बिसात- भदोही का दंगल
12 May 2019
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अजय भट्टाचार्य
करेंट अफेयर्स, (12 मई 2019)- उत्तर प्रदेश के भदोही लोकसभा सीट पर इस बार गजब के समीकरण बन बिगड़ रहे हैं। भदोही संसदीय सीट पर ताल ठोक रहे बसपा-सपा गठबंधन से रंगनाथ मिश्र और भाजपा के प्रत्याशी रमेशचंद्र बिंद के बीच तीसरी फ़ांस कांग्रेस के रमाकांत यादव हैं। बिंद पहले बसपा में थे और आरोप है कि उन्होंने ब्राह्मणों को एक मीटिंग में अपशब्द कहे। जाहिर है ब्राह्मण समाज नाराज हुआ। प्रतिक्रियाओं से घबराकर भाजपा के रणनीतिकारों ने मोर्चा संभाला और खुद बिंद ने बयान दिया कि उनके लिए ब्राह्मण सदैव पूज्य रहे हैं। लोग फालतू की अफवाह फैला रहे हैं। चूँकि गठबंधन ने रंगनाथ मिश्रा को मैदान में उतारा है इसलिए स्वाभिमान के नाम पर ब्राह्मण मतदाता कहीं बिदककर गठबंधन को फायदा न पहुंचा दे इसलिए ज्ञानपुर के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को पटाया गया और विजय मिश्रा ने बिंद के समर्थन में बयान भी जारी कर दिया। बात अचानक तब बिगड़ी जब पिछले रविवार यानि 5 मई को भदोही के पूर्वी सिरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विजय संकल्प रैली में मोदी ने स्थानीय देव स्थलों के साथ स्वतंत्रता सेनानी बाबू झूरी सिंह और शीतल पाल को याद किया। तमाम मुद्दों सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा आदि की चर्चा हुई पर भदोही के भाजपा उम्मीदवार का नाम तक नहीं लिया गया। रैली के लिए मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी, प्रयागराज से भीड़ भी जुटा ली गई लेकिन विधायक विजय मिश्रा को रैली में आने का न्योता तक न मिला। नतीजा यह हुआ विधायक महोदय के एक समर्थक की फेसबुक वाल पर एक टिप्पणी उसी शाम को नमूदार हुई। स्थानीय लोगों का सवाल था कि यह पोस्ट भाजपा के औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर ही बता सकते हैं कि वायरल पोस्ट भाजपा की तरफ से है या विधायक विजय मिश्रा के या समर्थकों के क्योंकि बारंबर ज्ञानपुर की जनता हैट्रिक पार ज्ञानपुर विधायक का अपमान नहीं सहेगी। लिखा था- शनिवार को हमने आप लोगों की उपस्थिति में भाजपा के प्रति समर्थन घोषित कर दिया। आज मोदीजी की सभा में कोई भाजपा संगठन या शीर्ष नेता आपके ज्ञानपुर विधायक को बुलाया भी नहीं पहले भी राष्ट्रपति और बाद में राज्यसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी को वोट दिया जिसके कारण निषाद पार्टी से निलबित हूँ। बताते हैं की फिर भाजपाई सक्रिय हुए और मिश्रा की नाराजगी दूर कर दी। खतरा अभी भी यही बना हुआ है कि यहाँ हुए मतदान में ब्राह्मण मत किसे मिले। दिलचस्प यह भी है कि सपा में पारंपरिक यादव मतों में सेंध लगाने के मकसद से कांग्रेस ने रमाकांत यादव को आयात तो कर लिया लेकिन पार्टी कैडर में रमाकांत को लेकर उपजी अपचन 10 मई को तब सामने आ गई जब पार्टी उम्मीदवार के प्रचार के लिए प्रियंका गाँधी की रैली में कांग्रेस जिलाध्यक्ष नीलम मिश्रा को बुलाया तक नहीं गया। जब नीलम ने इसकी शिकायत प्रियंका से की तो उचित उत्तर नहीं मिला। नतीजतन शनिवार को उन्होंने कांग्रेस से राम-राम कर ली और रंगनाथ मिश्रा को समर्थन देने की घोषणा कर दी। यदि इस सब घटनाक्रमों का निचोड़ निकाला जाये तो भदोही का चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होगा।
►अपने-अपने औरंगजेब
वाराणसी में कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उनकी तुलना मुग़ल शासक औरंगजेब से कर दी। सभी जानते हैं कि धार्मिक कट्टरता के चलते औरंगजेब को कई हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करने का जिम्मेदार माना जाता है। मोदी की महत्वाकांक्षी काशी विश्वनाथ कारीडोर योजना को साकार करने के लिए रास्ते में पड़ने वाले सैकड़ों मंदिर प्रशासन ने ध्वस्त किये हैं। इसी सन्दर्भ में निरुपम ने मोदी को औरंगजेब बता दिया। लेकिन भाजपा की नजर में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव औरंगजेब हैं क्योंकि अखिलेश ने जबरन पिता द्वारा स्थापित पार्टी पर कब्ज़ा कर लिया है। योगी आदित्यनाथ अपने सार्वजनिक संबोधन में यह बात कहते रहे हैं। ताजा बयान नरेश अग्रवाल का है जो कभी सपा में थे और इन दिनों भाजपा में आकर राष्ट्रवादी हो गए हैं।
►आये थे हरि भजन को.......
