बिसात- रानी साहिबा का ऑपरेशन

 23 Jun 2019  791

अजय भट्टाचार्य

करेंट अफेयर्स,(23 जून 2019)- भले ही राजस्थान के कोटा से सांसद चुने गए ओम बिड़ला लोकसभा का अध्यक्ष चुना जाना सतही तौर पर एक सामान्य घटना भर हो, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ी ही चतुराई से एक तीर से दो निशाने साधे और सफल भी रहे। जानकार बताते हैं कि राजस्थान के हाड़ौती संभाग में कोटा, झालावाड़, बूंदी, बारां जैसे जिले आते है। झालावाड़ से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विधायक के तौर पर और उनके बेटे दुष्यंत सिंह सांसद के तौर पर आते है। लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला कोटा जिले से है।  सरकारी राजस्व और उद्योगों के हिसाब से कोटा इस संभाग का बहुत महत्त्वपूर्ण जिला है जो 5000 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री देता है तो कोटा स्टोन और सैंड स्टोन का दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग भी अपने पास रखता है। मुख्यमंत्री रहते हुए वसुंधरा राजे एयरपोर्ट को कोटा के बजाय झालावाड़ ले गईं। उनके बारे में कहा जाता था की रानी साहिबा रात 8 बजे के बाद कार्यकर्ताओ से मिलना पसंद नहीं करती थी। लेकिन उस वक्त अमित शाह की मजबूरी थी की वो उन्हें हटा नहीं सकते थे क्योकि एक तो पार्टी फण्ड पर मैडम का कब्ज़ा था और साथ ही जी हुजूरी में लगे कई स्थानीय विधायक भी रानी के सिपाही बने हुए थे। अगर वसुंधरा को हटाया जाता तो पार्टी टूटने का खतरा बना रहता लेकिन अब अमित शाह ने स्थिति को बदल डाला है। अब हाड़ौती संभाग में सबसे बड़ा नेता का नाम वसुंधरा राजे नहीं बल्कि ओम बिड़ला बन चुका है। ओम बिड़ला ने ना केवल गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ दिया था बल्कि कोटा की इसी कोचिंग इंडस्ट्री या स्टोन इंडस्ट्री की मदद से पार्टी फण्ड को भरने में भी बड़ा किरदार निभाया। बिड़ला की पदस्थापना के बाद मोदी और शाह ने वसुंधरा राजे की राजनीतिक उम्मीदों को बिलकुल नगण्य कर दिया है।  अब ना तो पार्टी में टूटेगी और न ही मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर वसुंधरा अपनी दावेदारी को उतनी मजबूती से उठा पायेगी।

दूसरा मोर्चा राजवर्धन सिंह राठौड़ के हवाले किया जाने वाला है। इसीलिए इस बार उनको केंद्रीय मंत्रिमंडल में न लेकर अर्जुन मेघवाल और जोधपुर से आने वाले गजेंद्र सिंह शेखावत को शामिल किया गया है। वैसे अपने  पिछले कार्यकाल में राजवर्धन सिंह राठौड़ ने कई अहम् मंत्री पद संभाले थे। थलसेना में अफसर और देश के लिए एथेंस ओलिंपिक में सिल्वर मैडल जीतने वाले राजयवर्धन सिंह राठोड की छवि साफसुथरे राजनेता की है। अब 5 सालो के बाद जब राजस्थान में चुनाव होंगे तो उसके लिए कांग्रेस के सचिन पायलट जैसे कद्दावर नेता का जवाब अमित शाह ने राजयवर्धन सिंह राठौड़ के तौर पर चुना है। इस तरह अपनी ही पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन चुकी वसुंधरा राजे को बिना किसी शोर शराबे के रास्ते से हटा दिया गया और अगले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा अपना नया मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी स्थापित करने में जुट गयी है।

