जंगली हाथियों द्वारा फसल के अलावा संपत्ति की हानि होने पर सरकार करेगी क्षतिपूर्ति

 05 Apr 2018  716

मुंबई, (05 अप्रैल 2018)- राज्य में जंगली हाथियों के द्वारा खेती और फसल के अतिरिक्त  अन्य मालमत्ता  की हानि होने पर उसकी भरपाई देने का निर्णय  सरकार ने किया है । इस संबंध में सरकारी निर्णय  वन विभाग द्वारा दिनांक 23 मार्च 2018 को जारी किया गया है ।

इस निर्णय  के अनुसार कृषि औजार तथा उपकरणों तथा बैलगाड़ी का नुकसान होने पर बाजार भाव का 50 फीसदी अथवा 5 हजार रुपये इनमें से जो राशि कम हो वह क्षति पूर्ति के रूप में दी जाएगी ।  इसके अतिरिक्त   संरक्षक दीवार तथा बाड़ का नुकसान होने पर बाजार भाव का 50 फीसदी अथवा 10 हजार रुपये , इसमें से जो राशि कम हो वह क्षति पूर्ति के रूप में दी जाएगी । 

महाराष्ट्र में जंगली  हाथियों का प्राकृतिक अधिवास नहीं है । महाराष्ट्र  के निकटवर्ती राज्य कर्नाटक  से कुछ हाथी महाराष्ट्र  में आने के बाद पुनः वे कर्नाटक  राज्य में वापस न जाकर महाराष्ट्र  में ही रह गए । ये जंगली हाथी   कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचाते  हैं । इसलिए जंगली पशुओं के द्वारा फसलों को अथवा फलों के बागों को होने वाले नुकसान  की क्षतिपूर्ति करने का निर्णय  सरकार ने इसके पहले लिया था । किंतु जंगली हाथियों के द्वारा फसलों के साथ-साथ अन्य संपत्ति  को नुकसान पहुँचाया जाता है तो ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता की व्यवस्था  नहीं थी । जनप्रतिनिधियों तथा जन भावना का विचार करते हुए सरकार ने अब जंगली हाथियों द्वारा संपत्ति को हानि पहुँचाए जाने पर आर्थिक सहायता देने का निर्णय  किया है जिससे अवश्य  ही किसानों को राहत मिलेगी , ऐसा विश्वास   वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने  व्यक्त किया है ।

जिन किसानों का जंगली हाथियों  के द्वारा नुकसान हुआ है उन किसानों द्वारा अपने सभी कागज पत्र तथा सबूतों सहित निकट के वनरक्षक ,  वनपाल,वनपरिक्षेत्र अधिकारी में से किसी एक के पास जाकर घटना घटित होने के तीन दिनों के अंदर आवेदन करना अनिवार्य  है । जंगली हाथियों द्वारा नुकसान की गई  संपत्ति  , सामान के बारे में  वस्तु स्थिति का पंचनामा होने तक घटना स्थल पर कुछ भी छेड़छाड़  न की जाए । यह पंचनामा  वन परिक्षेत्र अधिकारी,कनिष्ठ अभियंता, सार्वजनिक निर्माण,  तलाठी, ग्रामसेवक, इन तीन सदस्यों की समिति के  मार्फत १४ दिनों के अंदर किया जाएगा । नुकसान का मूल्यांकन कर यह समिति अपनी रिपोर्ट   सहायक वनसंरक्षक, विभागीय वन अधिकारी अथवा उप वन संरक्षक के पास  भेजेगी ।

वन जमीन पर अतिक्रमण कर खेती यदि की जा रही है तो संबंधित व्यक्ति  वित्त सहायता मिलने के लिए पात्र नहीं होगा । इसी के साथ    भारतीय वन अधिनियम अथवा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के अंतर्गत जिनके विरुद्ध मामला दर्ज है , ऐसे व्यक्ति  को इस प्रकार की क्षतिपूर्ति  का लाभ नहीं दिया जाएगा  । जिस परिवार के चार से अधिक मवेशी चराई के लिए जंगल में जाते हैं उनको भी यह आर्थिक  सहायता अनुज्ञेय नहीं होगी । ये सब बातें सरकारी निर्णय  में स्पष्ट  कर दी गई  हैं  ।