लोकसभा चुनाव 2019- कल्याण डोंबिवली क्षेत्र में शिवसेना और एनसीपी के बीच होगा कड़ा मुकाबला

 07 Apr 2019  537

►शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और एनसपीपी के बाबाजी पाटील होंगे आमने-सामने

महाराष्ट्र, (07 अप्रैल 2019)- महाराष्ट्र के ठाणे जिले में आने वाली कल्याण लोकसभा सीट पर हर बार की तरह इस बार भी शिवसेना और एनसीपी के बीच कड़े मुकाबले की उम्मीद है. पिछले दो बार से यहां लगातार शिवसेना चुनाव जीतते आ रही है। उम्मीदवार बदलने के बावजूद भी यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दूसरे स्थान पर रही। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से शिवसेना की टिकट पर श्रीकांत शिंदे चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे, उन्होंने एनसीपी के आनंद परांजपे को चुनाव में हराया था। दिलचस्प बात तो यह है कि आनंद परांजपे 2009 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना की टिकट से चुनकर आए थे, लेकिन 2014 लोकसभा के पहले वो शिवसेना छोड़कर एनसीपी से जुड़ गए, वो चुनाव में भी उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के मौजूदा सांसद श्रीकांत शिंदे को चुनौती देने के लिए राकांपा ने ठाणे के नगरसेवक बाबाजी पाटील को चुनावी मैदान में उतारा है। बाबाजी ठाणे मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक भी हैं। वैसे तो, बाबाजी पाटील अगली विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे, मगर उनकी लॉटरी लोकसभा के चुनाव में लग गई। चर्चा है कि न चाहते हुए भी उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाया जा रहा है। उन्होंने पार्टी द्वारा दी गई इस जिम्मेदारी को एक चुनौती की तरह स्वीकार किया है। गौरतलब है कि कल्याण लोकसभा सीट पर शिवसेना की छाप दिखाई देती है। स्थानीय निकायों से लेकर विधानसभा तक पर शिवसेना-भाजपा का कब्जा है। माना जा रहा है कि यहां से शिवसेना को हराना किसी भी दूसरे दल के उम्मीदवार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा। पिछले पांच साल में डॉ. शिंदे ने अपने पिता, राज्य के मंत्री एकनाथ शिंदे से हटकर अपनी छवि बनाई है, जिसका फायदा उन्हें मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता। इस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में अंबरनाथ, उल्हासनगर, कल्याण पूर्व, डोंबिवली, कल्याण ग्रामीण और मुंब्रा-कलवा विधानसभा क्षेत्र हैं। गैरकानूनी निर्माणकार्य इस क्षेत्र की एक बड़ी समस्या है। पानी की बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए विकल्प की तलाश जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती है। इस संसदीय क्षेत्र के पहले चुनाव में शिवसेना के आनंद परापंजे ने राकांपा के दिग्गज वसंत डावखरे को पराजित किया था। इसके पश्चात शिवसेना के साथ अनबन होने के बाद परापंजे ने शिवसेना छोड़ राकांपा की घड़ी पहन ली। 2014 के चुनाव में शिवसेना ने युवा नेता श्रीकांत शिंदे को उतारा। शिंदे ने परांजपे को औंधे मुंह गिरा दिया। बात करें पिछले पांच साल की तो, 32 वर्षीय डॉ. श्रीकांत शिंदे की लोकसभा में उपस्थिति 83 प्रतिशत रही। उन्होंने सदन में 930 प्रश्न उठाए और आठ प्राइवेट बिल भी पेश किए। शिंदे ने अपनी विकास निधि के 25 करोड़ रुपये का पूरा उपयोग किया। उनके प्रयास से ही कल्याण और डोंबिवली रेलवे स्टेशन पर बदलाव आया। एस्केलेटर लगवाया गया और नए-नए पुल बनाए गए। ठाकुर्ली और दिवा रेलवे स्टेशन में बड़ा बदलाव आया। साफ-सफाई के लिए पुरस्कृत भी किया गया। अंबरनाथ के बाद चीखलोली रेलवे स्टेशन को मंजूर कराया। मेट्रो योजना पर मोहर लगाई गई। शील फाटा से लेकर कल्याण तक चार लेन सड़क, हाजी मलंग पर जाने के लिए रोपवे का काम चल रहा है। कल्याण-डोंबिवली व उल्हासनगर में ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। 27 गांव को नगरपालिका बनाने का आश्वासन, एमएमआरडीए द्वारा बनने वाली ग्रोथ सेंटर का विरोध, एमआईडीसी परिसर की दुर्दशा, जमीन के मुद्दे पर स्थानीय भूमिपुत्रों की नाराजगी, जैसे अनगिनत मुद्दे हैं, जो आने वाले प्रतिनिधि के लिए हल करना चुनौतीपूर्ण होगा। वैसे कल्याण लोकसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इसके पहले यह ठाणे लोकसभा के अंतर्गत आती थी। कल्याण लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डालें तो यह सीट शिवसेना-बीजेपी का गढ़ माना जाता है, कि यहां से बीजेपी के राम कापसे 1989 से 1996 तक चुनाव जीतते आए।

