लोकसभा चुनाव 2019 की जोरदार हलचलें

 01 Apr 2019  531

►बहुत देर कर दी मेहरबां  

देश विदेश, (01 अप्रैल 2019)- मुंबई कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष संजय निरुपम अंतत: उत्तर-पश्चिम मुंबई लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस में उम्मीदवार घोषित किये जा चुके हैं। साथ ही नए अध्यक्ष के रूप में मिलिंद देवरा पदभार ग्रहण भी कर चुके हैं। खबर यह है कि आखिर तक निरुपम की उम्मीदवारी के साथ-साथ अध्यक्षी भी बरकरार रखने के लिए आलाकमान के यहाँ लामबंदी करते रहे लेकिन बात इसी बात पर फंस रही थी कि जब मुंबई प्रदेश अध्यक्ष ही अपना लोकसभा क्षेत्र छोडकर भाग रहा है तो इसका मुंबई में गलत सन्देश जायेगा। दूसरा यह कि आलाकमान उत्तर मुंबई के लिए दमदार प्रत्याशी चाहता था। पहले भाभीजी घर पर हैं फेम एक चेहरे पर दांव लगाने की सूझी भी पर उसे कमजोर माना गया। उम्मीदवार खोजने की जिम्मेदारी निरुपम पर ही डाली गयी। मामला रंगीला गर्ल पर आकर खत्म हुआ। इसके बीच निरुपम से एक शर्त राखी गयी या तो उत्तर-पश्चिम मुंबई सीट की उम्मीदवारी या अध्यक्षी। हारकर निरुपम ने उम्मीदवारी को ज्यादा महत्त्व दिया और अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ दी। वैसे चूँकि इस सीट पर पहले गुरुदास कामत जीत/हार चुके थे, अब उनके मरने के बाद उनके समर्थक यह सीट कामत गुट के ही किसी व्यक्ति के लिए चाहते थे। संजय की उम्मीदवारी का यही खेमा विरोध भी कर रहा था। खबर यह है कि एक मुस्लिम नेता जो विधायक भी है इस सीट पर लड़ना चाहता था। मगर खुलकर कभी सामने नहीं आया। अब कामत का गुट संजय निरुपम को भीतर ही भीतर निपटाने में जुटा है। वैसे 2009 में जब गुरुदास कामत इस सीट पर जीते थे तब उनकी जीत में मनसे की बड़ी भूमिका थी। तब मनसे की शालिनी ठाकरे ने एक लाख 24 हजार वोट पाए थे जबकि 2014 में मनसे के महेश मांजरेकर मात्र 66088 वोट ही मिले थे। गुरुदास कामत के पिछले चुनाव की तुलना में 28 हजार वोट बढ़े लेकिन फिर भी वे हार गए। अब बदले हुए वातावरण (जैसा कांग्रेस सोचती है) में निरुपम को उम्मीद है कि वे यह सीट जीत सकते हैं। वैसे जिन मतों को लेकर वे आश्वस्त हैं, सपा उन मतों को काटने के लिए मैदान में कूद सकती है अथवा कुदाई जा सकती है। मुकाबला रोचक होगा।

►रंगीला गर्ल ने हवा बदली 
उत्तर मुंबई से लोकसभा सांसद गोपाल शेट्टी को उनके बोल अब भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में कई मौकों पर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि मुझे जीतने के लिए सिर्फ गुजरती वोट ही काफी हैं, मराठी वोट नहीं चाहिये। कांग्रेस द्वारा उर्मिला मातोंडकर को इस सीट से मैदान में उतारने के बाद चुनावी जंग एकतरफा नहीं रह गई है। कारण यह है कि कभी इस सीट पर अजेय समझे जाने वाले राम नाईक 2004 में गोविंदा से और बाद में संजय निरुपम से चुनाव हार गए थे। रंगीला गर्ल इस क्षेत्र में आते ही जुट गई हैं और अच्छी भीड़ भी जुटा रही हैं ऐसे में शेट्टी को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। 

