एक हजार किमी पूरा करने में लगेंगे 3 दिन, आस्था के 8 रूपों के होंगे दर्शन

 26 Sep 2015  2190
ये आठ अति प्राचीन मंदिर भगवान गणेश के आठ शक्तिपीठ भी कहलाते हैं। इन मंदिरों का पौराणिक महत्व और इतिहास है। इनमें विराजित गणेश की प्रतिमाएं खुद से बनी हैं, ऐसा माना जाता है। इन पवित्र मूर्तियों के मिलने के क्रम के अनुसार ही अष्टविनायक की यात्रा की जाती है। धार्मिक महत्व के अनुसार यात्रा करने पर पुणे से करीब एक हजार किमी का सफर करना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार, इस यात्रा को मोरगांव से शुरू कर वहीं आकर समाप्त करना चाहिए। आमतौर पर यह यात्रा तीन दिन में पूरी होती है। ऐसा कहा जाता है कि अष्टविनायक की यात्रा के दौरान घर नहीं जाना चाहिए। कई टूर ऑपरेटर अपनी सुविधा से यात्रा का मार्ग और क्रम बदल लेते हैं। ऐसी मान्यता है कि यात्रा शास्त्रों में बताए क्रम अनुसार ही करना चाहिए। इस यात्रा का महत्व भी 12 ज्योर्तिलिंगों जैसा है।
 
1.श्री मयूरेश्वर मंदिर, मोरगांव
यह मंदिर पुणे से 80 किलोमीटर दूर स्थित है। मयूरेश्वर मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और लंबे पत्थरों की दीवारें हैं। यहां चार द्वार हैं। ये चारों दरवाजे चारों युग सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग के प्रतीक हैं। इस मंदिर के द्वार पर शिवजी के वाहन नंदी बैल की मूर्ति बनी है। इसका मुंह भगवान गणेश की मूर्ति की ओर है। नंदी की मूर्ति के बारे में यहां प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में शिवजी और नंदी इस मंदिर क्षेत्र में विश्राम के लिए रुके थे, लेकिन बाद में नंदी ने यहां से जाने के लिए मना कर दिया। तभी से नंदी यहीं स्थित हैं।
 
Other temples:
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