प्रवासी मजूदर लोकडाऊन में ऑटोरिक्शा से घर लिए हुए रवाना

 11 May 2020  446

मुंबई, (11 मई 2020)- लॉकडाउन के बीच प्रवासी श्रमिकों के लिए मुंबई ड्रीम्स का सपना टूटता जा रहा है और उनमें से टैक्सी और ऑटोरिक्शा चलाने वाले कई लोग अपने वाहनों से अपने घरों को लौट रहे हैं, टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों के यूनियन के सूत्रों ने बताया कि काली पीली टैक्सियों और ऑटो में क्रमश लोग महानगर छोड़ रहे हैं। मुंबई-आगरा राजमार्ग पर एक साइकिल चालक ने बताया कि उसने ट्रकों, ऑटोरिक्शों और मोटरसाइकलों से प्रवासी श्रमिकों को मध्य और उत्तर भारत के अपने घरों को जाते देखा है। यूनियन के अधिकारियों ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन की बढ़ती संभावना को देखते हुए कई ऑटो और टैक्सी चालक अपनी काली-पीली टैक्सी और ऑटोरिक्शा में अपने घरों को लौट रहे है। करीब 45 हजार काली-पीली टैक्सियां हैं और मुंबई महानगर में करीब पांच लाख ऑटोरिक्शे हैं, करीब दो महीने तक लॉकडाउन के कारण कैब चालकों और ऑटो चालकों के पास कोई धन नहीं बचा है, इसलिए यहां भूखे मरने के बजाए वे अपने गृह स्थानों की तरफ जाने को तवज्जो दे रहे हैं। संगठन के अधिकारियों के मुताबिक कैब और ऑटोरिक्शा चालक 20 से 50 के समूह में मुंबई क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं और वे उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और झारखंड की तरफ रवाना हो रहे हैं जबकि कुछ कैब चालक कर्नाटक भी जा रहे हैं। मुंबई ऑटोरिक्शा यूनियन के नेता शशांक राव ने कहा कि चूंकि बस और ट्रक चालक बहुत ज्यादा भाड़ा मांग रहे थे, इसलिए चालक अपने वाहन से ही घरों को लौट रहे हैं। अपने सामान पैक कर कुछ चालक अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं जबकि कई चालक अन्य चालकों एवं दोस्तों के साथ रवाना हो रहे हैं। संगठन के नेताओं के मुताबिक टैक्सी और ऑटोचालक पुलिस की तरफ से जारी ई-पास के बगैर ही यात्रा कर रहे हैं क्योंकि वे इसे समय एवं धन की बर्बादी मानते हैं आरटीओ अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन अस्थायी पास हासिल कर ऑटो एवं टैक्सी चालक यात्रा कर रहे हैं जो कुछ महीने के लिए वैध होता है।