बिसात-  कांग्रेस उम्मीदवार पर मेहरबान योगी!

 20 May 2019  514

करेंट अफेयर्स, (20 मई 2019)-आखिरी चरण का मतदान हो चुका है और विभिन्न दृश्य श्रव्य प्रसार माध्यमों पर संभावित लोकसभा की तस्वीर भी पेश की जा चुकी है। 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में हिंदुत्व की दूसरी बड़ी प्रयोगशाला के रूप में उभरे पश्चिम बंगाल पर सबकी निगाहें टिकी हैं। पिछले सप्ताह बंगाल की जमीन पर कई तरह के प्रयोग वोटों की राजनीति में किये गए हैं और इनका परिणाम 23 मई को ही पता चलेगा। भाजपा पूरी कोशिश में है कि बंगाल में उसकी सीटें बढ़ें। मगर मुर्शिदाबाद की भाजपा इकाई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खासी नाराज है। योगी बीते सोमवार को चुनाव प्रचार के सिलिसले में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में थे। एक अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ में छपी खबर के मुताबिक, स्थानीय भाजपा  नेताओं का एक धड़ा योगी के भाषण से नाराज दिखा।  योगी ने अपने भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर तो निशाना साधा, लेकिन बेहरामपुर से कांग्रेस प्रत्याशी अधीर चौधरी पर कोई जुबानी हमला नहीं किया। बेहरामपुर के यूनियन क्लब ग्राउंड पर करीब 1000 लोगों की भीड़ थी। अपने 25 मिनट के भाषण में योगी ने सिर्फ एक बार अधीर चौधरी का जिक्र किया। माना जाता है कि कभी गोरखपुर के सांसद रहे योगी और चौधरी के बीच लोकसभा में साथ रहने के वक्त से अच्छे रिश्ते हैं। जिले के कई भाजपा नेता बेहद खिन्न नजर आए। उन्हें उम्मीद थी कि योगी बेहरामपुर के इस ताकतवर प्रत्याशी पर भी सियासी हमला करेंगे। जिला स्तर के एक भाजपा नेता ने कहा, ‘उन्होंने राहुल और ममता पर बेहद तीखा हमला बार-बार किया। यह बढ़िया है। हालांकि, यहां लड़ाई अधीर और उनके लोगों से पूरे जिले में है। योगी जी की वजह से निराशा हुई।’ बता दें कि यहां भाजपा ने साधु से राजनेता बने कृष्णा जोवारदार आर्या को अधीर के खिलाफ मैदान में उतारा है। आर्या बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष के परिवार से जुड़े पंडित रहे हैं। ममता यह बार-बार आरोप लगाती रही हैं कि चौधरी को आरएसएस का समर्थन है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि योगी ने ममता को आरोपों को एक बार फिर सही साबित किया। दूसरी तरफ  चौधरी ने कहा कि वह इन आरोपों को प्रतिक्रिया देने लायक भी नहीं समझते हैं।

►वाराणसी की रस्साकशी 
बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी अर्थात वाराणसी से दुबारा चुने जाने के प्रति आश्वस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए किस स्तर पर सरकारी मशीनरी सक्रिय रही इस सन्दर्भ में सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान तेज बहादुर सहित तमाम उम्मीदवारों के पर्चे ख़ारिज होना महज संयोग नहीं है। इनमें तेलंगाना के कुछ किसानों ने भी वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिनमें से अधिकतर किसानों का नामांकन रद्द हो गया। लेकिन हल्दी उगाने वाले सुनापू इश्तारी उम्मीदवार बनने में कामयाब रहे। इसके बावजूद 74 साल के सुनापू अब तेलंगाना के निजामाबाद लौट चुके हैं और बेहद ‘उदास’ हैं। बकौल सुनापू निजामाबाद के हल्दी किसान नरेंद्र मोदी का विरोध नहीं करना चाहते थे बल्कि हल्दी बोर्ड बनाने की मांग की ओर ध्यान खींचना चाहते थे। वे चाहते थे कि मोदी इस बारे में जानें। लेकिन लोगों ने इसे दूसरे तरीके से ले लिया।
निजामाबाद से 54 किसान वाराणसी में चुनाव लड़ने पहुंचे थे। सुनापू निरक्षर हैं और येरगातला गांव के रहने वाले हैं। उनके परिवार के पास 5 एकड़ जमीन है, जो हल्दी और धान की खेती करता है। सुनापू को वाराणसी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने उनको सहयोग नहीं दिया। या तो वे देर से आए या उन्होंने सुनापू का नामांकन स्वीकार करने में देरी की और बाद में कई सवाल भी उठाए। बैंकों में अधिकारियों ने जमा की गई (गारंटी) रकम की रसीद देने में देरी की। पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने हर जगह पीछा किया। सुनापू ने खबरों में कहा है कि सरकारी अफसरों ने हमारे कमरों तक की तलाशी ली और हमें धमकाया। स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी हमें मोदी के खिलाफ चुनाव न लड़ने के लिए  धमकाया। तेज बहादुर के नामांकन को रद्द करने के लिए खामी ढूंढने में प्रशासन को 42 घंटे लग गए। यह रहस्योद्घाटन एक निजी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में उजागर हुआ है। इस सीट से लगभग अजेय माने जा रहे मोदी इस बार कितने मतों के अंतर से जीतते हैं यह भी देखने योग्य होगा।

