बिसात- दिग्गजों से खाली दिखेगी संसद

 16 Jun 2019  676

अजय भट्टाचार्य

करेंट अफेयर्स,(16 जून 2019)- आज से शुरू हो रहे 17वीं लोकसभा के पहले सदन में कई दिग्गज संसद भवन में बहस करते नहीं दिखेंगे। भारी बहुमत से जीतकर सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी के लगभग कालबाह्य हो चुके शीर्षपुरुष लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज, उमा भारती जैसे कई दिग्गज इस बार दिखाई नहीं देंगे।  चार बार राज्यसभा और पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे आडवाणीजी इस वक्त किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। बेशक वह सदन में सबसे ज्यादा हाजिर रहने वाले सदस्यों में गिने जाते रहे हों, लेकिन पिछले 5 सालों में वे बहुत ही कम सदन में बोले हैं। सदन में पहली पंक्ति में बैठने वाले आडवाणी इस बार दिखाई नहीं देंगे। वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी दशकों तक लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे हैं, लेकिन इस बार वह चुनाव न लड़ने के कारण सदन में दिखाई नहीं देंगे। 6 बार सांसद रहीं सुषमा स्वराज 2014 से 2019 के बीच विदेश मंत्री रहने से पहले विपक्ष की नेता और सूचना और प्रसारण मंत्री भी रही हैं तथा संसद में प्रखर वक्ता के रूप में जानी जाती रही हैं। किसी भी सदन की सदस्य न होने के कारण संसद में सुषमा स्वराज दिखाई नहीं देंगी। आठ बार लोकसभा सांसद रहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी इस बार चुनाव न लड़ने के कारण संसद में दिखाई नहीं देंगी। फायर ब्रांड नेता उमा भारती 2014 से 2019 में केंद्र में मंत्री भी रही हैं। उधर लोकसभा में कांग्रेस की आवाज मल्लिकार्जुन खड़गे भी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। लोकसभा में कांग्रेस के नेता के तौर पर प्रखर रहे हैं खड़गे 9 बार विधानसभा और दो बार सांसद रहे हैं। लोकसभा में कांग्रेस की आवाज रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस बार संसद में दिखाई नहीं देंगे। वह अपनी परंपरागत सीट गुना से चुनाव हार गए। करीब 28 साल तक राज्यसभा में कांग्रेस के प्रमुख चेहरे रहे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है और वह कहीं से चुनकर नहीं आए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री होने के नाते अगली पंक्तियों में जगह पाने वाले एचडी देवगौड़ा भी इस बार लोकसभा का चुनाव हारने के कारण संसद में दिखाई नहीं देंगे।

►सवाल ढईया मुख्यमंत्री का

महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में पिछले कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी-शिवसेना युति में आगामी विधान सभा चुनाव बाद जीत की स्थिति में मुख्यमंत्री के चेहरे पर अभी से चर्चा शुरू हो गई है। महाराष्ट्र की राजनीति का अहम ध्रुव शिवसेना के खेमे से खबर आई कि युति की शर्तों के अनुसार अगली सरकार में शिवसेना की ओर से युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। भाजपा की ओर से राज्य के वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार का सीधा जवाब आया कि अगला मुख्यमंत्री भी भाजपा का ही होगा। एक अंग्रेजी दैनिक ने तो दावा किया कि आदित्य ठाकरे मुंबई की किसी आसान जीत की सम्भावना वाली सीट से चुनावी पारी की शुरुआत भी कर सकते हैं। वैसे शिवसेना की परंपरा में अभी तक ठाकरे परिवार सीधे चुनाव मैदान में उतरने से बचता रहा है। अगर आदित्य चुनाव लड़ते हैं तो यह एक नई परंपरा की शुरुआत होगी। युति के सूत्रधार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे में जब बातचीत हुई थि तभी यह तय हुआ था कि यदि 2019 के विधान सभा चुनाव में युति जीतती है तो दोनों पार्टियों का मुख्यमंत्री ढाई-ढाई साल के लिए होगा। अब यह तय करना बाकी है कि पहले किसका मुख्यमंत्री होगा। प्रसंगवश यह जानना भी जरुरी है कि 2014 में जब युति की वार्ता चल रही थी तब भाजपा की ओर से प्रभारी ओम माथुर ने कमान संभाली हुई थी जबकि शिवसेना की ओर से आदित्य ठाकरे सीटों के बंटवारे आदि पर चर्चा के लिए अगुवाई कर रहे थे। उस वार्ता के बाद भाजपा ने इसे माथुर जैसे नेता का अपमान समझा और युति टूट गई। एक बार फिर आदित्य ठाकरे का नाम राज्य के मुखिया की कुर्सी के लिए आगे बढ़ाकर शिवसेना भाजपा को क्या सन्देश देना चाहती है, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी।

