मंदिर में भगवान को प्रसाद के रूप में फल, मिठाई आदि चढ़ाने की परंपरा बहुत प्राचीन काल से चली आ रही है लेकिन राजस्थान में एक मंदिर ऐसा भी है जो अपने विशेष प्रसाद के लिए जाना जाता है।
यहां भक्त अपने भगवान को प्रसाद के रूप में प्याज और दाल चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि इसके पीछे भी एक विशेष कारण है।
यह मंदिर हनुमानगढ़ जिले में स्थित है। यहां गोगामेड़ी नामक स्थान पर लोकदेवता गोगाजी विराजमान हैं। इन्हें सूखी दाल और प्याज का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह प्रसाद भाद्रपद की अष्टमी को चढ़ाया जाता है। ऐसा जन्माष्टमी के आयोजन तक जारी रहता है।
यहां हर भक्त द्वारा 250 ग्राम प्याज और दाल चढ़ाना शुभ माना जाता है। उल्लेखनीय है कि गोगाजी के दरबार में सिर्फ राजस्थान से ही नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से भी भक्त आते हैं।
क्यों चढ़ाते हैं दाल और प्याज
श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार, गोगाजी तारानगर स्थित ददरेवा के राजा थे। करीब एक हजार साल पहले उन्होंने प्राण त्यागे थे। महमूद गजनवी के आक्रमण के समय उन्होंने लोगों से एकजुट होने तथा सेना का निर्माण करने की बात कही थी।
उसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने देह त्याग दी थी। उस समय लोगों ने सेना की रसद के लिए दाल और प्याज इकट्ठे किए थे। ये दो चीजें युद्ध के लिए इसलिए भी ज्यादा उचित थीं क्याेंकि रेगिस्तानी इलाके की गर्मी में ये काफी दिनों तक खराब नहीं होतीं।
इसके बाद लोगों ने गोगाजी की संगठन शक्ति और देश के प्रति प्रेम के स्मरण में उन्हें प्याज और दाल भेंट करने की यह परंपरा शुरू की जो आज तक जारी है। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से ये चीजें उन्हें भेंट करता है उसकी मन्नत जरूर पूरी होती है।