेत्र के माध्यम से रोजगार निर्मिति को बढ़ावा मिलेगा. महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था ट्रिलियन डॉलर होने के लिए सेवा क्षेत्रपर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसी कारण आज यहाँ आयोजित विश्व प्रदर्शन के आयोजन का सम्मान राज्य को मिला है. सेवा क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान 59 प्रतिशत है वह 67 प्रतिशत तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा.
उन्होंने कहा की, विश्व स्तरपर भारतीय अर्थव्यवस्था सर्वाधिक गति से बढ़ रही है. इसमें सेवा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है. राज्य में सेवा क्षेत्र का विस्तार होने के लिए सुविधाओं का बड़ा जाल निर्माण करने के लिए प्रयास किए जा रहे है. इस विश्व प्रदर्शन के बहाने जिन 12 सर्वोत्कृष्ट सेवा क्षेत्र का चयन किया है, उन सभी घटकों के लिए राज्य में पोषक वातावरण है. डिजिटल सेवाओं के माध्यम से महाराष्ट्र ने बड़ी उड़ान ली है. इसका उपयोग कर सेवा क्षेत्र के माध्यम से राज्य के विकास के लिए प्रयास किए जायेंगे, ऐसा आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया. देश की आर्थिक और मनोरंजन क्षेत्र की राजधानी मुंबई में सेवा क्षेत्र विषयक विश्व प्रदर्शन आयोजित किया. इसके लिए केंद्रीय वाणिज्य विभाग का मुख्यमंत्री ने आभार माना.
सेवा क्षेत्र में महाराष्ट्र अग्रणी -केंद्रीय वाणिज्य मंत्री
केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभू ने कहा, सेवा क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राज्य निहाय प्रारूप तैयार किया गया है. इस माध्यम से बड़े पैमानेपर रोजगार निर्मिती की जाएगी. महाराष्ट्र राज्य इसमें पहल लेकर प्रदर्शन में सहभागी हुआ है. अपने देश के विभिन्न क्षेत्र के उत्कृष्ट और कौशल्यपूर्ण ज्ञान के माध्यम से विश्व को उत्तम सेवा देने का प्रयास करेंगे, ऐसा आवाहन उन्होंने किया.
इस समय वित्त, पर्यटन, लॉजिस्टिक सेवा, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र सेवा, स्वास्थ्य सुविधा सेवा, निर्माणकार्य और इंजीनियरिंग सेवा क्षेत्र, कानून विषयक सेवा, पर्यावरण विषयक सेवा, वाणिज्य विषयक सेवा,शैक्षिक सेवा, सुचना तकनिकी और दूरसंचार सेवा एवं बुनियादी सुविधा सेवा आदि 12 सर्वोत्कृष्ट सेवा क्षेत्रों का चयन किया गया है. इन क्षेत्रों को सर्वोत्कृष्ट राष्ट्रीय सेवा क्षेत्र का दर्जा दिया गया है.
इस अवसर पर इस क्षेत्र के गणमान्यों द्वारा प्रतिनिधिक तौर पर अपने विचार व्यक्त किए. इसमें उदय कोटक, विवेक नायर, आर. दिनेश, सुधांशू वत्स, डॉ. नरेश त्रेहान, विनायक चटर्जी, निशांत पारेख, मसूद मल्लिक, प्रफुल छाजेड, प्रद्मुन्म व्यास और हरी नायर ने वित्त, पर्यटन, लॉजिस्टिक सेवा, मीडिया और मनोरंजन, स्वास्थ्य, निर्माणकार्य एवं इंजीनियरिंग, कानूनविषयक सेवा, पर्यावरण, वाणिज्य, शिक्षा, सुचना तकनिकी आदि सेवा क्षेत्रों में विभिन्न अवसरों के संबंध में मनोगत व्यक्त किया.
इस समय राष्ट्रपति के हाथों ‘इंडिया सर्विसेस’ के प्रतिकचिन्ह और वेब पोर्टल का शुभारंभ किया गया. सीआईआई के अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने इस समय मनोगत व्यक्त किया. केंद्रीय वाणिज्य विभाग के सचिव रिटा टिओटिया ने प्रस्ताविक किया. इस वैश्विक प्रदर्शन में 100 देशों के 500 प्रतिनिधि मंडल सहभागी हुए हैं. इस समारोह का आरंभ और समापन राष्ट्रगीत से किया गया.