ग्वालियर। अंचल से बारिश तो जैसे गायब हो चुकी है और दिन का लगातार बढ़ता तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। सितंबर के महीने में अधिकतम तापमान 37 डिग्री से ज्यादा हो चुका है, जो छह वर्ष बाद आया है। आशंका है कि आने वाले दिनों में तामपान 40 डिग्री तक पहुंच सकता ह
छह साल पहले 2009 में सितंबर महीने के पहले हफ्ते में अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री था। यह ठीक वैसी ही गर्मी है, जैसी जून माह में पड़ती है। इस तापमान में वृद्धि होने के कारण लोग परेशान हो रहे हैं, क्योंकि धूप में बहुत ज्यादा तीखापन है और इससे लोगों की सेहत पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। केवल दिन का नहीं, बल्कि रात को गर्मी ज्यादा हो रही है। इस समय रात का न्यूनतम तापमान 27 डिग्री के आसपास है, जो सामान्य से करीब तीन डिग्री ज्यादा है।
फिलहाल बारिश के आसार नहीं
वैसे तो मानसून का पूरा महीने बाकी है, लेकिन जिस प्रकार से मौसम की स्थिति बन रही है, उससे यही लग रहा है कि मानसून विदा हो रहा है। वैसे मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों में कम दबाव वाला क्षेत्र बना तो छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। यदि सिस्टम बनने के साथ ही खत्म हो गया तो बारिश भी गायब हो जाएगी।
औसत से कम हुई बारिश
ग्वालियर में पूरे साल की औसत बारिश करीब 750 मिमी है, लेकिन अभी तक बारिश का आंकड़ा मात्र 575 मिमी तक ही पहुंचा है। ऐसे में सामान्य बारिश भी नहीं होना आने वाले समय के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि फिर अंचल में पानी की कमी बनी रहेगी। अभी तक ग्वालियर को पानी सप्लाई करने वाला तिघरा जलाशय भी पूरा नहीं भरा है। यदि मानसून के बचे हुए दिनों में बारिश नहीं हुई तो शहर में दो दिन में एक बार ही पानी मिल पाएगा।
सितंबर में कम बारिश
गुना और अशोकनगर को छोड़कर संभाग के बाकी जिलों में सितंबर का पहला सप्ताह सूखा रहा है। प्रदेश के आठ जिलों में इस बार भरपूर बारिश हुई है। बाकी के जिलों में बारिश का आंकड़ा, पिछले साल से कम है। यह स्थिति आयुक्त भू-अभिलेख की बारिश संबंधी ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट में 27 अगस्त के बाद हुई बारिश का उल्लेख है। इसमें केवल मुरैना जिले में इस सप्ताह 18 मिमी बारिश हुई है। ग्वालियर सहित पांच जिले श्योपुर, भिंड, शिवपुरी व दतिया में पिछले सप्ताह बूंदाबांदी भी नहीं हुई है। दूसरी ओर मालवा क्षेत्र के आठ जिले ऐसे हैं जहां पर बारिश ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इन जिलों में इंदौर, खंडवा, उज्जैन, नीमच, शाजापुर व आगर के नाम शामिल हैं।
2009 की तरह बने हालात- 28% कम हुई बारिश
समय से पहले मानसून की वापसी से वर्ष 2009 की तरह हालात बन रहे हैं। वर्ष 2009 में मानसून सीजन में लगभग 400 मिमी बारिश हुई थी। जबकि इस वर्ष अब तक 578 मिमी बारिश हुई है। यह औसत बारिश 800 मिमी के कोटे से 28 फीसदी कम है। पिछले वर्ष 600 मिमी बारिश हुई थी। लेकिन सितंबर में बारिश होने के कारण लोगों को इस तरह गर्मी का अहसास नहीं हुआ था। सितंबर 2014 में 142 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जबकि इस साल सितंबर के पहले सप्ताह में महानगर में एक मिमी भी बारिश नहीं हो सकी है।
वायरल व मलेरिया के बढ़ रहे मरीज
इस मौसम में वायरल फीवर, मलेरिया, टाइफाइड, उल्टी -दस्त जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या अस्पतालों में बढ़ गई है। मेडिसिन और पीडियाट्रिक विशेषज्ञों के यहां मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।