बिसात- पूजा आउट, अन्ना इन
14 Apr 2019
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अजय भट्टाचार्य
करेंट अफेयर्स, (14 अप्रैल 2019)- उन्नाव लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने पहले पूजा पाल को प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन नामांकन की तिथि आते-आते उम्मीदवार बदल दिया गया। पार्टी आलाकमान ने उनकी जगह अरुण शंकर शुक्ल उर्फ अन्ना महाराज को अपना उम्मीदवार घोषित किया। अन्ना 2014 में भी सपा की टिकट पर मैदान में उतरे थे किंतु मोदी लहर के चलते साक्षी महाराज के सामने टिक नहीं सके। अब सवाल यह है कि पूजा पाल का पत्ता क्यों कटा? कुछ लोग बताते हैं की सपा का उन्नाव जिला संगठन को मंजूर नहीं था पूजा पाल बतौर प्रत्याशी मंजूर नहीं थीं। लेकिन एक सत्य यह है कि खुद पूजा पाल के कारण ही सपा को उनकी उम्मीदवारी वापस लेकर अन्ना को देनी पड़ी। क्यों? इस क्यों का उत्तर जानने के लिए हमको 15 साल पहले इलाहाबाद पश्चिम शहर विधान सभा उपचुनाव में झांकना होगा। 2004 के लोकसभा चुनाव में मुलायम की समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद की फूलपुर सीट से शहर पश्चिमी के बाहुबली विधायक अतीक अहमद को टिकट दिया। देश के पहले पीएम पंडित नेहरू का चुनाव क्षेत्र रहे फूलपुर सीट से अतीक वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे। सांसद बनने के बाद उन्होंने विधायकी से इस्तीफ़ा दे दिया और अपनी जगह छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ़ अशरफ को सपा का टिकट दिला दिया। जून 2004 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा ने राजू पाल को अपना उम्मीदवार बना दिया। टिकट पाने से पहले राजू पाल का किसी ने नाम भी नहीं सुना था। बहरहाल तकदीर ने उस चुनाव में राजू पाल का साथ दिया और वह अतीक अहमद के दबदबे को ख़त्म करते हुए पहली बार बीएसपी को यह सीट जिताने में कामयाब रहे। विधायक बनने के बाद राजू पाल अपने सियासी दुश्मनो के निशाने पर आ गए। उन पर दो बार जानलेवा हमला भी किया गया। विधायक बनने के सात महीने बाद विधायक राजू पाल ने 16 जनवरी साल 2005 को घर के नजदीक मंदिर में ही सादगी के साथ अपनी प्रेमिका पूजा से ब्याह रचा लिया। नौ दिन बाद 25 जनवरी को शहर से घर वापस लौटते वक्त विधायक राजू पाल पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया। राजू पाल के क़त्ल से फिर एक बार खाली हुई इस सीट पर साल 2005 में फिर से हुए उपचुनाव में सपा ने दोबारा अतीक के भाई अशरफ पर दांव लगाया, जबकि मायावती ने राजू पाल की विधवा पूजा पाल को उम्मीदवार बनाया। पूजा पाल यह उपचुनाव हार गईं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो सियासत से नाता तोडा और न ही बसपा का दामन छोड़ा। साल 2007 में बीएसपी ने इसी सीट से उन्हें फिर टिकट दिया और मायावती लहर में वह विधायक बन गईं। पूजा पाल ने 2007 में अतीक के भाई अशरफ को हराया तो 2012 के चुनाव में उन्होंने इकहत्तर हजार वोट पाकर सीधे अतीक अहमद को मात दी। दस साल विधायक रही पूजा का इस बीच हरदोई के मल्लावां विधानसभा क्षेत्र के बसपा विधाय बृजेश वर्मा से नजदीकी बढ़ी और अपुष्ट समाचारों के अनुसार दोनों ने कोर्ट मैरिज भी कर ली थी। पूजा पाल को समस्या इस बात की आ रही थी पूजा पाल अपने पति का नाम राजू पाल के नाम से पर्चा दाखिल करना चाहती थी परंतु बृजेश वर्मा से इन्होंने शादी किया था वह यह कह रहा था कि मेरे नाम से पर्चा दाखिल होगा इसी के कारण इनका टिकट कट गया। मजा यह है कि 6 अप्रैल को पूजा ने कार्यालय भी खोल दिया था। एक साल पहले पूजा बसपा से निकाली जा चुकी है।