►इस तरह टूटा राहुल का सपना

लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से सन्निपात की स्थिति को प्राप्त कांग्रेस झटके से उबरे भी तो कैसे? इस्तीफा देने पर अड़े राहुल गाँधी की वेदना का अन्तर्निहित भाव अलग ही है। दरअसल राहुल गांधी और उनकी टीम को यूपीए की जीत का पूरा भरोसा था। राहुल को बताया गया था कि कांग्रेस 184 सीट जीतेगी। यदि इस आंकड़े में कुछ गलती भी हुई तो 164 सीट पक्की हैं। 21 मई को राजीव गाँधी की पुण्यतिथि के दिन काग्रेस के भीतरखाने में जबरदस्त हलचल थी। राहुल गाँधी ने मंत्रिमंडल का लगभग पूरा खाका तैयार कर लिया था। डीएमके नेता एमके स्टेलिन को फोन कर केंद्रीय गृहमंत्री बनने का ऑफर दे दिया गया था। अखिलेश यादव, शरद पवार, उमर अब्दुल्ला और तेजस्वी यादव से भी कांग्रेस ने बात कर ली थी और केंद्र सराकर में बड़े मंत्रीपद ऑफर कर दिए थे। लेकिन 23 मई को जैसे-जैसे नतीजे आए, राहुल गांधी और कांग्रेस के अरमानों पर पानी फिर गया। यही कारण है कि अब राहुल गांधी अपनी टीम से बहुत नाराज हैं और किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। संडे गार्जियन ने राजनीतिक संपादक पंकज वोहरा के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में लिखा है कि कांग्रेस ने पहले ही तय कर लिया था कि नतीजे आने पर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया जाएगा। इसके लिए दो लेटर्स बनाकर तैयार कर लिए गए थे, जिन्हें सबसे पहले राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। विजय जुलूस की तैयारियां हो गई थीं। कुछ बड़े कांग्रेस नेताओं को 24, अकबर रोड़ स्थित एआईसीसी के ऑफिस के बाहर 10 हजार लोगों की भीड़ जुटाने के लिए कह दिया गया था। इस मामले में राहुल को सबसे ज्यादा धोखा प्रवीण चक्रवर्ती से मिला जो कांग्रेस का चुनावी दफ्तर संभालते थे और पार्टी के लिए आंकड़ों का विश्लेष्ण करते थे। 21 मई को प्रवीण ने राहुल से मुलाकात की थी और कांग्रेस के 184 संभावित विजेताओं की सूची भी सौंपी थी। इस आंकड़े की दो बार जांच हुई थी। इसके बाद न केवल राहुल, बल्कि सोनिया और प्रियंका भी जीत के प्रति आश्वस्त हो गए थे। राहुल ने पहली बार जीतकर आने वाले कांग्रेस के 100 सांसदों की लिस्ट बनाने को कहा था। राहुल ने उन नेताओं की लिस्ट भी बनवाई थी, जो हार रहे हैं, लेकिन जिन्हें सरकार में शामिल किया जाना है। प्रवीण की सूची मिलने के अगले दिन यानी 22 मई को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाला। दोनों ने अपनी पार्टी और गठबंधन के बड़े नेताओं से संपर्क शुरू किया। खबर है कि राहुल शरद पवार से भी गुजारिश की गई कि वे सरकार का हिस्सा बनें। अखिलेश यादव को भी अहम पद ऑफर किया गया। इस दौरान राहुल ने यह भी पूछा कि यूपी में महागठबंधन कितनी सीटें जीत सकता है, तो अखिलेश ने 40 से ज्यादा सीटों पर जीत का दावा किया था और कांग्रेस के खाते में 9 सीटें जाने की बात कही थी। राहुल ने बिहार में तेजस्वी यादव और जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला से भी बात की। दूसरी तरफ प्रियंका ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की और उनसे बड़े नेताओं की सूची मांगी, जिन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जा सके। कांग्रेस को अपनी जीत पर इतना भरोसा था कि नतीजों वाले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा कार्यक्रम भी बन गया था। मगर  जैसे-जैसे नतीजे आए, राहुल का सपना टूट गया।

