लोकसभा चुनाव 2019- शाप, साध्वी और भोपाल

 21 Apr 2019  612

अजय भट्टाचार्य

करेंट अफेयर्स, (21 अप्रैल 2019)- भोपाल  लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी ने मालेगांव बम धमाकों की आरोपी और फ़िलहाल जमानत पर रिहा साध्वी प्रज्ञा ठाकुर उम्मीदवार बनाकर इस लोकसभा सीट के चुनाव का रोमांच बढ़ा दिया है। यह अलग बात है कि इससे पहले साध्वी  ने कभी भोपाल के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद नहीं की है,  अब कट्टर हिंदूत्व के बलबूते अपनी राजनीति का आरम्भ कर रही है। साध्वी ने हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश के तहत अपने ऊपर पुलिस हिरासत में हुई ज्यादती का जिक्र करते-करते यह भी कह दिया कि उनके शाप के कारण ही इस मामले के जाँच प्रमुख हेमंत करकरे आतंकवादियों के हाथों मौत का शिकार हुए। जब इस बयान की हर तरफ निंदा हुयी तब सबसे पहले भाजपा ने साध्वी के बयान से किनारा किया और मामला फंसता देख साध्वी ने अपना बयान वापस भी ले लिया।
पुलिसिया जुल्म की जो कहानी साध्वी ने पेश की है उसे मुंबई उच्च न्यायालय और देश की शीर्ष अदालत पहले ही ठुकरा चुकी है। इस सन्दर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आर. एस. खैरे के नेतृत्व में एक समिति गठित की थी जिसमें सीआईडी अधिकारी जे. एम. कुलकर्णी, सतर्कता समिति सदस्य रश्मि जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। 2015 में इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में साध्वी पर किसी भी प्रकार की शारीरिक यातना की बात से इंकार किया गया है। यहाँ तक कि 2008 में दो अलग-अलग अस्पतालों में साध्वी की जाँच की गई थी लेकिन उनके शरीर पर किसी भी तरह की मारपीट के निशान नहीं पाए गये थे। इसके बाद अदालत में पेश हुई साध्वी ने भी इस विषय पर चुप्पी साध ली थी।   
साध्वी प्रज्ञा के बारे में एक बड़ा सच यह है कि हत्या के एक मामले में उनकी पहली गिरफ्तारी कांग्रेस नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में  भाजपा शासन में हुई थी। तब राज्य के मुख्यमंत्री थे शिवराज सिंह चौहान और मामला था राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी की हत्या का।  सुनील जोशी की इंदौर के पास देवास में हुई हत्या का आरोप साध्वी प्रज्ञा समेत 8 लोगों पर लगा था। साध्वी को को गिरफ्तार किया गया था। राजनीति की विवशता देखिये कि अब शिवराज सिंह साध्वी प्रज्ञा के लिए कह रहे हैं कि ‘उनका जन्म देश को सुरक्षित रखने के लिए हुआ है।‘ महत्वपूर्ण यह भी है कि जोशी मामले में साध्वी ने किसे शाप दिया था? भोपाल सीहोर लोकसभा सीट में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का मुकाबला कांग्रेस के दिग्विजय सिंह उर्फ़ दिग्गी राजा से है, जो नर्मदा परिक्रमा करके खुद के हिंदूत्व को पिछले तीन वर्षों में मजबूत करते नजर आएं है। उन्होंने जबलपुर में विद्यासागर महाराज, झोतेश्वर में स्वरूपानंद सरस्वती, रायसेन में दरगाह में हाजरी लगाकर एक साथ हिंदू, मुस्लिम और जैन धर्म के धर्म गुरु और धार्मिक स्थलों पर माथा टेका है। भोपाल क्षेत्र के मंदिर मंदिर सर नवाते दिग्गी राजा ने खुद की हिंदू विरोधी छवि को धो दिया है। भोपाल में अधिकतर  ब्राह्मण और कायस्थ समाज के सांसदों को चुनकर ही संसद भेजता है।  इस बार मुकाबला दो ठाकुरों के बीच है, भोपाल में मुद्दा विकास से इतर मेरा प्रत्याशी बड़ा हिंदू तक सिमटता दिख रहा है। दोनों नेता बाहरी हैं। दिग्गी राजा जहां 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार मैदान में हैं वहीं प्रज्ञा ठाकुर का यह पहला चुनाव है।  एक राजनीतिक पुनर्वापसी की उम्मीद लेकर चुनाव में है तो दूसरी राजनीति में पांव जमाने भाजपा की सुरक्षित सीट से उतरी है। इस रोमांचक मुकाबले से एक बात तो पक्की है भोपाल से एक अच्छा वक्ता संसद जाने वाला है, जिसे सुनकर लोकसभा में सभी मेजे पीटेंगे, अब वह राजा होंगे या साध्वी यह 23 मई को ही पता चलेगा, लेकिन दोनों दलों का एजेंडा अभी आतंकवादी और मिस्टर बंटाधार तक ही सीमित दिख रहा है।