►वायनाड में चार गांधी
किसी लोकप्रिय उम्मीदवार को हराने अथवा उसके मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए उससे मिलते जुलते प्रत्याशी उतारने की रणनीति रही है। केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के सामने तीन गाँधी और चुनाव लड़ रहे हैं। 3 अप्रैल को राहुल गांधी ने वायनाड में जैसे ही अपना नामांकन पत्र दाखिल किया उसके कुछ ही घंटे बाद कोट्टायम के एरुमेली गाँव निवासी लोकसंगीत शोधकर्ता राहुल गांधी केई (33) ने भी एक निर्दलीय उम्मीदवार तौर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके छोटे भाई का नाम राजीव गांधी केई है जो कि एक माकपा समर्थक है। इनके पिता दिंवगत कुंजुमोन एक कांग्रेसी थे और गांधी परिवार के प्रशंसकों में शामिल थे। इसके अलावा वायनाड से राघुल गांधी भी चुनावी मैदान में हैं। 30 वर्षीय राघुल तमिलनाडु के कोयम्बटूर से हैं। वह एआईएमके उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पिता कृष्णन पी एक स्थानीय कांग्रेस नेता थे जो कि बाद में अन्नाद्रमुक पार्टी में चले गए थे। पिता ने उनका नाम राघुल गांधी रखा था। उनकी बहन का इंदिरा प्रियदर्शिनी रखा गया था जो कि इंदिरा गाँधी का नाम था। बकौल राघुल ये उनका तीसरा चुनाव है। इससे पहले 2016 में उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान कोयम्बटूर में सिंगनल्लूर सीट से चुनाव लड़ा था और 2014 में उन्होंने कोयंबटूर में निकाय का चुनाव भी लड़ा था। वायनाड सीट से केएम शिवप्रसाद गांधी भी चुनाव लड़ रहे हैं। 40 वर्षीय शिवप्रसाद त्रिशूर के रहने वाले हैं और पेशे से एक संस्कृत शिक्षक हैं। वे भारतीय गांधीवादी पार्टी (केरल में एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पिता केके मुकुंदन कांग्रेस कार्यकर्ता थे। तीन साल पहले ही वे भारतीय गांधीवादी पार्टी में शामिल हुये और इसके बाद उन्होंने उपनाम गांधी को अपने नाम में जोड़ने का फैसला किया।
►सीधे सादे नेताजी
चुनाव के समय हर उम्मीदवार इतना विनम्र होना और दिखना चाहता है मानो शांति सद्भावना का नोबल पुरस्कार उसे ही मिलने वाला हो। फिर चाहे खेत में कड़ी फसल काटती हेमा मालिनी हों या केले के पत्ते पर भोजन परोसकर पेट भरते संबित पात्रा। विनम्रता और सादगी टपकी पड़ रही है। इसीलिए उत्तर मुंबई में कांग्रेस प्रत्याशी वडा पाव खाते हुए नजर आ रही हैं तो उत्तर-पश्चिम मुंबई में कांग्रेस प्रत्याशी और मुंबई कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष संजय निरुपम भला पीछे क्यों रहें। दिन भर एसी गाड़ी में सवार हो आँखों पर काला चश्मा पहने मतदाताओं की चौखट की धूल छान रहे नेताजी ने अपनी सादगी दिखाने के लिए घर जाने के लिए रिक्शे की सवारी की और समर्थकों ने फोटो खींच कर बड़ी सादगी से वायरल भी कर दी।
