विपक्ष ने किया चाय पान का बहिष्कार

 16 Jun 2019  523

मुंबई, (16 जून 2019)- विधानसभा सत्र से पहले सरकार ने विपक्ष को एक साथ चाय पीने का न्यौता भेजा और विपक्ष ने इस बार भी उसे ठुकरा दिया। पिछले कई सालों से यही होता आ रहा है। रविवार को नवनियुक्त संसदीय कार्य मंत्री विनोद तावडे ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे के सरकारी बंगले पर जाकर विपक्ष को सरकार की चाय पार्टी के लिए आमंत्रित किया, लेकिन विपक्ष के नेताओं ने तावडे का सम्मान करते हुए सरकार की चाय-पार्टी में आने से मना कर दिया। रविवार की दोपहर मुंडे के निवास स्थान पर कांग्रेस, राकांपा, शेकाप, आरपीआई समेत अन्य दलों के नेताओं ने मिलकर सोमवार से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के बाबत चर्चा की। बैठक में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई और तय किया गया कि विपक्ष सरकार के चाय-पान पार्टी में शामिल नहीं होगा। इसके पीछे वजह यह बताई गई कि पिछले पांच सालों में सरकार ने कोई ऐसा काम नहीं किया, जिससे कोई संतुष्ट हो। यह सरकार जनता की समस्याओं को सुलझाने में पूरी तरह से नाकाम रही है, ऐसी सरकार के साथ विपक्ष कैसे बैठ सकता है। 

