एकात्मिक बाढ़ इशारा यंत्रणा मुंबई के लिए वरदान साबित होगी - मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

 12 Jun 2020  633

 मुंबई, (12 जून 2020)- मानसून के दिनों में एकात्मिक बाढ़ इशारा यंत्रणा (इं‍टिग्रेटेड फ्लड वॉर्निंग सिस्टीम) मुंबई के लिए वरदान साबित होगी। जीआयएस आधारित इस यंत्रना से अब किसी भी परिसर में पानी जमा नहीं रहेगा, बाढ़ आने की सूचना के साथ-साथ तूफान जैसे संकट की पूर्व सूचना भी मिलेगी, जिससे सतर्क हो सकेंगे। इस यंत्रना के उपयोग में लाये जा रहे हायड्रोलिक मॉडेल के कारण परिसर के गटारी, नदी के रियल टाईम होनेवाली पानी की हलचल, उसका प्रवाह के बारे में  (आडाखे) भी जानना संभव होगा। इससे मुंबई को बाढ़ के खतरे से बचाना संभव होगा, यह प्रतिपादन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया।भारतीय मौसम विभाग ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका के साथ बनाई गई एकात्मिक बाढ़ इशारा यंत्रना का ई उद्घाटन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हाथों किया गया। इस दौरान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव आशिषकुमार सिंग, प्रधान सचिव विकास खारगे, मुंबई महापालिका आयुक्त इक्बालसिंग चहल, भारतीय मौसम विभाग के महासंचालक डॉ. एम. महापात्रा, भारतीय मौसम विभाग मुंबई के उपमहासंचालक डॉ. के. एस. घोसालीकर और विविध विभागीय मौसम वेधशाला के प्रमुख सहभागी हुए थे।मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि सर्वप्रथम मैं भारतीय मौसम विभाग का तहेदिल से अभिनंदन करता हूँ। उन्होंने मानसून ११ तारीख को दाखिल होगा, इसकी सूचना दी थी, उसके अनुसार ही बारिश का आगमन हुआ है। साथ ही उनका और एक कारण से भी उनका अभिनंदन करना चाहता हूँ, जो ये है की, ‘निसर्ग’ चक्रीवाती तूफान की सभी प्रकार की जानकारी मौसम खाता दे रहा था। इस तूफान की दिशा बदलने को लेकर, उसकी गति कम होने आदि सभी प्रकार की जानकारी हमें मिल रही थी। इस कारण यंत्रणा भी सतर्क एवं सज्ज थी। जिससे जीवितहानी से बच सके। कोई भी आपदा आयी तो हम उससे क्या अनुभव लेते है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन इन दिनों देश के सबसे व्यस्त मंत्री होंगे। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में वे कोरोना का मुकाबला कर रहे है उनकी दृष्टि से अब ब्लड मैनेजमेंट और फ्लड मैनेजमेंट यह दोनों भी महत्वपूर्ण है। मुंबई समेत राज्य ने वर्ष २००५ में बाढ़ के कारण जो नुकसान हुआ, उसका अनुभव किया है। इसमें हाय टाईड आने के बाद समंदर से उलटे रूप से पानी आकर मुंबई में पानी जमा होता है, यह सभी बाते पता चली। साथ ही इस तरह की आपदा से बचने के लिए हमने पंपिंग स्टेशन्स भी लगाए। इन्हीं दिनों बारिश के बाद लेप्टो, डेंग्यू जैसी संक्रमित बीमारियाँ भी बढ़ने लगी। इन बीमारी का निदान होने के लिए वर्ष २००७ में मुंबई के कस्तुरबा अस्पताल में देश की पहली मॉलिक्युलर लैब का निर्माण किया गया। अब कोरोना की महामारी से भी हमने सीख ली है। इसीलिए पहले २ लैब थी जिसकी संख्या बढ़कर ८५ हुई है। उन्होंने कहा कि हमने मंत्रिमंडल में पर्यावरण विभाग का नाम बदलकर “ पर्यावरण एवं वातावरणीय बदल” विभाग किया है। पर्यावरण की ओर एक अलग नजर से और गांभीर्यपूर्वक देखने की शुरुआत इसी से हुई, इस बात का जिक्र करते हुए उन्होंने आगामी दिनों में भारतीय मौसम विभाग ने मुंबई के लिए डॉपलर रडार जल्द से जल्द लगाना चाहिए, ताकि मौसम का अचूक अनुमान संभव होगा, यह  मांग भी इस दौरान की।इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि इस यंत्रना के औचित्य पर बाढ़ का इशारा देनेवाली देश की अत्याधुनिक यंत्रणा कार्यरत हुई है। यह यंत्रणा मुंबई के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगी और इसे कार्यान्वित करने पर भारतीय मौसम खाते और मुंबई महापालिका का उन्होंने अभिनंदन किया। इस दौरान  घोसालीकर ने मुंबई में ४ डॉपलर रडार लगाने की प्रक्रिया शुरू है और अगले मानसून के पहले ही रडार कार्यरत होने की बात कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री महोदय के हाथों बाढ़ इशारा यंत्रना के ई- उद्घाटन समेत यंत्रना के डिजिटल ब्राऊचर्स का प्रकाशन भी किया गया।