भोपाल. प्रदेश के करीब 200 इंजीनियरिंग कॉलेजों में से केवल 15 प्रतिशत के पास ही नेशनल बोर्ड आॅफ एक्रेडिटेशन (एनबीए) की मान्यता है। यह खुलासा सोमवार को होटल पलाश में अायोजित एनबीए की कार्यशाला में हुआ। इस मौके पर तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संजय सिंह ने खुद सवाल उठाए कि आखिर संस्थान एनबीए से मान्यता लेने में कतराते क्यों हैं? खासकर जो संस्थान काफी पुराने हो गए हैं उनके पास भी एनबीए की मान्यता न होना हैरानी की बात है।
प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए क्वालिटी एजुकेशन के प्रति जागरूक करने के लिए वर्कशाॅप आयोजित की गई। विषय था आउटकम बेस्ड एजुकेशन एंड एक्रेडिटेशन। वर्कशाॅप में प्रदेश भर से इंजीनियरिंग काॅलेजों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कोर्सेस को मान्यता होना इसलिए जरूरी
इस दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि आज जब यह बात सामने आ रही है कि केवल 15 से 20 प्रतिशत छात्र ही रोजगार के लायक हैं तब ऐसी स्थिति में कोर्सेस की मान्यता होना जरूरी हो जाता है। काॅलेज स्तर पर एनबीए के लिए डॉक्यूमेंटेशन ही नहीं हो पाने पर उन्होंने अफसोस जताया। उन्होंने सरकारी कॉलेजों के लिए रोडमैप तैयार कर सभी काेर्सेस के एक्रेडिटेशन पर जोर दिया।
समझ आधारित परीक्षा प्रणाली की जरूरत
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनबीए के चेयरमैन डॉ. सुरेंद्र प्रसाद के अनुसार पिछले कुछ सालों में देशभर में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही क्वालिटी को बनाए रखना चुनौती है। इसके लिए प्राइवेट कॉलेजों में शिक्षकों को दिया जाने वाला वेतन काफी मायने रखता है। सरकारी कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान एग्जाम सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि जरूरत समझ अाधारित परीक्षा प्रणाली विकसित करने की है जबकि अभी मेमोरी बेस्ड सिस्टम लागू है। डॉ. प्रसाद का कहना है कि एनबीए का जोर फिलहाल इस पर है कि सभी कॉलेज एआईसीटीई के मापदंड पूरे कर लें।
एनबीए एक्रेडिटेड कोर्स को अतंरराष्ट्रीय मान्यता
एनबीए के मेंबर सेक्रेटरी एके नासा ने बताया कि भारत पिछले साल वाशिंगटन एकॉर्ड का सदस्य बन गया है। इससे जो कोर्स एनबीए से एक्रेडिटेड हो रहे हैं उन्हें अतंरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। एनबीए का उद्देश्य देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में संचालित सभी कोर्सेस का 100 प्रतिशत एक्रेडिटेशन करना है। वर्कशाॅप में एनबीए की टीम ने एक्रेडिटेशन के लिए पूरी प्रक्रिया समझाई। तकनीकी शिक्षा संचालक आशीष डोंगरे ने कार्यक्रम का समन्वय किया।
इच्छुक काॅलेजों की अलग वर्कशॉप
मैनिट की पांच ब्रांच को एनबीए की मान्यता मिल चुकी है। अब मैनिट 15 एमटेक कोर्सेस की मान्यता के लिए एनबीए को आवेदन कर रहा है। प्रो. अप्पू कुट्टन, डायरेक्टर, मैनिट
प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों को उन कॉलेजों के दौरे पर ले जाया जाएगा, जिन्हें एनबीए से मान्यता मिल चुकी है। साथ ही एनबीए जो कॉलेज मान्यता लेने के इच्छुक हैं उनकी अलग से एक वर्कशॉप कराने की गुजारिश सरकार से की है। बीएस यादव, सचिव, एटीपीआई, मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है जहां लो कॉस्ट एजुकेशन है। इसके बावजूद कुछ कॉलेज बेहतर परफॉर्म कर रहे हैं। पिछले साल ही 3000 छात्रों का कैंपस प्लेसमेंट होना इसका उदाहरण हैं। सुनील कुमार, अतिरिक्त सचिव, तकनीकी शिक्षा विभाग