घायल रेल यात्रियों और शव को उठाने की नहीं है कोई ठोस व्यवस्था !

 27 May 2018  756

मुंबई, (27 मई 2018)- भारतीय रेल को मुंबई से सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है। बावजूद इसके  पिछले साल एलफिस्टन रोड स्टेशन पर भगदड़ मचने के कारण २३ लोगों की जान चली गयी थी, और कई यात्री घायल हुए थे।मुंबई की उपनगरीय लोकल ट्रेन को मुंबई की लाइफ लाइन कहा जाता है। हर रोज एक करोड़ से ज्यादा यात्री इससे यात्रा करते हैं। मुंबई की ट्रेनों में बहुत भीड़ होती है, जिसके कारण यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन के दरवाजे पर लटककर और खड़े होकर यात्रा करते है, जिसके कारण हर रोज औसतन 10 से 12 यात्रियों की ट्रेन से गिरकर/कटकर मौत हो जाती है। कई यात्री रेल की पटरियों पर अपना दम तोड़ देते है, क्योकि उन जख्मी यात्रियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है, इसका मुख्य कारण है कि समय पर घायल यात्रियों को नहीं उठाना। मुंबई के उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर घायल रेल यात्रियों और शव को उठाने के लिए रेल प्रशासन ने किसी हमाल अथवा कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की है। ऐसी जानकारी सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त हुई है। आरटीआय कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने मध्य रेल और पश्चिम रेल से उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन से गिरकर घायल होने वाले अथवा मरने वाले यात्रियों को उठाने के लिए किस-किस रेलवे स्टेशन पर कितने कर्मचारी/हमाल की नियुक्ति की है, इसकी जानकारी मांगी थी। इस सन्दर्भ में रेलवे प्रशासन के सूचना अधिकारी नर्मदेश्वर झा ने सूचना उपलब्ध कराई है। मिली जानकारी के मुताबिक, उपनगरीय स्टेशन पर दुर्घटना में जख्मी तथा मृत व्यकित को पटरी से उठाने के लिए कोई विशेष रूप से कर्मचारी नियुक्त नहीं किये गए है,  ऐसी दुर्घटना होने पर सम्बंधित स्टेशन मास्टर स्थानिय हमाल व स्वैछिक सेवकों की मदत लेते है। गौरतलब है कि मुंबई उपनगरीय रेलवे में २०१७ में ट्रेन से गिरकर/कटकर ३०१४ यात्रियों की मौत हुई है, तथा ट्रेन से गिरकर घायलों की संख्या ३३४५ है। मध्य रेलवे  के उपनगरीय रेलवे में कुल १५३४ यात्रियों की मौत हुई है। घायलों की संख्या १४३५ है , जबकि पश्चिम उपनगरीय रेलवे में कुल १०८६  यात्रियों की मौत हुई है। घायलों की संख्या १५४० है। हार्बर उपनगरीय रेलवे में ३९४ यात्रियों की मौत हुई है। घायलों की संख्या ३७० है। आरटीआय कार्यकर्ता  शकील अहमद शेख के अनुसार दुर्घटना होने पर सम्बंधित स्टेशन मास्टर नशेडी और गर्दुल्लो की मदत लेते है। सवाल यह है कि नशेडी और गर्दुल्लो खुद नशे में रहते है, तो क्या नशेडी और गर्दुल्लो के सहारे घायल यात्रियों को सही समय पर इलाज मिल सकता है, क्योंकि इन नशेडी और गर्दुल्लो का कोई ठिकाना नहीं होता है, उन्हें ढूढने में काफी समय चला जाता है, जिसके कारण घायल यात्री को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया जाता है, जिसके कारण कुछ यात्रियों की मृत्यु हो जाती है, इस सन्दर्भ में  शकील अहमद शेख ने  रेलमंत्री पियूष गोयल एवं  रेल्वे बोर्ड चेयरमैन अश्वनी लोहानी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द सभी रेलवे स्टेशन पर दुर्घटना में जख्मी तथा मृत व्यकित को पटरी से उठाने के लिए विशेष कर्मचारी अथवा लाईसेन्स धारक हमाल नियुक्त करने की मांग की है।