सत्र के पहले दिन ही प्रस्तुत हुआ आर्थिक सर्वे रिपोर्ट
17 Jun 2019
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मुंबई, (17 जून 2019)- महाराष्ट्र की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट ने फडणवीस सरकार को बड़ी राहत दी है। साल 2018-19 की रिपोर्ट में राज्य की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि इसके 7.3 प्रतिशत होने का अनुमान था। इसी अवधि में देश की विकास दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। देश भर में प्रति व्यक्ति आय के मामले में महाराष्ट्र केवल कर्नाटक और तेलंगाना से पीछे है। साल 2017-18 में जहां प्रति व्यक्ति आय 1,76,102 रुपये थी, वहीं साल 2018-19 में बढ़कर 1,91,827 रुपये होने का अनुमान है। राज्य पर कुल कर्ज 4,14,411 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महाराष्ट्र का योगदान 14.4 प्रतिशत रहेगा। महाराष्ट्र विधानमंडल के मॉनसून सत्र के पहले दिन आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट दोनों सदनों में पेश की गई।कृषि क्षेत्र के लिए सर्वे रिपोर्ट ने बुरी खबर दी है। सूखे की मार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। कृषि की विकास दर 0.4 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। उद्योग क्षेत्र की विकास दर 0.7 प्रतिशत कम रहने की संभावना व्यक्त की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में उद्योग क्षेत्र की विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सर्विस सेक्टर की विकास वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि साल 2017-18 में यह 8.1 प्रतिशत थी। राज्य की राजस्व आय में 42,846 करोड़ की वृद्धि हुई। 2018-19 में राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 80,013 करोड़ रुपये। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 2,48 ,718 करोड़ रुपये होने का अनुमान। मार्च 2019 तक बने 2.78 करोड़ राशन कार्डों में से 2.42 करोड़ का कंप्यूटरीकरण। प्रधानमंत्री जनधन योजना में 2.50 करोड़ बैंक खाते। मुंबई-नागपुर महामार्ग पर कुल 55,335 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान। राज्य की पहली क्लस्टर यूनिविर्सिटी मुंबई में स्थापित।दिसंबर 2018 में थे 45.10 लाख लैंडलाइन टेलिफोन। 2017-18 में 111.02 लाख मैट्रिक टन दूध का उत्पादन।
विधानमंडल के मॉनसून अधिवेशन के पहले ही दिन सरकार द्वारा दोनों सदनों में पेश किए राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आंकड़ों को पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने संदेहजनक बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह केंद्र की मोदी सरकार आंकड़ों की बाजीगरी करती है, उसी तरह राज्य की भाजपा सरकार भी विकास के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ा कर राज्य की जनता को गुमराह कर रही है। विधानसभा में आर्थिक सर्वे रिपोर्ट पेश होने के बाद, चव्हाण ने सदन के बाहर पत्रकारों से कहा कि इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक आंकड़े कृषि विकास दर के हैं। पिछले साल के प्रथम अनुमान के मुताबिक 2017-18 में कृषि विकास दर में 8.3 प्रतिशत की गिरावट थी, लेकिन इस साल की पहले संशोधित अनुमान में कृषि विकास दर में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है। चव्हाण का तर्क है कि 2017-18 में कर्ज माफी की मारामारी, कृषि उत्पादों की गिरी हुईं कीमतें, कीड़ा लगने से कपास की खेती का नुकसान जैसी घटनाओं से कृषि क्षेत्र का वातावरण चिंताजनक रहा है। इसके बावजूद कृषि विकास दर में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक अंदाज और संशोधित अंदाज में 1 या दो प्रतिशत का अंतर तो समझ में आता है, लेकिन साल भर में 11 प्रतिशत वृद्धि दर संदेहजनक है। राज्य में उद्योग की स्थिति भी चिंताजनक है। 2014-15 में राज्य की औद्योगिक विकास दर 8 प्रतिशत थी। 2018-19 में यह घटकर 6.9 प्रतिशत रह गई है। इसका मतलब यह है कि 'मेक इन महाराष्ट्र', मैग्नेटिक महाराष्ट्र की घोषणाएं खोखली थीं।