►‘माल्या’ का गोत्र परिवर्तन   

पिछले साल नवंबर में भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने जिन वाईएस चौधरी और सीएम रमेश को ‘आंध्र प्रदेश का माल्या’ बताया था और 28 नवंबर को एथिक्स कमेटी को लिखे पत्र को ट्वीट किया था। इसमें लिखा था, ‘मैंने एथिक्स कमेटी को टीडीपी के दो सांसदों वाईएस चौधरी और सीएम रमेश को अयोग्य ठहराने के लिए पत्र लिखा है। बडे़ वित्तीय घोटालों के कारण ‘आंध्र के माल्या’ का खिताब हासिब किया है।’ अब इन दोनों सहित टीडीपी के चार राज्यसभा सांसद गोत्र बदलकर भाजपाई हो गये है। जाहिर है अब उनमें कोई दाग नहीं मिलेगा और एथिक्स कमिटी को लिखा पत्र भी अप्रासंगिक हो जायेगा। बीते गुरुवार को भाजपा का दामन थामने वाले टीडीपी के राज्यसभा सांसद रहे सीएम रमेश और वाई एस चौधरी आयकर विभाग, सीबीआई के साथ ही ईडी की जांच के घेरे में भी हैं। रमेश का नाम सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेश राकेश अस्थाना में हुए विवाद के दौरान सामने आया था। रमेश की कंपनी के खिलाफ आयकर विभाग जांच चल रही थी। इसके अलावा रमेश कथित बैंक लोन धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई और ईडी की राडार पर भी थे। पिछले साल अक्टूबर में आयकर जांच में रमेश से जुड़ी कंपनी में 100 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का बात सामने आई थी। आयकर विभाग ने 12 अक्टूबर को हैदराबाद में कंपनी के विभिन्न परिसरों और रमेश के कडपा स्थित आवास पर छापा भी मारा था। जबकि सीएस चौधरी पर सीबीआई 360 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी के मामले में तीन सेट एफआईआर भी दाखिल कर चुकी है। इंतजार कीजिये ये दोनों अब कब बिलकुल पाक दामन होकर देश की सेवा में जुटेंगे। आखिर वैतरिणी में गोता लगाया है, मोक्ष निश्चित है।

►‘साला कांग्रेसी’ पर घिरे पुरी

नाम में क्या रखा है ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी कांगेस के आगे साला लिख दिया जाये तो कैसा लगेगा? और लिखने वाला केंद्रीय मंत्री हो तो बवाल होना निश्चित है।  केंद्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक कॉन्फ्रेस हॉल के नेम प्लेट की तस्वीर ट्वीट की। पुरी ने ‘SALA CONGRESSI  लिखे नाम पट्ट की तस्वीर को ट्वीट करते हुये लिखा कि इटैलियन भाषा में कॉन्फ्रेंस रूम को यह कहते हैं। दिलचस्प बात है कि इसका पिछला हिस्सा भी दीवार की तरफ है।’ इस तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर हरदीप सिंह पुरी लोगों ने जमकर क्लास लगा दी। उनके इस ट्वीट को लाइक करने के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल की भी भी खबर लेते हुये एक ट्विटर यूजर प्रियब्रत  ने लिखा, ‘यह ऑब्जर्वेशन दिखाता है कि नरेंद्र मोदी के मंत्री के मंत्री की सोच किस तरह की है। सोनिया मिनोचका मंत्रीजी को सलाह भरा उलाहना देते हुये लिखा, ‘सर, आप एक केंद्रीय मंत्री हैं और एक राजनयिक भी रह चुके हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप जैसा ऐसी पोजिशन वाला आदमी सार्वजनिक मंच पर इस तरह की चीजों को शेयर करता है। प्लीज अपने ऑफिस के लिए स्टैंडर्ड सेट किजिए। शुभकामनाएं।’ एक निजी चैनल के पत्रकार मानक गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री के लिए ट्वीट को फूहड़ मजाक बताते हुये  लिखा कि आपकी पोजिशन को यह सूट नहीं करता है। एक अन्य ट्विटर यूजर आईएमग्रासहोपर ने इसका मतलब समझाते हुए हरदीप पुरी को ‘हलवा पुरी’ लिखा। 1974 बैच के अफसरशाह से राजनेता बने हरदीप पुरी पिछली एनडीए सरकार में आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के मंत्री थे। भाजपा ने उन्हें इस बार पंजाब के अमृतसर से चुनाव में उतारा था। हरदीप पुरी को कांग्रेस के उम्मीदवार गुरजीत औजला के हाथों करीब 1 लाख मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। उनको को इस बार शहरी विकास मंत्रालय के साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्री भी बनाया गया है।