►जातीय समीकरण और स्थानीय समीकरण

कल्याण लोकसभा क्षेत्र में सभी जाति का समावेश है। यह मराठा, उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय, मुस्लिम, मारवाडी और गुजराती समाज की बहुलता वाला क्षेत्र है, लेकिन उत्तर भारतीय मत निर्णायक भूमिका में है। स्थानीय भूमिपुत्र व आगरी कार्ड, आरएसएस, हिंदुत्वादी संगठन आदि का प्रभाव मतदान क्षेत्र पर है। राजनीतिक नजरिए से देखें, तो कल्याण लोकसभा चुनाव क्षेत्र में राजनीतिक दल कई गुटों में बटे हैं। खासकर, कांग्रेस और राकांपा में गुटबाजी का असर राकांपा के उम्मीदवार पर पड़ेगा। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से राकांपा को समर्थन देने की अपील की है। राज की अपील को मनसे के मतदाता कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा में मिलाजुला रुख रहा, जबकि स्थानीय निकाय के चुनावों में शिवेसना-भाजपा की जीत का झंडा बुलंद है। यहां के छह विधानसभा क्षेत्रों में शिवसेना और राकांपा के दो-दो विधायक जीते हैं, जबकि भाजपा का एक विधायक रवींद्र चव्हाण डोंबिवली से जीते। वे फडणवीस सरकार में राज्य मंत्री है। कल्याण पूर्व विधानसभा चुनाव में गणपत गायकवाड जीतकर आए, जो सरकार के साथ हो गए। स्थानीय निकायों की बात करें तो कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका पर शिवसेना-भाजपा का झंडा बुलंद है जबकि उल्हासनगर पर शिवसेना-भाजपा और ओमी कलानी की सत्ता है। अंबरनाथ मनपा में शिवसेना की सत्ता है। बता दें कि कल्याण लोकसभा चुनाव क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 6,078 बढ़ी है। सन 2014 के लोकसभा चुनाव में 19 लाख 21 हजार 530 मतदाता थे जबकि 31 जनवरी 2019 तक 19 लाख 27 हजार 608 मतदाता है।

►लोकसभा चुनाव क्षेत्र के विधायक और विधानसभा पार्टी विधायक

अंबरनाथ             शिवसेना              बालाजी किणीकर

उल्हासनगर          राकांपा                ज्योति कालानी

कल्याण पूर्व          निर्दलीय             गणपत गायकवाड

डोंबिवली              भाजपा                रविंद्र चव्हाण

कल्याण ग्रामीण       शिवसेना               सुभाष भोईर

कलवा-मुंब्रा             राकांपा              जितेंद्र आव्हाड

►सन 2014 के कल्याण लोकसभा चुनाव नतीजे 

  उम्मीदवार                  पार्टी              वोट

डॉ श्रीकांत शिंदे           शिवसेना      4,40, 892

आनंद परांजपे              राकांपा        1,90,143

प्रमोद पाटील               मनसे          1,22,349

नरेश ठाकुर                आप             20,347

दयानंद किरतकर       बसपा            19,643