'भारतरत्न' प्रणव मुखर्जी, नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका के कार्य का विधानसभा में गौरव

 27 Feb 2019  778

मुंबई, (27 फरवरी 2019)-  भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, वरिष्ठ समाजसेवक नानाजी देशमुख, वरिष्ठ संगीतकार भूपेन हजारिका को देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारतरत्न' मिलनेपर विधानसभा में उनके कार्य का गौरव किया गया. सभागार में यह प्रस्ताव एकमत से पारित किया गया। इस समय सभागार में सदस्यों ने बेंच बजाकर इन तीनों के कार्य को अभिवादन किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संदर्भ में प्रस्ताव रखा। इस पर विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे, सार्वजनिक बांधकाम एवं स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे, सदस्य गणपतराव देशमुख, पृथ्वीराज चव्हाण, अजित पवार, बसवराज पाटिल ने मनोगत व्यक्त कर तीनों के कार्य का गौरव किया। विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने इस समय कहा कि, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी कुशल प्रशासक थे। राष्ट्रपति पद पर काम करते समय उन्होंने देश की शान और सम्मान बढ़ाया। विगत 50 सालों से अधिक कालावधि में महत्वपूर्ण घटनाओं के वे गवाह थे, उनके कार्य का यथोचित गौरव देश के सर्वोच्च सम्मान के रूप में किया गया है। वरिष्ठ समाजसेवक नानाजी देशमुख लोकनेता थे। जनसंघ के संस्थापकों में से एक नानाजी आदर्श राजनेता के रूप में परिचित थे, उन्होंने सदैव देश हित और समाज के भले का विचार किया। इस समय बागडे ने नानाजी देशमुख की औरंगाबाद दौरे की यादें ताजा की। ईशान्य भारत का सांस्कृतिक चेहरे के रूप में भूपेन हजारिका की पहचान थी, उनका कार्य प्रेरणादायक था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, देश की राजनीति में संकटमोचक के रूप में प्रणव मुखर्जी ने अपनी भूमिका हमेशा निभाई है। देश का ग्रामीण क्षेत्र समृद्ध करने का काम प्रणवदा ने किया है। आज भी वित्त आयोग में गाडगील-मुखर्जी फॉर्म्युले का उपयोग किया जाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रनिर्माण पर उनके द्वारा किया गया लेखन आज भी प्रेरक है। प्रणव मुखर्जी मार्गदर्शक की भूमिका में होने की भावना भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्त की है, ऐसा बताते हुए राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में राष्ट्रपति भवन लोकाभिमुख करने का काम उन्होंने किया है। प्रणवदा के माध्यम से एक उचित व्यक्तित्व देश को मिला, इसीलिए उनको सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया। वरिष्ठ समाजसेवक नानाजी देशमुख के संदर्भ में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, कि भारतीय राजनीति में ऋषितुल्य व्यक्तित्त्व के रूप में नानाजी की पहचान है। व्रतस्थ होकर राजनीति, समाज नीति कर उन्होंने अलग संस्कृति निर्माण की। इमर्जन्सी में देश में विरोधियों एकत्रित लाने का काम उन्होंने किया, उन्होंने जयप्रकाश नारायण और अन्य समाजवादी नेताओं को एकत्रित लाया। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री होने के बाद उन्होंने नानाजी देशमुख को भारत सरकार में मंत्री होने के लिए निमंत्रित किया, लेकिन नानाजी ने इसके लिए नकार दिया। उन्होंने दीनदयाल शोध संस्थान यह संस्था स्थापन की। ग्रामविज्ञान और उससे ग्रामविकास इस विषयपर बडे पैमाने पर सा संशोधन किया. ग्रामीण अर्थव्यवस्था तैयार करने का मॉडेल बनाने का काम शुरू किया। उत्तरप्रदेश में नानाजी के माध्यम से बड़ा काम खड़ा हुआ। मध्य प्रदेश के चित्रकूट जिले में 80 दुर्गम, पहाडी गांवों की जनता को विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से आत्मनिर्भर और उद्योगशील बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। आज भी यह काम शुरू है, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय यह भारत का पहला ग्रामीण विश्वविद्यालय स्थापन किया। महाराष्ट्र के बीड जिले में उन्होंने बड़ा सामाजिक कार्य किया। प्रत्येक हाथ काम और हरेक के खेत को पानी यह उनके द्वारा चलाए उपक्रमों का उद्देश्य था। भूपेन हजारिका के कार्य के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा, अभिजात संगीत के साथ साथ ईशान्य भारत को शेष भारत से  सामाजिक, सांस्कृतिक दृष्टि से जोड़ने के लिए बड़ा प्रयास करनेवाले श्रेष्ठ संगीतकार भुपेन हजारीका को भारतरत्न मिलना राष्ट्रभक्त का गौरव है। भूपेंदा ने असमी, बंगाली, हिंदी भाषा के गीतों को संगीत देकर देशभर लोकप्रियता प्राप्त की. उन्होंने . गांधी अँड हिटलर, एक पल, रुदाली, दमन जैसे कई फिल्मों में गाये हुए गीत आज भी रसिकों के दिल में बसे हैं. पूर्व भारत का एक परिपूर्ण सांस्कृतिक चेहरा ऐसी उनकी पहचान सार्थक थी। ‘ओ गंगा बहती हो क्यूँ’ यह उनका गीत अत्यंत सुंदर है जो अमर हो गया है. बदलती संस्कृति, आचार विचार आदि पर इस गीत के माध्यम से उन्होंने प्रहार किया है. भूपेन हजारिका के संगीत, कला, सिनेमा और गायन आदि में उल्लेखनीय कामगिरी के कारण क्षेत्र को अलग महत्व प्राप्त हुआ है. उनका यह कार्य सबको प्रेरणादायक है. उनके कार्य के लिए उन्हें दिया गया देश का सर्वोच्च सम्मान उनके कार्य का गौरव करनेवाला है। स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक निर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह के रूप में प्रणव मुखर्जी की पहचान है. बैंकों का राष्ट्रीयीकरण, बांगलादेश युद्ध, 1973 का भीषण अकाल, हरितक्रांति आदि विविध घटनाओं के वे सहयात्री है. होशियारी और मेहनत करने की जिम्मेदारी के कारण पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के वे अत्यंत विश्वासू सहकारी बने. इंदिरा गांधी के कॅबिनेट में प्रणवदा ने कई महत्वपूर्ण खातों का का किया. देश में सबसे युवा अर्थमंत्री के रूप में उन्होंने कार्य किया। आदर्श राजनेता के रुप में नानाजी देशमुख ने हमेशा देश और समाज के हित विचार किया। गांवों को केंद्रबिंदू मानकर उनका विकास करना है यो इसके लिए क्या करना होगा, इसपर नानाजी ने  चित्रकूट में अपने प्रकल्प में कई प्रयोग किए। भूपेन हजारिका ने अपने गीतों से हमेशा मानवता और विश्वबंधुत्व का संदेश दिया. उनके अधिकतर गीत  आसामी भाषा में है फिर भी कई हिंदी और बंगाली गीत भी उन्होंने संगीतबद्ध किए। ईशान्य भारत का संगीत हिंदी सिनेमा के माध्यम से देश के कोनेकोने तक पहुंचाने का काम किया है, ऐसे शब्दों में शिंदे ने भूपेन हजारिका के कार्यकर्तृत्व का गौरव किया। इस समय वरिष्ठ सदस्य गणपतराव देशमुख , सदस्य पृथ्वीराज चव्हाण, अजित पवार, बसवराज पाटिल ने भी अपना मनोगत व्यक्त किया।