►अब सरकारी बैठकों में चना मुरमुरा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सरकारी बैठकों में मुरमुरा और भुने हुए चने परोसने का आदेश दिया है। एक अंग्रेजी दैनिक में छपे कालम के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री ‘कम खाएं, उत्तम खाएं’ के सिद्धांत का पालन करवा रहे हैं। आदेश के अनुसार अब बैठकों में बिस्कुट, समोसा, चॉकलेट केक जैसे जंक फूड नहीं परोसे जाएंगे। जाहिर है कि वे अपनी और सहकर्मियों की सेहत को लेकर काफी संजीदगी बरत रहे हैं। वैसे हर्षवर्धन पूर्व में निभाई पर्यावण मंत्री की जिम्मेदारियों को भी नहीं भूले हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे प्लास्टिक के बने फाइल कवर्स का इस्तेमाल बंद करें। कहना गलत नहीं होगा कि सरकारी दफ्तरों में प्लास्टिक फाइल कवर काफी ज्यादा नजर आते हैं। नई सरकार में दोबारा मंत्री बनाए जाने के बाद हर्षवर्धन जब अपने मंत्रालय का कामकाज संभालने पहुंचे तो वह साइकिल पर सवार होकर पहुंचे थे। हर्षवर्धन के साइकिल से दफ्तर जाने को स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति संदेश के तौर पर देखा गया था। हर्षवर्धन ही नहीं, मोदी सरकार के एक अन्य मंत्री मनसुख मांडविया भी साइकिल से संसद जाने के लिए मशहूर हैं। हर्षवर्धन स्वास्थ्य को लेकर बेहद सजग माने जाते हैं। दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद हर्षवर्धन ईएनटी (आंख, कान और गला) विशेशज्ञ हैं। 64 साल के हर्षवर्धन बेहद व्यस्तता के बावजूद अपनी फिटनेस का पूरा ख्याल रखते हैं। सेहत बढ़िया रखने के लिए वह नियमित साइकलिंग, योग और कसरत करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साइकलिंग बोरिंग न लगे, इसके लिए हर्षवर्धन हर रोज अलग अलग रूट पर जाते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि वह तीस हजारी मार्ग स्थित अपने आवास से करीब 6 किमी दूर स्थित बीजेपी हेडक्वॉर्टर साइकिल से जाते हैं। इसके अलावा, वह अपने घर से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम की दूरी भी साइकिल से नापते हैं। केंद्रीय मंत्री कभी-कभी लोधी गार्डर या अपने सरकारी आवास के लॉन में भी देर रात टहलते हैं। स्वास्थ्य के प्रति सजग स्वास्थ्यमंत्री मुजफ्फरपुर में 5 साल पहले 100 बेड वाला अस्पताल बनाने का वादा करके भी पूरा नहीं कर पाए, यह प्रश्न बहुत कुछ कह जाता है।

►सपा के ओमप्रकाश चर्चा में

खबर है कि पार्टी की ओवर हालिंग में जुटी समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में मुखिया का चेहरा बदलना चाहती है। इस चर्चा में सपा का पूर्वांचल में दबंग चेहरा ओमप्रकाश का नाम अचानक तेजी से उछल रहा है। ओमप्रकाश कभी चंद्रशेखर के बहुत करीब थे। उनसे जुड़ी एक पुरानी घटना इन दिनों वाराणसी में तैर रही है। उन दिनों शहर में तनाव का माहौल पसरा था लोगों के पास महीने भर से अख़बार नहीं मिल पा रहे थे। क्योंकि कुछ छात्र नेता अपने आदर्श नेता के ख़िलाफ़ झूठी ख़बर छपने के कारण आक्रोशित थे वो किसी भी क़ीमत पर अख़बार बिकने नहीं देना चाहते थे। रोज़ सुबह बीएचयू से बाबतपुर पहुँच कर सारे अख़बार की प्रतियाँ फूँक देते थे। यह सिलसिला महीने भर तक चला फिर एक रोज़ बीएचयू के बिडला हाउस में फ़ोन की घण्टी सुबह तड़के घनघनाने लगी। छात्र नेता ने फ़ोन उठाया तो दूसरे तरफ़ से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह बोल रहे थे। कहा, “तुम सुबह आके दिल्ली मिलो। छात्र नेता दिल्ली पहुँच गये। चन्द्रशेखर बड़े ही गम्भीर मुद्रा में बोले “तुम्हारी जान को ख़तरा है कुछ लोग तुम्हें जान से मार देना चाहते हैं क्योंकि तुम उनका अख़बार बिकने नहीं दे रहे हो।”  छात्र नेता ने अपने नेता की तरफ़ देखा और बोला, “अगर आपके बारे में कोई ग़लत ख़बर छापेगा तो हम उसको छोड़ेंगे नहीं चाहे उसके लिए भले ही जान देना पड़े।” चंद्रशेखर ने मुस्कराते हुये पीठ थपथपाई और कहा “ठीक है जाओ मैं देख लूँगा।“ वह छात्र नेता कोई और नहीं समाजवादी पार्टी के क़द्दावर नेता ओमप्रकाश थे जो आज भी पूर्वांचल में अपने तरीक़े से  राजनीति करने के लिए मशहूर हैं।

पुछल्ला : शिवसेना फिर अपने तेवर में है। केंद्र सरकार की खिंचाई का कोई अवसर नहीं छोड़ रही है। योग दिवस पर राजयोग का राग समझने में लगे हैं लोग।