बैठक में विधानमंडल में कांग्रेस के नेता बाला साहेब थोरात, विजय वडेट्टीवार, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, राकांपा नेता जयंत पाटील, अजित पवार, छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटील, गणपतराव देशमुख, सपा विधायक अबू आसिम आजमी, जोगेंद्र कवाडे आदि शामिल थे। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि 17 जून को सूखा दिवस मनाया जाता है और उसी दिन विधानमंडल का वर्षा कालीन सत्र शुरू हो रहा है। सूखे को लेकर वे सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे, क्योंकि किसानों को जो मिलना चाहिए वह नहीं दिया गया। हमने किसानों को प्रति एकड़ 25,000 रुपये देने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने हमारी मांग मंजूर नहीं की। इसे भी विपक्ष जोरशोर से सदन में उठाएगा। सरकार का ऐसा कोई सकारात्मक काम नहीं है, जिससे कि विपक्ष सरकार के चाय-पान पार्टी को स्वीकार करें। सरकार की चाय बहुत कड़वी है जिसे पूरा महाराष्ट्र झेल रहा है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता ने कहा कि 1200 करोड़ रुपये के एफएसआई घोटाला प्रकरण में प्रकाश मेहता को केवल कैबिनेट से हटाने से कुछ नहीं होगा, उन पर गुनाह दाखिल कर कार्रवाई की जानी चाहिए। गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने पाला बदल दिया है। वे अब सरकार के साथ हैं और सरकार में मंत्री भी बन गए हैं। अब विपक्ष के पास उसका अपना नेता ही नहीं है। मॉनसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष हिरभाऊ बागडे से प्रतिपक्ष नेता देने की मांग करेगा। इस संबंध में विधानमंडल में राकांपा के नेता अजित पवार ने कहा कि हम विधानसभा अध्यक्ष से मांग करेंगे कि वे कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त करें। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं को तोड़ने का काम किया जा रहा है। क्या यह लोकतंत्र में सही है? सरकार विपक्ष का गला घोंट रही है। बता दें कि सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा और विधान परिषद के 12 दिन के मॉनसून सत्र में सरकार कुल 28 विधेयक पेश करेगी, जबकि इन्हीं 12 दिनों में साल 2019-20 का बजट दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। बजट पर चर्चा और राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा भी इसी सत्र में होगी। इतने कम समय के लिए बुलाए गए सत्र में यह सब संभव होगा पाएगा, इस पर सवाल पूछे जा रहे हैं।
मॉनसून सत्र की पूर्व दोपहर रविवार को सह्याद्रि अतिथि गृह में मुख्यमंत्री चाय पार्टी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पत्रकारों को बताया कि इस सत्र में सरकार 13 नए विधेयकों सहित कुल 28 विधेयक सदन में रखेगी। लोकसभा चुनावों में मिली सफलता से उत्साहित मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए उनकी सरकार पूरी तरह से तैयार है, बशर्ते वह सदन चलने दे और सदन की कार्यवाही में भाग ले। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भीषण सूखे से गुजर रहा है। सूखे से निपटने के लिए उनकी सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। किसानों की मदद के लिए 4,700 करोड़ और 3,200 करोड़ रुपये फसल बीमा योजना के सीधे किसानों के खातों में जमा कराया है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जानवरों के लिए क्या कुछ किया है, यह सब जानकारी सदन में विस्तार से देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारा छावनियों में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार न हो, इसके लिए सभी जानवरों को टैग लगा दिया गया है। जिस इलाके में पीने के पानी की दिक्कत है, वहां बड़ी संख्या में टैंकर की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत एक करोड़ 20 लाख किसानों के खातों में डायरेक्ट रकम जमा की जाएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार का साढ़े चार साल से ज्यादा कार्यकाल पूरा कर लिया है और आगामी अक्टूबर में विधानसभा के चुनाव होंगे, इसलिए यह सत्र इस सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र होगा। सत्र शुरू होने से महज चौबीस घंटे पहले 13 नए लोगों ने मंत्री पद की शपथ ली, जबकि छह मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि सितंबर के पहले सप्ताह में विधानसभा चुनावों की घोषणा की जाएगी। यानी नए मंत्रियों को ज्यादा से ज्यादा 90 दिन मिलेंगे। सन 2014 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष फडणवीस ने चुनाव प्रचार में ऐलान किया था कि उनकी सरकार जब बनेगी तो पहली कैबिनेट में ही धनगर समाज को आरक्षण देने का प्रस्ताव मंजूर करेंगे, लेकिन अब चुनाव सिर पर है और अबतक धनगर समाज को आरक्षण नहीं दिया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले पर गंभीर है और इस पर काम चल रहा है, जल्द ही धनगर समाज को आरक्षण देने का प्रस्ताव मंजूर करेंगे। उन्होंने दावे के साथ कहा कि सालों से लंबित मराठा समाज आरक्षण का निर्णय उनकी सरकार ने ही लिया है। मेडिकल ग्रेजुएट में एडमिशन के लिए मराठा समाज के विद्यार्थियों को आ रही अड़चनों को उनकी सरकार ने दूर किया। विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोक नहीं पा रहा है, इसलिए उन्हें ऐसा लग रहा है कि भाजपा उनकी पार्टी को तोड़ रही है। क्या उनके नेताओं को अपने कार्यकर्ता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि पर भरोसा नहीं है? मुख्यमंत्री ने साफ किया कि किसी भी राजनीतिक तोड़-फोड़ में उनका विश्वास नहीं है। वे अपनी पार्टी और खुद को आगे ले जाने के लिए काम कर करे हैं, ऐसे में उनके साथ लोग जुड़ रहे हैं। विपक्ष के पास नेतृत्व नहीं है। इसलिए उनकी पार्टी के लोग उनका साथ छोड़ रहे है। विपक्ष के पास कोई नया मुद्दा नहीं है इसलिए वे वहीं पुराने मुद्दे राग अलाप रहे हैं। राज्य की पिछली आघाडी सरकार की 15 साल तक सत्ता में रही लेकिन वे जनता के साथ नहीं जुड़ सके। बता दें कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली विजय के बाद महाराष्ट्र विधानमंडल का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जो 2 जुलाई तक चलेगा। तीन सप्ताह तक चलने वाले सत्र में 12 दिन सदन की कार्यवाही चलेगी। फडणवीस सरकार के इस कार्यकाल का यह अंतिम सत्र होगा। सत्र खत्म होने के बाद उन्हें अब विधानसभा चुनावों का सामना करना पड़ेगा। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वित्तमंत्री मतदाताओं के लिए अपना खजाना खोल देंगे। लॉलीपॉप योजनाओं की भरमार होगी। सत्र के दूसरे दिन 18 जून को दोनों सदनों में साल 2019-20 का बजट रखा जाएगा।