राज्य में 23 हजार मेगावॅट उच्चांकी बिजली का पारेषण एवं वितरण दो लाख से अधिक किसानों को एचवीडीएस योजना से देंगे कनेक्शन - ऊर्जामंत्री
17 Apr 2018
966
मुंबई, ( 17 अप्रैल 2018)- राज्य में बिजली की मांग पूर्ण हो रही है। आज राज्य में 23 हजार 100 मेगावॅट बिजली का पारेषण और वितरण ऊर्जा विभाग के द्वारा किए जाने की जानकारी ऊर्जामंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आज मंत्रालय में आयोजित पत्रकार परिषद में दी।पैसे भरकर प्रलंबित कुल 2 लाख 24 हजार कृषिपंप ग्राहकों को अब हाई पॉवर वितरण प्रणाली से बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। इसलिए 2 किसानों में एक ट्रांसफॉर्मर इस एचवीडीएस प्रणाली को आज मंत्रिमंडल में मान्यता प्रदान किए जाने की जानकारी मीडिया से बातचीत के दौरान ऊर्जामंत्री ने दी।
बिजली की दृष्टि से राज्य स्वयंपूर्ण हो रहा है ,ऐसा बताकर ऊर्जामंत्री ने कहा, 2000 मेगावॅट का सौर ऊर्जा पर आधारित परियोजना दिसंबर 2019 तक पूर्ण की जाएगी। राज्य में फिलहाल किसी भी पद्धति का लोडशेडिंग शुरू नहीं है। कृषि संजीवनी योजना को अल्प प्रतिसाद मिला है। इस पार्श्वभूमि पर किसानों को थकित बिजली बिल में से कम से कम पांच हजार रुपये भरकर ऊर्जा विभाग को सहयोग करने का आवाहन ऊर्जामंत्री ने किया।विधिमंडल के शीत सत्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कृषि पंपधारक ग्राहकों को हाई पॉवर वितरण प्रणाली (एचवीडीएस) के द्वारा बिजली कनेक्शन देने की सूचना की थीं। इसके अनुसार पैसे भरने के बाद भी बिजली कनेक्शन न मिलनेवाले किसानों को अब इस योजना से बिजली कनेक्शन दिया जाएगा।वर्तमान पद्धति के अनुसार किसानों को 65 और 100 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर से 15 से 20 कृषि ग्राहकों को विद्युत आपूर्ति की जाती है। इससे लो पॉवर तारों की लंबाई बढ़ती है, और बिजली का नुकसान भी बड़े पैमाने पर होता है, साथ ही किसानों को कम पॉवर से बिजली आपूर्ति होती है। बिजली आपूर्ति में बार बार खराबी होने से आपूर्ति बंद होना, तकनीकी कारण से बिजली की हानि, ट्रांसफार्मर खराबी, बिजली से होनेवाली दुर्घटनाओं का सामना महावितरण को करना पड़ता है। इन सभी समस्याओं पर एचवीडीएस योजना से निजात पाना संभव है।हाई पॉवर प्रणाली में उच्चदाब तारों से विद्युत प्रवाह बड़े पैमाने पर कम होगा। इस प्रणाली से तारों पर आकड़े डालकर बिजली चोरी नहीं होगी। इस योजना पर 4496.69 करोड़ और नए उपकेंद्र के लिए लगनेवाला संभावित लगभग 551.44 करोड़ का खर्च ऐसे कुल 5048.13 करोड़ रुपये के खर्च को कैबिनेट ने मान्यता प्रदान की है, साथ ही विदर्भ और मराठवाड़ा विभाग में कृषिपंपों को बिजली कनेक्शन देने के योजना के अंतर्गत वर्ष 2018-19 और 2019-20 के अर्थसंकल्प में प्रावधान किया जाएगा।विगत तीन वर्षों में 4 लाख से अधिक कृषिपंपों को बिजली कनेक्शन दिया गया है। महावितरण द्वारा प्रति कनेक्शन 1.5 लाख तक का निधि खर्च किया गया है। एचवीडीएस योजना के अंतर्गत प्रति कॄषि पंप 2 लाख खर्च अपेक्षित है। वर्तमान के लो पॉवर प्रणाली से हाई पॉवर वितरण प्रणाली अधिक फायदेमंद है। मार्च 2018 तक 2 हजार 487 कृषिपंपों का ऊर्जीकरण होना अपेक्षित है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण होकर कार्यादेश भी दिए गए है. इस वर्ष नवंबर 2017 के अंत तक 48 हजार 437 कृषिपंपों का ऊर्जीकरण किया गया है जबकि 30 हजारावर कृषिपंपों का बिजली कनेक्शन का का प्रगति पथ पर हैं। यह परियोजना सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए महावितरण के मुख्यालय में एक स्वतंत्र कक्ष स्थापन किया गया है। एचवीडीएस योजना लागू होने के बाद लो पॉवर एवं हाई पॉवर वितरण प्रणाली आदि दोनों प्रणाली कार्यरत रहेगी, ऐसा भी ऊर्जामंत्री बावनकुले ने बताया।