►बलात्कारी विधायक ने पीडिता से विवाह रचाया

गुजरात में भाजपा के एक विधायक ने पानी के मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस की एक महिला को पीट दिया और बवाल बढ़ने पर उसी महिला नेता के घर जाकर उससे राखी बंधवा कर मामले को रफा-दफा किया। यह अलग बात है कि इस बार भाई की रक्षा राखी के कारण हुई। लगता है इसी का अनुसरण करते हुए बलात्कार के आरोप का सामना कर रहे विधायक ने सजा से बचने का उपाय खोजा और पीडिता से शादी कर ली। दरअसल त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा नीत गठबंधन में सहयोगी आईपीएफटी के विधायक धनंजय  के खिलाफ गत 20 मई को अगरतला महिला थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए एक महिला ने आरोप लगाया था कि विधायक ने उसके साथ बलात्कार किया और शादी न करके उसे धोखा दिया है। महिला ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि आईपीएफटी के रीमावैली से विधायक के साथ सामाजिक रूप से जुड़ गई। महिला का दावा था कि विधायक ने उसके साथ अंतरंग संबंध बनाए पर बाद में शादी करने से मुकर गया। विधायक पर महिला के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर लिया गया था। त्रिपुरा हाईकोर्ट ने एक जून को विधायक की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। घटना में नया मोड़ गत रविवार को आया जब आरोपी विधायक ने बलात्कार और धोखा देने की शिकायत करने वाली महिला से शादी कर ली । विधायक की ओर से सोमवार को घोषणा की गई, 'हां, मैंने अगरतला के चतुरदास देवता मंदिर में महिला से शादी कर ली है।‘  इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के विधायक धनंजय के वकील अमित देबबर्मा ने कहा कि विधायक का विवाह रविवार को चतुरदास देवता मंदिर में संपन्न हुआ। देबबर्मा ने कहा कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है और अब वे एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराएंगे। नवविवाहिता ढलाई जिले के गंडाचेरा में प्रसन्नतापूर्वक रह रही है।

►करंट नहीं तो ख़ुदकुशी ही सही !

बुलढाणा के मलकापुर क्षेत्र के वडोदा गाँव के एक किसान ने बीते शनिवार को इसलिए आत्महत्या करने की कोशिश की कि उसे बिजली कनेक्शन और मुआवजा नहीं मिला था। घटना गोविंद विष्णु महाजन विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कृषि विकास प्रदर्शनी में हुई। पुलिस तुरंत संबंधित किसान को इलाज के लिए अस्पताल ले गई। कृषि विकास परिषद के तहत, स्थानीय गोविंद विष्णु महाविद्यालय के परिसर में एक राज्य स्तरीय कृषि प्रदर्शनी और कृषि विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन समारोह में मंत्री रणजीत पाटिल संरक्षक मंत्री मदन येरावर, विदर्भ विद्यालय विकास महामंडल के अध्यक्ष और महोत्सव के अध्यक्ष डॉ. चैनसुख संचेती, विधायक आकाश फुंडकर, जिला परिषद अध्यक्ष उमाताई तायडे, भाजपा जिलाध्यक्ष धृप्रतराव सावले उपस्थित थे। जब यह कार्यक्रम चल रहा था, मलकापुर तालुका के वड़ोदा गाँव के ईश्वर सुपाराह खरेट नामक किसान ने बैग से जहर की एक बोतल ली और उसे मुँह में डाल लिया। उस समय पुलिस ने उसे बाहर निकाला और पकड़ लिया। पुलिस ने संबंधित किसानों को उप-जिला अस्पताल में तत्काल इलाज के लिए भर्ती किया। वर्तमान में, किसान का इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है। इस किसान के परिवार को 38 साल से बिजली कनेक्शन नहीं मिला है। यह किसान राज्य बिजली विभाग के कुशासन के कारण तीन पीढ़ियों से बिजली का इंतजार कर रहा है। यह घटना केंद्र सरकार की पिछले साल की गई उस घोषणा के मुंह पर तमाचा है जिसमें देश के हर गाँव और गाँववासियों को बिजली उपलब्ध कराने की गर्वोक्ति की गई थी।

►सावधान! हिंदुत्व खतरे में है !!

इन दिनों पश्चिम बंगाल से बड़ा कोई मुद्दा मीडिया विशेषकर इलेक्टोनिक मीडिया के लिए नहीं है। इसलिए वर्तमान में डाक्टरों की हड़ताल के बहाने मीडिया को हुई रतौंधी का कोई इलाज ईजाद करने की जरुरत भी नहीं है। बिहार में जापानी बुखार से मर रहे बच्चों की संख्या 75 से पार हो चुकी है मगर मजाल है किसी चैनल पर इस मुद्दे पर कोई बहस देखने-सुनने को मिले। डाक्टरों का संगठन अपने एक साथी की बंगाल में हुई पिटाई से घोर रोष में है और उससे भी ज्यादा रोष में वह मीडिया है जिसे बंगाल में अराजकता चरम पर नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश में पिछले पखवाड़े का कोई ऐसा दिन नहीं बीता है जब कहीं न कहीं हत्या, अपहरण, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध न हुए हों, मगर भोंपू चैनल मौन हैं। अलीगढ़ घटना हिन्दू-मुस्लिम कलेवर के साथ जरुर पेश की गई है। गुजरात में सात सफाई मजदूर नाले की सफाई करते समय गैस का शिकार हो जीवन हार गये, कहीं कोई खबर नहीं। बंगाल तब तक सुलगना चाहिये जब तक वहां चुनाव न हो जायें। और आप कहते हो कि मीडिया निष्पक्ष है? मजाक बना रखा है।

पुछल्ला : राहुल गाँधी को चाहिये कांग्रेस की अध्यक्षता के लिए टेंडर जारी करें, पार्टी में तो कोई मिलने से रहा।