►किरीट सोमैय्या की नई उलझन 
राजग सरकार में मंत्री रामदास अठावले ने मुंबई पूर्वोत्तर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की बात कहकर भाजपा के मौजूदा सांसद किरीट सोमैय्या की नींद उड़ा दी है। अभी तक सिर्फ शिवसेना के विरोध के चलते यह स्तम्भ लिखे जाने तक उनका टिकट पक्का नहीं हुआ था। बकौल अठावले उन्होंने अपनी इस इच्छा से भाजपा को अवगत करा दिया था। लेकिन भाजपा की तरफ से इस बारे में कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। इस संसदीय क्षेत्र को लेकर शिवसेना और भाजपा के बीच मतभेद चल रहा है। आठवले इस सीट से खुद चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। अठावले के अनुसार यदि भाजपा अपने खाते की सीट का बलिदान देती है तो उसे राज्य में दलितों को वोट मिलेंगे। इससे पहले अठावले भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन होने से नाराज हो गए थे। उन्होंने अपनी नाराजगी को सार्वजनिक रूप से भी व्यक्त किया था।

►रविशंकर के खिलाफ चौकीदार 
पटना साहिब से  भाजपा द्वारा उम्मीदवारी दिए जाने के बाद पहली बार पटना पहुँचने पर जिस तरह का स्वागतीय विरोध रविशंकर प्रसाद का हुआ उससे सबसे बड़ी पार्टी की उलझन बढ़ गयी है। एक सप्ताह पहले ही जिन चौकीदारों को प्रधान सेवक ने वीडियो की मार्फत संबोधित किया था और यह दावा किया गया था की एक साथ 25 लाख चौकीदरों से प्रधान सेवक ने संवाद किया, दरअसल वे सभी गार्ड आर. के. सिन्हा की सिक्यूरिटी कंपनी के थे। पटना में रविशंकर प्रसाद के विरोध में उतरी भीड़ इन्हीं सिक्यूरिटी गार्डों की थी। मजे की बात यह है आर. के. सिन्हा भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। शत्रुघ्न सिन्हा की भाजपा से विदाई के बाद वे यह सीट अपने बेटे के लिए चाहते थे। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आर के सिन्हा भी टिकट चाहते थे, मगर उन्हें बीजेपी ने टिकट नहीं दिया। यही वजह है कि आरके सिन्हा के समर्थकों  ने रविशंकर प्रसाद के खिलाफ हल्ला बोल दिया। आरके सिन्हा प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी चलाते हैं और पास पटना शहर में भी चौकीदारों की एक बड़ी फ़ौज है। कार्यकर्ता रविशंकर प्रसाद की उम्मीदवारी पर भी सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि भाजपा ने कार्यकर्ताओं का अपनान किया है और ऐसे लोगों को टिकट दिया है, जो समाज में कभी नहीं आते। पटना एयरपोर्ट पर बीजेपी कार्यकर्ताओं का बड़ा हुजूम देखने को मिला और सभी जमकर नारेबाजी करते दिखे। इस दौरान दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच जिस अमर्यादित और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

►स्टेडियम को राजनीति का अखाड़ा न बनायें 
पिछले सप्ताह जयपुर में पंजाब और राजस्थान के बीच खेला गया मैच अब एक नया विवाद के लिए सुर्खियां बटोर रहा है। आईपीएल 2019 का चौथा मैच पंजाब और राजस्थान के बीच था। इस मैच का 24 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जिसे छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर आईपीएल के एक मैच का वीडियो ट्वीट किया। इस विडियो में लोग चौकीदार चोर है के नारे लगा रहे हैं। विडियो को शेयर करके पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया – ‘देखें… जब आईपीएल मैच के दौरान “चौकीदार चोर है” के नारों से गूंजने लगा स्टेडियम। इस वीडियो को बीबीसी ने भी जाँच में सही पाया है कि ये वीडियो असली है और ये घटना भी, मगर इसका संदर्भ कुछ और है। शायद ऐसा हुआ भी हो, पर अब खेल और राजनीति को अलग रखने पर सोचना चाहिये। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। मैच का सीधा प्रसारण पूरे विश्व में हुआ। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ लगे नारों को उचित नहीं कहा जा सकता। क्योंकि ऐसे भीड़भाड़ वाले वातावरण में किसी को वो ऐसे नारे पसंद नहीं आए या उसने विरोध जताया तो जनता के साथ-साथ खिलाडियों की भी सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। खेल के मैदान को राजनीति का अखाड़ा न बनाया जाये तो बेहतर है। वैसे कांग्रेस से भाजपा होते हुए अब शिवसेना के जरिये पालघर से लोकसभा जाने की तैयारी कर रहे राजेंद्र गावित को लेकर वोटर भ्रम में है कि वह किस गावित को वोट दे।