बीजेपी की आय में बढ़ोत्तरी और कांग्रेस को मिलने वाले धन में कमी
12 Apr 2018
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►पार्टियों को मिलने वाले धन के अज्ञात स्रोतों से है चिंता बरकरार
मुंबई, (11 अप्रैल 2018)- सत्ता में रहने वाली पार्टी को धन की कमी नहीं होती है ये बिल्कुल सत्य है ऐसे में सत्ता पक्ष को मिलने वाले दान की तुलना विपक्ष को मिलने वाले दान से करना बेईमानी है। इसलिए जब ये बात सामने आई कि सत्ताधारी बीजेपी को साल 2016-17 में उसको होने वाली आय में 81 फीसदी इजाफा हुआ है, तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, उसी तरह से कांग्रेस पार्टी को मिलने वाले धन में भी 14 फीसदी तक की कमी आई तो किसी ने हैरानी नहीं जताई। देश के दो सबसे बड़े राष्ट्रीय राजनैतिक दल बीजेपी और कांग्रेस को मिलने वाले धन के आंकड़ों पर तुलना के लिए गौर फरमाइए। चुनाव और उससे जुड़ी बातों पर नजर रखनेवाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को साल 2015-16 में कुल 570.86 करोड़ रुपए की आय हुई थी जो कि केवल एक साल में 81 फीसदी बढ़ कर साल 2016-17 1,034.27 करोड़ हो गई। उधर इसके ठीक उल्टा विपक्षी दल कांग्रेस का हाल हुआ है.।कांग्रेस को जहां साल 2015-16 में 261.56 करोड़ रुपए मिले, वो एक साल में 36.20 करोड़ घट कर मात्र 225.36 करोड़ रुपए रह गए।
►बीएसपी की तरह ही नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का खजाना भी है बढ़ा
भारतीय जनता पार्टी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी की किस्मत चमकने लगी. पार्टी को शासन में आने वाले उसे धन की कमी महसूस नहीं हुई है.।सत्ता में आने के बाद पार्टी के खजाने में लगभग 53 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। बीजेपी की आय जहां 2013-14 में केवल 673.81 करोड़ थी वहीं 2016-17 में ये बढ़ कर 1034.27 करोड़ रुपए हो गई है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी को इस मोर्चे पर खासा नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी के खजाने में 62 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। 2013-14 में जहां कांग्रेस को 598.06 करोड़ मिले थे वहीं 2016-17 में ये घट कर महज 225.36 करोड़ रुपए ही रह गए। अब एक नजर बहुजन समाज पार्टी को मिलने वाले धन के आंकड़ों पर भी डालिए। पार्टी के खाते में जबरदस्त वृद्धि हुई है। जहां बीएसपी को साल 2015-16 में केवल 47.385 करोड़ रुपए की आय हुई थी, वहीं साल 2016-17 में ये आंकड़ा 173.58 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, यानी कि एक साल में पार्टी के फंड में 266.32 फीसदी तक की बंपर बढ़ोत्तरी हो गई। बीएसपी की तरह ही नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का खजाना भी बढ़ा है। एनसीपी के खाते में 88.63 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीपी को साल 2015-16 में जहां 9.137 करोड़ रुपए की आय हुई वहीं 2016-17 में ये बढ़ कर 17.235 करोड़ तक पहुंच गई. यानी एनसीपी को एक साल में 8.098 करोड़ ज्यादा मिले। अगर सात राष्ट्रीय पार्टियों को मिलने वाली राशि की पूरी तस्वीर को ध्यान से देखें तो पाएंगे की 2016-17 में उन्हें मिले कुल 1169.07 करोड़ रुपए में से 75 फीसदी धन उन्हें स्वैच्छिक योगदान के तहत मिले हैं, जबकि इसके विपरीत 2015-16 में इन पार्टियों को मिले कुल धन का केवल 60 फीसदी स्वैच्छिक योगदान के तहत मिला था।
►पार्टियों को मिलने वाला अधिकांश धन अज्ञात स्रोतों से
जैसा की शुरू में ही बताया गया है कि बीजेपी की आय में बढ़ोत्तरी और कांग्रेस को मिलने वाले धन में कमी कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात पार्टियों को मिलने वाले धन के अज्ञात स्रोतों से है. इस विषय पर नजर रखने वाली संस्था एडीआर ने अभी तक अज्ञात स्रोतों से पार्टियों को मिलने वाले रकम का खुलासा नहीं किया है,लेकिन इसी संस्था के संस्थापक सदस्यों में से एक प्रो.जगदीप छोकर के मुताबिक सभी पार्टियों को मिलने वाली कुल राशि का लगभग 75 से 80 फीसदी तक धन अज्ञात स्रोतों से ही मिलता है। दूसरे शब्दों में कहें तो राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने का सरकार का वादा अब तक केवल वादा ही बना हुआ है। ये मुद्दा निश्चित रूप से देश के लिए और खास करके बीजेपी के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि बीजेपी ने शुरू में वादा किया था कि वो राजनीतिक चंदों और फंडों के लेन देन में पारदर्शिता लाने की कोशिश करेगी।