मुंबई, (04 अप्रैल 2018)- आगामी साल 2019 का लोकसभा-विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने एकजुट होकर लड़ने की तैयारी की हैं, ताकि हमारी ताकत एक रहे, वह बिखरे नहीं, क्योंकि पार्टी एक ही है, विचारधारा एक ही तो एकजुट होकर लड़ने में किसी को कोई परेशानी नहीं हैं। इसके तहत पार्टी आलाकमान द्वारा सारे निर्देश दिए जा रहे है। निर्देशों के आधार पर कांग्रेस द्वारा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी है। हालांकि आजादी के समय से ही कांग्रेस पार्टी को कभी खास तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं करनी पड़ी। पार्टी हर चीज को फेस करने के लिए हमेशा तैयार रहती है। कांग्रेस पार्टी में कितनी भी अंदरूनी राजनीति, गुटबाजी हो, लेकिन समय आने पर कांग्रेस एक परिवार की तरह एकजुट होकर विपक्ष के खिलाफ लड़ती है। कांग्रेस पार्टी की यहीं खासियत उसे सबसे अलग और खास बनाती है। ऐसा पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह ने मेट्रो हलचल संवाददाता से बातचीत के दौरान कहा। गौरतलब है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में आठ साल के बाद कृपाशंकर सिंह को कोर्ट से राहत मिलने के कारण कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच खुशी का माहौल है, और यह कयास लगाए जा रहे है कि कृपाशंकर सिंह के कांग्रेस में वापसी के साथ ही अब कांग्रेस पार्टी में अच्छे दिनों के आने की शुरूआत हो गई है। बता दें कि कृपाशंकर सिंह उत्तरभारतीयों के साथ-साथ मुस्लिम, मराठी और अन्य भाषी लोगों में अपनी अच्छी पकड़ रखने वाले दिग्गज नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस आलाकमान के यहां भी कृपा की अच्छी पकड़ हैं। कृपाशंकर सिंह ने हमेशा कांग्रेस पार्टी को बढ़ावा देने के साथ-साथ पार्टी के हित में काम किया हैं। साथ ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी तवज्जों देने का काम बखूबी किया हैं। इसलिए हाल ही में आय से अधिक संपत्ति के मामले में कृपा को कोर्ट से राहत मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बड़े पैमाने पर खुशी की झलक देखने को मिल रही हैं।
►महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया
कृपाशंकर ने बताया कि मैं हमेशा महाराष्ट्र के विकास को लेकर काम करते रहूंगा। मराठी भाषियों समेत उत्तर भारतीय, मुस्लमान अन्य सभी भाषियों के विकास और भलाई के लिए मैं हमेशा तत्परता से काम करूंगा। उत्तर भारतीय समाज के साथ-साथ हम लोग मराठी समाज से भी घुल मिल गए हैं। पहले कहावत कही जाती थी, कि हिंदी मेरी मां है, तो मराठी मेरी मौसी है, लेकिन समय के साथ यह कहावत बदल गई है। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि मराठी मेरी मां है, तो हिंदी मेरी मौसी है। इसलिए मैं उत्तरभारतीयों से अनुरोध करूंगा कि अपनी एकजुटता की संस्कृति का प्रदर्शन करके महाराष्ट्र के विकास में अपना योगदान देते रहे। हालांकि देखा जाए, तो महाराष्ट्र के विकास में उत्तरभारतीय समाज का बड़ा योगदान रहा है, और हम इसी पंरपरा को हमेशा कायम रखेंगे। महाराष्ट्र को बड़ा भाई समझकर उसके विकास में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें, ताकि महाराष्ट्र के साथ-साथ उत्तभारतीय समाज का भी विकास हो।
► अपने समाज से मिलने की तैयारी
कृपाशंकर सिंह ने आगे बताया कि आनेवाले समय में वह अपने उत्तर भारतीय समाज से मिलकर उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश करेंगे। समाज में सुधार और बेहतर कार्य के लिए हमेशा प्रयासरत रहेंगे। हालांकि कांग्रेस में एसे बहुत से उत्तर भारतीय चेहरे है, जो भविष्य में अच्छे नेता और वक्ता के तौर पर ऊभरकर सामने आ सकते है। एसे लोगों को बढ़ावा और समर्थन देने के लिए मैं जल्दी ही उनसे भी मुलाकात करूंगा, ताकि उनको भविष्य में आगे बढ़ने की राह मिल सकें। साथ ही कांग्रेस पार्टी को उत्तर भारतीयों का एक बेहतरीन चेहरा मिल सकें।
►आज की जनता- मतदाता हैं जागरूक
फिलहाल हम विपक्ष की भूमिका में है, और उसे बखूबी निभाते हुए सत्तापक्ष के कार्यों को जनता के सामने लेकर जाएंगे, बाकि जनता तय करेगी कि उन्हें आने वाले समय किस पार्टी का साथ देना है। चुनाव की असली बाजी जनता तय करती है, जनता को अगर लगता है कि यह पार्टी हमारी बेहतरी के लिए काम कर सकती है, तो वह उसे अपना मत देती है। आज मैं यह दावे से कह सकता हूं कि जनता- मतदाता जागरूक हैं। सत्तापक्ष द्वारा विकास के नाम पर जो काम नहीं हो रहा है, जनता के सामने वह लेकर जाना हमारा काम है, बाकि जनता खुद तय करेगी, अगर विकास हुआ है, तो वह लोगों को दिखाई पड़ेगा। सिर्फ कागज पर दिखाकर विकास का ढिंढोरा पीटने से कोई लाभ नहीं होगा। जहां जरूरत पडेगी, वहां मैं विपक्ष की भूमिका निभाऊंगा। समाज के परिवार के तौर और पार्टी के प्रतिनिधी के तौर जब-जब, जहां-जहां जरूरत पड़ती है, मैं तब-तब सरकार के नुमांईदों के पास जाता हूं। अपनी पार्टी के मेनिफेस्टों के हिसाब से काम करता हूं।
►राजनीतिक पार्टियां भाषा के नाम पर राजनीति ना करें
कृपाशंकर सिंह ने आगे बताया कि राजनीतिक पार्टियां अपनी आईडियोलाजी के ऊपर लड़ाई लडें। ना कि कभी भाषा के नाम पर, कभी जाति के नाम पर, कभी समाज के नाम पर, कभी परप्रांतीय के नाम पर कटुता का मुंबई में ना निर्माण करें। क्योकि मुंबई शहर मिनी भारत हैं। महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले,शाहू महाराज के विचारों की धरती है। महाराष्ट्र को संविधान देने वाले डा. बाबासाहेब आंबेडकर की धरती है। यह सूफी संतों की धरती है, प्रभू रामचंद्र भी आए थे। महाराष्ट्र का एक अलग ही कलचर है। इसलिए मेरा कहना है कि यहां पर भाषा के नाम पर धर्म के नाम पर प्रांत के नाम पर किसी को भी अलग ना समझे।