पटना. बिहार विधानसभा के चुनाव में तीसरा मोर्चा बनने की उम्मीद अब लगभग खत्म हो गई है। सोमवार को इसकी सियासी तस्वीर भी सामने आ गई। महागठबंधन से छिटक कर बाहर आई सपा ने अपने दम पर राज्य की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। वहीं छह वाम दलों ने भी थर्ड फ्रंट के चक्कर में पड़ने की बजाय आपस में मिलकर लड़ने का फैसला किया। हालांकि एनसीपी अभी भी तीसरे मोेर्चे को लेकर हाथ-पैर मार रही है। लेकिन, कहीं से सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे हैं।
एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव तारीक अनवर ने बताया कि हम सपा और सूबे के अन्य छोटे दलों के साथ तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि बात नहीं बनी तो अकेले लड़ेंगे। इधर, सपा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र सिंह यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बिहार में एक तरफ संप्रदायवाद है और दूसरी ओर धोखावाद। पार्टी राज्य में थर्ड फ्रंट की संभावना भी तलाश रही है। वे पटना में प्रदेश कार्यकारिणी और जिलाध्यक्षों की बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे।
इस बीच भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार की सभी सीटों पर छह वामदल मिलकर लड़ेंगे। 230 सीटों पर सहमति भी बन गई है। 13 सीटें बची हैं, जिन पर फैसला जल्द हो जाएगा। राकांपा को वामदलों के मोर्चे में शामिल करने का निर्णय नहीं हुआ है। वाम पार्टियों ने एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित कन्वेंशन में चुनाव में एनडीए व महागठबंधन को धूल चटाने का संकल्प लिया।
छह वाम दलों ने संयुक्त रूप से ऐलान किया कि एनडीए व महागठबंधन की नीति और कार्य गरीबविरोधी हैं। बिहार में हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे और इन दोनों गठबंधनों को परास्त करेंगे। सीपीआईएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि नरेंद्र मोदी के घोड़े को बिहार में वाम एकता ही रोकेगी। आज बिहार में राजनीति का तीन कोन है। एक है एनडीए का, जो सांप्रदायिक शक्ति है और वोट के लिए हिंदुओं की भावना से खेल करती है। नरेंद्र मोदी देश को सर्वनाश की ओर ले जा रहे हैं।
उन्होंने जितने भी वादे किए, उससे ठीक उल्टा काम कर रहे हैं। देश में साधन और संपत्ति की कमी नहीं है। लेकिन, भारत सरकार इसका उपयोग अमीर घरानों के लिए कर रही है, न कि गरीबों के लिए। दूसरा कोना है जदयू-राजद गठबंधन का, जो सिंहासन का है। जातिवाद को भड़का कर ये राजनीति करते हैं। तीसरा कोना है वामदलों का। यही कोना है जो जनता की जरूरतों के आधार पर राजनीति करती है और नीति बनाती है।
क्यों अलग हुई सपा
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने नीतीश कुमार को बिहार में गठबंधन का नेता बनवाया। महागठबंधन भी सपा प्रमुख की सोच थी, ताकि सांप्रदायिकता का मुकाबला किया जा सके। लेकिन गठबंधन का नेता बनते ही नीतीश कुमार के तेवर बदल गए।
नेता बनने के बाद नीतीश कुमार ने दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मुलाकात तो की, लेकिन सपा प्रमुख से मुलाकात करना आवश्यक नहीं समझा। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सीटों के बंटवारे में भी सपा के किसी महत्वपूर्ण नेताओं से कोई विमर्श नहीं किया गया। यह पार्टी का अपमान था, पार्टी कार्यकर्ताओं का अपमान था। पार्टी ने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।