►चुनाव में पकौड़ा लूट 
जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पकौड़ों को रोजगार से जोड़ा है, पकौड़ों की चर्चा किसी न किसी बहाने होती रहती है। पिछले मंगलवार को चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री की रैली में विरोध करने उतरे कुछ छात्र काले रंग के ग्रेजुएशन रोब्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के पास में "मोदी पकोड़े" बेच रहे थे, जिसके बाद सभी 12 छात्रों को गिरफ्तार कर प्रधानमंत्री की रैली खत्म होने के बाद रिहा कर दिया गया था| इस पकौड़ा ब्रांड विरोध करने वाले छात्रों का कहना था कि हम 'पकौड़ा योजना' के तहत नए रोजगार देने के लिए पीएम मोदी का स्वागत करने आए थे| हम पीएम मोदी की रैली में पकौड़े बेचना चाहते थे जिससे यह जान सकें कि, पढ़े लिखे युवाओं के लिए पकौड़े बेचना कितना महान और मेहनत का काम है| उनका आरोप था क उनके पकौड़े पुलिस ने लूट लिए| चलिए यह तो विरोध प्रदर्शन की रोकथाम में हुयी पकौड़ा लूट थी लेकिन पंजाब की फिरोजपुर लोकसभा क्षेत्र में अकाली दल की ओर से आयोजित रैली में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब भीड़ होने से चाय-पकौड़े कम पड़ गए. इस दौरान पकौड़ों की लूट मच गई. इस रैली में कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय लोगों के लिए चाय और पकौड़ों की व्यवस्था की गई थी| सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में अकाली दल के कार्यकर्ता सिर पर पकौड़ों की परात और टोकरे ले जाते हुए दिखाई दिए| हंगामा उस वक्त हुआ, जब भाषण सुन रहे कार्यकर्ताओं ने पकौड़े लेने की कोशिश की और परात गिर गई| बस फिर क्या था कि सभी पकौड़े लेने के लिए टूट पड़े| दरअसल, फिरोजपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी सुखबीर सिंह बादल के पक्ष में फिरोजपुर के गांव हस्ताकला में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की जनसभा थी| इस रैली में आए सभी लोगों के लिए पकौड़ों की व्यवस्था थी| 

►इस नामाफी का मतलब ?
भोपाल से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के नथूराम गोडसे संबंधित बयान को प्रधानमंत्री  मोदी इतने नाराज हैं कि उन्होनें साफ़ कह दिया है कि भले ही कोई साध्वी को माफ़ कर दे मगर मैं उनको मन से कभी भी माफ़ नहीं करूंगा| दरअसल राजननीतिक दृष्टि से इसके दो अर्थ निकाले जा सकते हैं| पहला यह कि यदि साध्वी भोपाल से सांसद चुन ली जाती है तो उनके पार्टी में बने रहने के लिए गुंजाईश रहे और आलाकमान उनको माफ़ करते हुए पार्टी में बने रहने दे| दूसरा यह कि यदि साध्वी हार जाती हैं तो चुनाव बाद पार्टी उनसे तुरंत किनारा कर ले| क्योंकि भले किसी न किसी बहाने पार्टी गांधीजी को आलोचना के लिए उपयुक्त मानती हो लेकिन पार्टी यह भी जानती है कि बापू को भारतीय राजनीति से ख़ारिज करना आसान नहीं है| वैसे भोपाल से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि इस बार जीत-हार का अंतर डेढ़ से दो लाख मतों का होगा| जीतेगा कौन? यह तो ईवीएम ही तय करेगी|
पुछल्ला- वीतरागी भगवान शिव ने गुफा में माँ पार्वती को अमरकथा सुनाई थी जिसे कबूतर के एक जोड़े ने भी सुन लिया था| अगर एएनआई का कैमरा न होता तो मोदीजी की केदार गुफा साधना का पता कैसे चलता? वहां कबूतर तो थे नहीं|