माल ढोनेवाली "एस.टी" की विश्वासार्ह सेवा

 12 Jun 2020  798

►माल ढोनेवाली बस की ५४३ फेरी, ३ हजार टन की मालवाहतूक

 ►९० हजार किलोमीटर की दौड़, २१ लाख रुपए का मुनाफा (उत्पन्न)

मुंबई, (12 जून 2020)-राज्य के प्रत्येक विभाग में १० की तरह ही ३३० बसेस का माल वाहतूक यानि माल ढोनेवाली बस में रुपांतर करने के लिए मंजूरी दी है और अब तक ७२  बसेस मालवाहतूक के लिए तैयार हुई है। एस.टी महामंडल की ओर पहले से ही ३०० मालवाहतूक बसेस (ट्रक में रुपांतरित) कार्यरत है। यानि की वर्तमान में ३७२ बसेस मालवाहतूक के लिए उपलब्ध है और आम लोगों की जीवनवाहिनी के रूप में लोकप्रिय रही ‘लालपरी’ यानि एस.टी बस अब मालवाहतूक के क्षेत्र में भी काम करते हुए दिखाई दे रही है। विश्वासार्हता एवं  सुरक्षितता इन दो प्रमुख बातों के कारण राज्यभर से एस. टी से मालवाहतूक करनेवालों की संख्या बढ़ रही है और इससे एस.टी महामंडल को भी अधिक मुनाफे (उत्पन्न) के रूप में नवसंजीवनी मिल रही है यानि पुनरुत्थान हो रहा है। २१ मई से अब तक मालवाहतूक एस.टी ने ५४३ फेरी  के तहत ३ हजार टन माल की वाहतूक राज्य के कोने-कोने में की है। इसके लिए ९० हजार कि. मी की दौड़ भी की है और इसके ऐवज में महामंडल को २१ लाख रुपए का उत्पन्न भी मिला है। राज्य की जीवनवाहिनी के रूप में एस.टी महामंडल की बसेस को देखा जाता है। जहां गाँव-वहाँ एस.टी इस तरह से जिस एस.टी का बहुत ही आदरपूर्वक उल्लेख किया जाता है, उस एस. टी बसेस ने लॉकडाऊन के दिनों में भी अपने सेवाभाव को रखते हुये परराज्य के 5 लाख से अधिक लोगों को उनके राज्यों की सीमाँ तक पहुंचाया है। तकरीबन १५२ लाख कि.मी की दौड़ इन बसेस ने की है। आम लोगों की यात्रा की सेवा में हमेशा तत्पर रहनेवाली हमारी लालपरी ने यात्रियों की वाहतूक के साथ-साथ मालवाहतूक में भी पदार्पण किया है और इसका सबसे अधिक लाभ कोरोना के दिनों में हुआ है। एस.टी के रुके हुये पहिये मालवाहतूक के लिए पूरे राज्यभर दौड़े है। एसटी महामंडल की हमारी बसेस से व्यावसायिक स्वरूप में माल वाहतूक कर सकती है, इसके लिए जरूरत के अनुसार पुरानी एसटी  बसेस में बदलाव कर उसका रूपांतर मालवाहू  वाहन में किया जा रहा है। जिन यात्री वाहन का विहित आयुर्मान (6.5 लाख किमी और 10 साल पूरा हो चुके) पूरा हुआ है, ऐसे यात्री वाहन की अंतर्गत रचना में बदलाव कर यह वाहनें मालवाहतुक के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार के तारीख १८ मई २०२०  की मान्यता के बाद मालवाहतूक बस का शुभारंभ रत्नागिरी से आम की पेटी बोरिवली को भेजकर किया गया। इसके बाद राज्यों के विविध क्षेत्र से अनाज, खाद्य-पदार्थ, बीज-बियाणे, खाद, सब्जियाँ, कृषि उत्पादन के साथ-साथ लोहे के पाइप, रंग के डिब्बे ऐसे विविध प्रकार के माल वाहतूक मालवाहू एस. टी से की जा रही है। राज्य में एस.टी महामंडल के २५० आगार है। करीब-करीब प्रत्येक तहसीलस्तर पर यह आगार कार्यरत है। इसके साथ-साथ ३१ विभागीय कार्यालये, ३३ विभागीय कार्यशाला, इस तरह से महामंडल का बड़ा विस्तार भविष्य में एस.टी के मालवाहतुक को सहयोग होगा। इन दिनों प्रत्येक जिलास्तर पर एस.टी ने मालवाहतुक का स्वतंत्र कक्ष निर्माण किया है और उनके जरिये एम.आय.डी.सी.,कारखानदार, लघुउद्योजक, कृषिजन्य वस्तूओं के व्यापारी के मेल-मिलाप से उन्हें एसटी के मालवाहतुक को लेकर भी जानकारी दी जा रही है। इसमें सरकार के कई महामंडल , व्यापारी अपना माल एस. टी के मालवाहतुक सेवा से भेजने के लिए उत्सुक है। पुणे, नाशिक, सातारा, सांगली, जलगांव, गढ़चिरोली, रत्नागिरी और कोल्हापुर यह जिले मालवाहतुक के क्षेत्र में आगे आए है। माफक दर, सुरक्षित एवं नियमित सेवा से एस.टी के मालवाहतुक को भविष्य में अच्छा प्रतिसाद मिलेगा, यह विश्वास है।