भोपाल में कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी क्रमश: दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर में खुद को आला हिन्दू साबित करने की होड़ का नजारा देखने लायक है। दिग्विजय के समर्थन में पायलट बाबा ने तंत्र-मंत्र, यज्ञ, हठयोग आदि तमाम लीला कर डाली। पायलट बाबा कभी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में राज्यमंत्री दर्जा पाने वाले संतों में शामिल थे। पिछले साल विधान सभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा से छिटक कर कांग्रेस से चिपक गए। तो दिग्विजय के समर्थन में किये गए उनके कर्मकांड में पूरे देश भर से सात हजार साधु संत इकट्ठे हुए थे। संतों को यह नहीं बताया गया था इस तंत्र मंत्र अनुष्ठान का हेतु क्या था? जब उन्हें मालूम पड़ा कि यह दिग्गी राजा के लिए है तो कुछ साधु नाराज भी हुए लेकिन सवाल दक्षिणा का था सो सभी पायलट बाबा के साथ रहे, रोड शो किया। एक साधु की प्रतिक्रिया थी- “आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।“ बाकी आप खुद समझ सकते हैं।
►कुंडली दोष
किसी ज्योतिषी के साथ इससे बुरा और क्या हो सकता है कि वह एक पखवाड़े बाद क्या होने जा रहा है, उसकी ज्योतिषीय गणना करके परिणाम भी सार्वजनिक कर दे और अपनी खुद की कुंडली से अनिभिज्ञ रहे। उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय में ज्योतिर्विज्ञान अध्ययनशाला के प्रमुख ज्योतिषाचार्य राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने भाजपा को अपने दम पर 300 सीटें जीतने की भविष्यवाणी करते हुए अपने फेसबुक पेज पर भी प्रकाशित कर दिया। बस, शास्त्री जी के कुण्डली में बैठे राहु-केतु ने खेल दिखाया और कमलनाथ सरकार ने उन्हें लोकसभा चुनावों की आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया। अब भाजपा भले इस भविष्य वाणी को लेकर खुश हो लेकिन शास्त्रीजी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किसकी कुंडली में दोष है।
►चच्चा दे न दें गच्चा
बिहार के चुनाव में मोदी से भी बड़ा कारक नीतीश कुमार हैं। राजद के साथ पिछले चुनाव में जीतकर सत्ता तक पहुँचने के बाद भाजपा की गोद में बैठे नीतीश कुमार को राजद के युवा नेता तेजस्वी यादव पलटू चच्चा कहकर बुलाते हैं। बिहार में मतदाता की नजर में मोदी उपलब्धि के नाम पर शून्य हैं जबकि नीतीश कुमार के खाते में क़ानून व्यवस्था, बिजली और सड़क तीन महत्वपूर्ण तत्व हैं। लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा गोल हैं, फिर भी विकल्प के तौर पर कमजोर तेजस्वी हैं, इसलिए नीतीश के साथ चलना आम मतदाता की मजबूरी है। जानकार मानते हैं कि नीतीश स्वयं चुनाव में भले ही भाजपा के साथ नजर आ रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद यानी 23 मई के बाद वह सिर्फ अपने साथ होंगे। मतलब जहां उन्हें ज्यादा फ़ायदा दिखेगा उस तरफ वे भी दिखाई पड़ेंगे।
पुछल्ला : प्रयागराज (इलाहाबाद) का भरैचा गांव का राम नरेश परिवार संगम नगरी का सबसे बड़ा परिवार माना जाता है। इस परिवार के सबसे बुजुर्ग शख्स राम नरेश 98 साल के हैं। उनके परिवार में 82 सदस्य हैं, जिसमें 66 लोगों ने इस बार वोट डाले। वहाँ छठे चरण का मतदान कल ही हुआ है।