यहां कृष्ण के साथ होती है उनके दोस्त सुदामा की पूजा
16 Sep 2015
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भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता आदर्श मानी जाती है। हालांकि श्रीकृष्ण के अनेक मित्र थे और वे सभी के लिए आदर्श मित्र थे। कृष्ण-सुदामा की दोस्ती ने संसार के सामने यह मिसाल पेश की कि अगर दोस्ती करो तो उन जैसी।
उन्होंने अपने मित्र सुदामा को कुछ मांगने का अवसर नहीं दिया, क्योंकि इससे निर्धन मित्र का स्वाभिमान आहत होता लेकिन उन्होंने उसे बिन मांगे ही सबकुछ दे दिया। वे उसके हृदय की पीड़ा समझते थे। सिर्फ मुट्ठी भर चावल खाकर उन्होंने सुदामा के सभी अभाव दूर कर दिए।
कृष्ण-सुदामी की दोस्ती को समर्पित एक मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के नजदीक है। इस मंदिर का नाम नारायण धाम है। श्रद्धालुओं के अनुसार, इस क्षेत्र में कृष्ण-सुदामा के गुरु सांदीपनी का आश्रम था। एक दिन उन्हें उनकी गुरुमाता ने वन से लकड़ियां लाने के लिए कहा।
सुदामा के साथ कृष्ण वन में गए। थोड़ी देर बाद वन में बारिश होने लगी तो दोनों मित्रों ने पेड़ों के नीचे शरण ली। यहां स्थित वृक्षों के बारे में कहा जाता है कि ये ही वे पेड़ हैं। यहीं से कृष्ण-सुदामा ने लकड़ियां इकट्ठी की थीं।
आज इस स्थान पर एक मंदिर बना है और इसमें सिर्फ कृष्ण की ही पूजा नहीं होती। यहां सुदामा का भी साथ पूजन होता है।
श्रद्धालु दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं और कृष्ण की भक्ति के साथ दोनों मित्रों की अटूट मित्रता की भी प्रशंसा करते हैं।