►मंदिर में भगवान मोदी
चौकीदार अवतार से पहले प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के अधिकांश प्रशंसक भक्त के रूप में जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह नगर पंचायत में एक दुर्गा मदिर को ही मोदी का मंदिर बना दिया गया है। गांव वालों ने मोदी को भगवान मान लिया है और प्रधानमंत्री बनाने के लिए मोदी की तस्वीर को सामने रख नवरात्र में नौ दिन का व्रत भी रखा। एक निजी चैनल पर प्रसारित समाचार के अनुसार गाँव वालों ने बकायदे मोदी की नियमित आरती व षोडशोपचार पूजा आदि शुरू कर दी है। इनमे पुरुष और महिलाएं समान रूप से शामिल हैं। गांववालों ने बांसडीह नगर पंचायत को मोदी नगर पंचायत रखने की मांग भी रखनी शुरू कर दी है।
►छोटी-बड़ी गठरी
एक मित्र की फेसबुक वाल पर बड़ा अच्छा प्रसंग लिखा था। डॉo राही मासूम रज़ा को फ़िल्म निर्माता व निर्देशक बी०आर० चोपड़ा ने "महाभारत" टीवी धारावाहिक की पटकथा लिखने को कहा। राही मासूम रज़ा ने इनकार कर दिया। दूसरे दिन यह ख़बर अख़बार में छप गयी। हज़ारों लोगों ने चोपड़ा को ख़त लिखा कि एक मुसलमान ही मिला "महाभारत" लिखवाने के लिए? चोपड़ा ने सारे ख़तों को राही मासूम रज़ा के पास भिजवा दिया। ख़तों के ज़खीरे को देखने के बाद राही मासूम रज़ा ने चोपड़ा से कहा कि अब मैं ही लिखूँगा "महाभारत" की पटकथा, क्योंकि मैं गंगा का पुत्र हूँ। राही मासूम रज़ा ने जब "महाभारत" की पटकथा लिखी तो उनके घर में ख़तों के अंबार लग गए। लोगों ने डॉ० राही मासूम रज़ा की ख़ूब तारीफें की एवं उन्हें ख़ूब दुआएँ दी। ख़तों के कई गट्ठर बन गए, लेक़िन एक बहुत छोटा सा गट्ठर उनकी मेज़ के किनारे सब ख़तों से अलग पड़ा था। उनकी मेज़ के किनारे अलग से पड़ी हुई ख़तों की सबसे छोटे गट्ठर के बारे में वज़ह पूछने पर राही मासूम रज़ा साहब ने ज़वाब दिया कि ये वह ख़त हैं जिनमें मुझे गालियाँ लिखी गयी हैं। कुछ हिंदू इस बात से नाराज़ हैं कि तूम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुसलमान होकर "महाभारत" की पटकथा लिखने की? कुछ मुसलमान नाराज़ हैं कि तुमने हिंदुओं की क़िताब को क्यूँ लिखा? राही साहब ने कहा कि ख़तों की यही सबसे छोटी गठरी दरअसल मुझे हौसला देती है कि मुल्क में बुरे लोग कितने कम हैं। इन दिनों में पूरा देश लोकतंत्र का "चुनावी पर्व" मना रहा है और इस बार भी चुनाव में असली मुद्दों के ऊपर जात-पात , धर्म-अधर्म , भारत-पाक , छूत-अछूत, हिंदू-मुस्लिम वग़ैरह के मुद्दे असल मुद्दों से ज़्यादा भारी पड़ेंगे तथा असली मुद्दे ग़ायब एवं गौण ही रहने वाले हैं। याद रखने की बात यह है कि आज़ भी नफ़रत फ़ैलाने वालों की "छोटी गठरी" हमारे प्यार -मोहब्बत के "बड़े गट्ठर" से बहुत छोटी है। याद रहे चुनाव में सही प्रत्याशी को ही वोट दें और देश को मज़बूत बनाएँ , क्योंकि भारत एक बहुलतावादी देश है और इस देश पर यहाँ के सभी निवासियों का समान हक़ है।
पुछल्ला : कल्याण में उत्तर भारतीय समाज का स्वयंभू लंबरदार बनकर नामांकन भरने के बाद एक उम्मीदवार ने परचा वापस ले लिया। उन्हें समर्थन करने वाले लोग भौंचक हैं। भीतरखाने की खबर है कि वे 25 लाख की चटाई पर बैठे हैं।