►बदजुबानी जिंदाबाद 
बदजुबानी की होड़ में आजमखान, मेनका गाँधी, योगी आदित्यनाथ, सतपालसिंह सत्ती की कड़ी में बक्सर संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे कलेक्टर का भी बुखार उतारने की घोषणा कर खबरों में छा गये हैं। चौबे शनिवार बक्सर सदर प्रखंड के मंझरिया गांव पहुंचे, जहां जनता के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, जब जनता ने अश्विनी कुमार चौबे से 5 साल का हिसाब मांगा तो वे तिलमिला गए और उन्होंने विकास नहीं होने का ठीकरा जिले के कलेक्टर के माथे पर फोड़ दिया और कहा कि कलेक्टर का बुखार उतारना भी अश्विनी कुमार चौबे जानता है। जाहिर है चुनाव जीतने के बाद नेता 5 साल तक जनता के प्रतिनिधि और सेवक के रूप में काम करते हैं । इस दौरान जब जनता उनसे असंतुष्ट होती है तो उनके कार्यों का हिसाब भी मांगती है। बहरहाल, जब चुनाव सर पर है ऐसे में जनता को सवाल पूछने का हक भी है और उनका काम भी। ऐसे में अगर जनप्रतिनिधि उनके सवालों का जवाब देने के बजाय तिलमिला जाए और विवादित बयान देने लगे तो ऐसे जनप्रतिनिधियों को क्या कहा जाए। 

►मांगी नौकरी मिली हथकड़ी 
लोकसभा चुनाव के दौरान अपने नेताओं से संभलकर सवाल करें। इन दिनों लोकसभा चुनाव के लिए जगह-जगह प्रचार चल रहा है। गोवा में भी चुनाव प्रचार हो रहा है। गोवा उत्तर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के श्रीपद नाईक उम्मीदवार हैं। उनके समर्थन में 18 अप्रैल की शाम वालपोई निर्वाचन क्षेत्र में एक मीटिंग हो रही थी। इस बैठक को संबोधित करने के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे भी पहुंचे हुए थे। बैठक के दौरान सभी लोग अपनी-अपनी बात कह रहे थे।  इसी दौरान राणे से दर्शन गांवकर नामक एक युवक ने अचानक सवाल कर लिया।  दर्शन ने राणे से पूछा कि वो 10 साल से उनका साथ देता आ रहा है। फिर भी उसे नौकरी क्यों नहीं मिली? इसके बाद माहौल में गर्मा-गर्मी हो गई और दर्शन को पुलिस ने धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर बाद में उसे जमानत दे दी गई। पिछले 10 साल से वह मंत्री का साथ देता आया है और उनके लिए काम किया है। दर्शन ने दावा किया कि राणे ने नौकरी दिलवाने का वादा किया था। इसी बारे में मैं उनसे पूछ रहा था, लेकिन बैठक खत्म होते ही मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के बारे में राणे के करीबियों का कहना है कि यह विपक्ष की साजिश थी।  


►कचनार की पीड़ा 
प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी को टोक्यो बनाया या नहीं इस प्रश्न से अलग कचनार गाँव के लोग अब भी अपनी फसल के मुआवजे के इंतजार में हैं। पिछले वर्ष 14 जुलाई को प्रधान सेवक की एक रैली के लिए 10 एकड़ जमीन में खड़ी फसल को काट कर मैदान बना दिया गया था। तीन हेलीपैड बनाये गए थे। तब किसानों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी फसल का मुआवजा दिया जायेगा। सात किसानों की इस जमीन पर हजारों लोगों के बैठने, भाषण मंच, पार्किंग आदि की व्यवस्था की गई थी। अब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला है और अब तो चुनाव चल रहे हैं, मुआवजा देने की किसे फ़िक्र है? एक किसान की जमीन पर तो चार ट्रक बालू डाली गयी थी जिसे वापस खेती योग्य बनाने के लिए उसे इस बार तीन गुना ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

 ►कांग्रेस के भितरघाती 
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व मुंबई में चुनाव पर्यवेक्षक आशीष दुआ शुक्रवार को उत्तर पश्चिम मुंबई लोकसभा क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार संजय निरुपम की जीत-हार की संभावनाओं को टटोल रहे थे। दिंडोशी हाईवे पर दाढ़ीवाले नेताजी के यहाँ चर्चा चल रही थी। खबर है कि शिवसेना में डुबकी लगाकर वापस कांग्रेस के घाट पर जप करने पहुंचे एक पूर्व नगरसेवक तथा एक स्कूल संचालक नेता की निष्ठा पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने शंका जाहिर की। उनका कहना था कि पूर्व नगरसेवक और स्कूल संचालक भीतरी तौर पर शिवसेना के लिए काम कर रहे हैं। वैसे खबर यह भी है कि वार्ड स्तरीय पदाधिकारी खर्च की रकम लेकर भूमिगत हो गये हैं और हालत यह है कि दिंडोशी विधान सभा क्षेत्र में कांग्रेस के जो भी चुनावी कार्यालय खोले गये हैं, कार्यकर्ताओं को चाय भी नहीं मिल रही है। 

पुछल्ला-मिलिंद देवरा के समर्थन में मुकेश अम्बानी के बयान को सट्टा बाजार बड़े स्तर पर राजनीतिक बदलाव का पूर्वानुमान मान रहा है।