भूकंप से होनेवाले नुकसान को टालने के लिए पालघर में दिया जाए भूंकप अवरोधी निर्माणकार्यो पर जोर - मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
26 Feb 2019
702
मुंबई, (26 फरवरी 2019)- पालघर में भूकंप का झटका आना प्राकृतिक है।। इस नैसर्गिक आपत्ति से निपटने के लिए राज्य सरकार आवश्यक सभी उपाययोजना बना रही है। हालांकि इस नैसर्गिक आपत्ति से संपत्ति का नुकसान न हो, इसलिए भूकंप के झटके में भी टिकनेवाले सभी निर्माणकार्यों की रचना करना जरूरी है। इसके लिए जिले में भूकंप अवरोधी निर्माणकार्यो पर बल दिया जाए। साथ ही आपत्ति को मात देने के लिए नागरिकों को प्रशिक्षित करने की सूचना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी है। इसके अलावा भूकंप की घटनाओं पर ध्यान केंद्रित कर उचित उपाययोजना बनाने के लिए राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) को नोडल एजेंसी के तौर पर चयनित किए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी है। पालघर में लगातार आ रहे भूकंप की पृष्ठभूमि पर, विभिन्न विशेषज्ञों के साथ हाल ही में मंत्रालय में बैठक हुई। इस बैठक को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने ये निर्देश दिए। इस बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव प्रवीण परदेशी सहित अन्य अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद थे। इस बैठक में भूकंप प्रवण क्षेत्र में स्थित पालघर जिले के लिए किस उपाययोजना पर अमल किया जाए, इस पर अधिकारियों और विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न योजनाओं, एनजीआरआई और मौसम विभाग की सूचनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। राज्य सरकार ने पालघर में भूकंप का अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन किया है, जिसका प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के रवि सिन्हा को नियुक्त किया गया है। इस समिति में लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव, राहत व पुनर्वास विभाग के सचिव किशोर राजे निंबालकर, पालघर के जिलाधिकारी प्रशांत नारनवरे, आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर आलोक गोयल, नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के निदेशक वी.के. गहलोत, केंद्रीय जल व बिजली अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. वी. वी भोसेकर, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, भूकंप विशेषज्ञ डॉ. नागेश डी. समेत कईयों का समावेश है। पालघर में भूकंप का अध्ययन करने के लिए एनजीआरआई और भारतीय मौसम विभाग ने जिले में भूकंप सूचना उपकरण (सीस्मोग्राफ) स्थापित किए हैं। इसके माध्यम से जिले में होनेवाली भूकंप संबंधी हलचलों को रिकॉर्ड किया जा रहा है। हाल में आए भूकंप के झटकों के रिकार्ड लेकर एनजीआरआई की ओर से निकाले गए निष्कर्ष बैठक में प्रस्तुत किए गए। इस क्षेत्र में भूकंप के झटके आने की घटना पिछले कई वर्षों से चल रही है। पिछले कुछ महीनों में हुई घटना की पांच विभिन्न उपकरणों के माध्यम से रिकार्ड किया गया है। इसमें पाया गया है कि पिछले 15 दिनों में 600 सूक्ष्म भूकंप आए थे, जिसमें 3.9 रिएक्टर स्केल का झटका सबसे बड़ा सूक्ष्म भूकंप था। भूकंप से पालघर परिसर का 22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ और 15 किलोमीटर का पट्टा इसके प्रभाव में आया था। इस रिकॉर्ड में पाया गया कि यह प्राकृतिक घटना है। इन घटना की पृष्ठभूमि पर विशेषज्ञों ने जिले की इमारतों की संरचना में बदलाव करने का सुझाव दिया है। इस पर मुख्यमंत्री ने भूकंप अवरोधी इमारतों के निर्माण पर जोर देने का निर्देश दिया। इसके लिए मुख्यमंत्री ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को जिले के आर्किटेक, भवन निर्माताओं की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। बिल्डरों और आर्किटेक को कहा जाए कि वे भूकंप अवरोधी निर्माणकार्य के निर्देश पर अमल करें। इस क्षेत्र में भूकंप की घटनाओं पर नजर रखने के लिए जल संसाधन विभाग सूर्या और भातसा बांध पर प्रत्येक पर 5 एक्सेलेरोमीटर स्थापित करे। इसीतरह भूकंप में भी इन दोनों बांधों की संरचनात्मक अखंडता बनी रही, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाए। जिला प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग जिले की सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल परीक्षण करें और उन इमारतों का पुनर्निर्माण किया जाए जो कमजोर हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस क्षेत्र की सभी इमारतों का संरचनात्मक परीक्षण और मूल्यांकन करने के लिए आईआईटी एक व्यापक सर्वसमावेशक मानक तैयार कर दे। ताकि राज्य सरकार इन मानकों का उपयोग सभी जिलों की इमारतों का मूल्यांकन करने के लिए कर सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार आनेवाले भूकंप के सौम्य झटकों से न घबराकर, एेसी स्थिती में क्या किया जाए, इसका प्रशिक्षण जनता को दिया जाए। इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाई जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इसके लिए प्रचार और प्रसार सामग्री एनजीआरआई ने तैयार किया है, उसका उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने मौसम विभाग और एनजीआरआई को सूचित किया है कि वे पालघर में आनेवाले भूकंप के बारे में जानकारी दर्ज करें और उसकी सूचना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन सेल को नियमित दें।पालघर जिले में भूकंप की पृष्ठभूमि को देखते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने केंद्र सरकार से तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र के संरचनात्मक निर्माणकार्य का पुनरावलोकन करने का अनुरोध किया है।मंत्रालय में संपन्न हुई बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव प्रवीण परदेशी, लोक निर्माण विभाग के सचिव(सड़क) सी.पी जोशी, केंद्रीय जल व ऊर्जा संशोधन केंद्र के रिजवान अली, सूचना व जनसंपर्क महानिदेशालय के निदेशक (प्रशासन) अजय अंबेकर, लोकनिर्माण विभाग, ठाणे के अधीक्षक अभियंता आर.टी पाटिल समेत इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी मुंबई, नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इन्स्टिट्यूट, हैदराबाद, भारतीय मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, राहत व पुनर्वास विभाग और पालघर जिले के प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।