भोपाल मुठभेड़ की जांच सुप्रीम कोर्ट के जजों की निगरानी में हो : अमीक जामी

 17 Nov 2016  457

आतंकवाद के आरोप में पकड़े जाने वाले निर्दोष युवकों को न्याय दिलाने की मुहिम से जुड़े अमीक जामी ने भोपाल में सिमी आतंकियों की मुठभेड़ में मारे जाने के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जजों की निगरानी में कराने की मांग की है। गौरतलब है कि भोपाल जेल से सिमी के आठ विचाराधीन कैदी फरार हो गए थे जिन्हें मुठभेड़ में मार गिराया गया था।

अमीक ने शनिवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आठ कैदियों और एक पुलिस सिपाही की हत्या के मामले की मांग को लेकर रविवार को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्हें गुजरात में दलित आंदोलन की अगुवाई करने वाले जिग्नेश मेवानी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अध्यक्ष मोहित पांडे, जेएनयू की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद सहित बडी संख्या में जेएनयू के छात्रों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग नहीं मानी गई तो दिल्ली के बाहर भी इस अभियान को शुरू किया जाएगा।

उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि हिन्दू-मुस्लिम एकता को तोड़ने के लिए शिवराज सिंह की सरकार ने इस षड्यंत्र को अंजाम दिया। अमीक ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि कानून प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे आठों कथित आतंकी रिहा हो जाते जो सरकार और पुलिस की साख पर बट्टा साबित होता। इसीलिए सरकार ने पुलिस की मिलीभगत से यह षड्यंत्र रचा। उन्होंने जेल में प्रहरी रमाशंकर यादव की हत्या का सीसीटीवी फुटेज मुहैया नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाया। 
जेएनयू अध्यक्ष मोहित पांडे ने कहा कि दिल्ली पुलिस अभी तक नजीब अहमद को नहीं ढूंढ पाई। बाटला हाउस का सच आज तक सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की न्यायिक संस्थाओं को बचाना जरूरी है।भोपाल जेल कांड की ईमानदार जांच तो होनी ही चाहिए।