‘रानमला’ गाँव का वृक्षरोपन संस्कार अब राज्य के गाँव-शहर में होगा – सुधीर मुनगंटीवार
17 Apr 2018
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मुंबई, (17 अप्रैल 2018)- घर में नए बच्चे का स्वागत, घर के किसी शुभकार्य की शुरुआत या फिर नए दंपत्ति का स्वागत एवं उन्हें पौधा देकर आशीर्वाद देना ऐसे कार्य करेंगे तो उस पौधे एवं पौधरोपन करनेवाले या पौधा भेंटस्वरूप या आशीर्वाद के रूप देनेवाले के बीच अपनेपन एवं प्रेम का रिश्ता बनता है। वहीं उस पौधे हम संरक्षण करते है। पुणे जिले के खेड तहसील में “रानमला” गाँव का वृक्षारोपन का यह उपक्रम अब राज्य के सभी गाँव एवं शहरों में चलाया जाएगा। ग्रामाविकास एवं नगरविकास विभाग इस संदर्भ में निर्णय जारी किए जाने की जानकारी वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने दी। इस दौरान उन्होंने सुख-दुख के पल पौधे रूप में यादगार बनाने के लिए नागरिकों को बड़ी संख्या में इस योजना भाग लेने का आवाहन किया।गत सोमवार को 13 करोड़ वृक्षरोपन उपक्रम का ब्यौरा लेने के बाद उन्होंने वृक्षरोपन संबंधित अच्छे उपक्रमों की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि ‘रानमला’ गाँव के वृक्षरोपन योजना की जानकारी देते हुये उन्होंने कहा कि जन्म, विवाह, सफलता, घर के शुभकार्य एवं दुखों के क्षणों को यादगार बनाने का प्रयास इस गांव के प्रत्येक परिवार ने किया है। घर का परिसर एवं खुली जगह, परसबाग, खेत की सीमाबांध पर गांव के लोगों ने पौधा लगाया है। जिससे गाँव हरभरा होने साथ-साथ उन क्षणों की याद भी अजरामर हुई है। रानमला गाँव का वृक्षरोपन का यह संस्कार अब “वृक्षा का संरक्षण ही निसर्ग का संरक्षण” इस योजना के माध्यम से ग्रामविकास और नगरविकास विभाग ने राज्य के प्रत्येक गाँव-शहर पर करने का निर्णय लिया है।उन्होंने कहा कि गाँव में जन्मे बच्चे का स्वागत उस परिवार को पौधा देकर किया जाएगा और उसे “शुभकामनायें वृक्ष” नाम दिया गया है। बच्चे के साथ-साथ वह पौधा भी बड़ा होता जाएगा, वहीं विवाह समारोह में “शुभमंगल वृक्ष” देकर नवदंपत्ति को आशीर्वाद दिया जाएगा, दसवीं-बरहवीं में, नौकरी तथा परीक्षाओं में सफलता प्राप्त छात्रों को एवं नए उद्यमियों को “आनंद वृक्ष” देकर सम्मानित किया जाएगा। वहीं शादी के बाद लड़की के मायके में “माहेरीची झाडी” लगाकर उसकी याद हमेशा बनाए रहेगी। साथ ही किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद “स्मृती” वृक्ष लगाकर उनकी याद रहेगी। जीवन में सुख-दुख के क्षण पेड़ के माध्यम से हमेशा जिंदा रहेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण-प्रेमी, उद्यमियों के सामाजिक दायित्व निधि से पौधे उपलब्ध किए जाएंगे। साथ ही सामाजिक वनीकरण शाखा तथा महाराष्ट्र वन विकास महामंडल, पालिका की रोपवाटिका की ओर से भी पौधे उपलब्ध हो सकते है। इसके अलावा निजी रोपवाटिकाओं से भी पौधे उपलब्ध हो सकते है। ग्रामपंचायतों में उनके उत्पन्न तथा ग्राम निधि से खर्च किया जा सकता है। 1 जुलाई से 30 जून तक का समय मानते हुए जन्म, विवाह,सफलता और खुशी के कार्यक्रम पर पौधे वितरित किए जा सकते। 1 जुलाई को मान्यवरों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में जिस परिवार को पौधे दिये जाएंगे उन्हें टोकन दिया जाएगा। साथ ही वृक्ष संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिज्ञा भी इस अवसर पर ली जाएगी। मुनगंटीवार ने आगे कहा कि “रानमला” गाँव का यह संस्कार समूचे राज्य में वृक्षरोपन के माध्यम से होगा। इस योजना से भविष्य में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकते है।